क्या केरल की गोल्ड स्मगलिंग का रिश्ता टेरर फाइनैंसिंग से है?

क्या केरल की गोल्ड स्मगलिंग का रिश्ता टेरर फाइनैंसिंग से है?
सरित और स्वप्ना सुरेश.

केरल गोल्ड स्मगलिंग केस (Gold Smuggling Case) के आतंकवादी फंडिंग (Terror Funding) से जुड़े होने का शक पहले ही जताया जा रहा था. अब राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (NIA) ने इसे बड़ी साज़िश करार दिया है तो मामला बेहद संगीन हो गया है. जानिए कैसे यह मामला हाई लेवल की साज़िश, राजनीति, माफिया, आतंकवाद और हवाला से जुड़ा है?

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NIA ने केरल में सोने की तस्करी मामले के अभियुक्तों स्वप्ना सुरेश (स्पेस पार्क में जूनियर कंसल्टेंट रहीं) और संदीप नायर की कस्टडी के लिए जो रिमांड नोट पेश किया, उसमें कहा कि के टी रमीस इस ऑपरेशन का सरगना था. इन सभी आरोपियों ने मिलकर देश की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को नुकसान पहुंचाने और कई तरह से आतंकवाद (Terrorism) को फंडिंग करने की साज़िश रची. UAE से सोने की इस भारी तस्करी के कारण भारत की सुरक्षा के लिए खतरे सामने आए तो ये भी संभव है कि यूएई की डिप्लोमेसी का भी इसमें इस्तेमाल किया गया हो. जानिए कितना संगीन है ये केस.

कौन है सरगना केटी रमीस?
केरल गोल्ड स्मगलिंग मामले में रमीस का नाम मुख्य सरगना के तौर पर उभरकर सामने आ रहा है. एनआईए को संदीप नायर ने जो बयान दिया, उसके हवाले से कहा जा रहा है कि रमीस ने लॉकडाउन के दौरान सोने की तस्करी भारी मात्रा में करने की योजना बनाई क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था कमज़ोर थी. रिपोर्ट यह भी कहती है कि सरगना रमीस हमेशा लोगों के समूह के साथ दिखता है और उसके विदेशों तक काफी संपर्क हैं.

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स्पेस पार्क में आपरेशन मैनेजर पद पर नियुक्त रही स्वप्ना सुरेश तस्करी मामले में आरोपी है.

कैसे इस केस के तार जुड़े?


केरल गोल्ड स्मगलिंग केस में तब बड़ा मोड़ आया था जब इस मामले में मुख्य गवाह राशेद अल्शेमेली अचानक करीब 10 दिन पहले दिल्ली से यूएई की उड़ान लेकर देश से भाग गया था. तबसे ही एनआईए इस मामले के तार हवाला नेटवर्क और आतंकवाद से जुड़े होने की जांच कर रही थी. अब एनआईए की रिपोर्ट आ गई है और यह भी कहा जा रहा है कि मनी लॉंड्रिंग के एंगल के चलते जल्द ही ईडी भी इस मामले में जांच शुरू कर सकती है.

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क्या है इस केस में राजनीति का लिंक?
इस केस ने केरल की सियासत में हलचल पैदा कर रखी है. एक मीडिया रिपोर्ट की मानें तो मुख्यमंत्री पी विजयन पर विपक्ष इस्तीफे का दबाव इसलिए बना रहा है क्योंकि आरोपियों के साथ सीएम के प्रमुख सचिव एम शिवशंकर के संबंध होने के आरोप लगाए गए हैं. इस मामले के मुख्य आरोपी के साथ शिवशंकर के कथित कॉल रिकॉर्ड मीडिया में आने के बाद कस्टम विभाग ने उन्हें तलब भी किया. वहीं, राज्य सरकार इसे बीजेपी और कांग्रेस की राजनीति बताकर आरोप खारिज कर रही है.

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कोच्चि विशेष अदालत में सरित को पेश करने ले जाते पुलिस अधिकारी.


क्या है केरल गोल्ड स्मगलिंग केस?
यूएपीए 1967 के सेक्शन 16, 17 और 18 के तहत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. एनआईए ने कहा था कि ये केस त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट से ज़ब्त किए गए करीब 15 करोड़ के 24 कैरेट के 30 किलो सोने से जुड़ा है. यही नहीं, ये भी कहा गया कि यूएई कॉंसुलेट में पीआरओ रह चुके पी एस सरित ने तस्करी के सोने के कई कंसाइनमेंट रिसीव किए थे.

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कुल मिलाकर यह केस अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तस्करी का है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से जुड़ा है. इस तस्करी के ज़रिए आतंकवाद फंडिंग होने के एनआईए के दावे के बाद अब नज़रें हैं कि क्या एजेंसी पुख्ता सबूतों के साथ इसे साबित कर पाएगी.
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