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दुनिया का बहुत खास शहर है बेरूत, जो ज़बरदस्त विस्फोट से आधा तबाह हो गया

पोर्ट पर हुए धमाके के बाद बेरूत की एक तस्वीर.

पोर्ट पर हुए धमाके के बाद बेरूत की एक तस्वीर.

लेबनान (Lebanon) की राजधानी, अरब दुनिया (Arab World) की 'पार्टी कैपिटल' और दुनिया की सबसे पुरानी बस्तियों में शामिल एक शहर. Covid-19 वैश्विक महामारी से जूझने के दौरान एक परमाणु बम जैसे धमाके से बुरी तरह थर्रा गया यह शहर आपसे कुछ कहना चाहता है कि इसे क्यों देखा, समझा और सहेजा जाना चाहिए.

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    डर्बन, दोहा, विगान, हवाना, कुआलालंपुर, ला पाज़ और बेरूत, इन सातों शहरों को न्यू 7 वंडर्स सिटीज़ (New7Wonders City) में 2015 में औपचारिक रूप से चुना गया था. जी हां, लेबनान की राजधानी मैं वही बेरूत हूं, जहां एक दिन पहले ही एक ज़बरदस्त विस्फोट (Beirut Blast) से हुई भारी तबाही की चपेट में मेरा करीब आधा हिस्सा आ गया. यूं तो विस्फोट बंदरगाह (Beirut Port) पर हुआ, लेकिन बंदरगाह के साथ ही शहर की कई इमारतें भी ध्वस्त हो गईं और मेरे सवा से ज़्यादा बाशिंदे मारे जा चुके.

    लेबनान का जो किनारा भूमध्य सागर के साथ लगता है, वहीं एक छोटे से प्रायद्वीप पर बसा हुआ शहर मैं, बेरूत, अपने देश यानी लेबनान का सबसे बड़ा, सबसे खास और दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक हूं. अपने देश की राजधानी ही नहीं बल्कि संस्कृति, राजनीति, अर्थव्यवस्था और पर्यटन का भी केंद्र हूं. मेरे बारे में जिसने जाना है, उसने दुनिया के इतिहास और संस्कृति के एक बड़े अध्याय को समझा है.

    मिली जुली आबादी का शहर
    इससे पहले कि मैं आपको अपने गुज़रे ज़माने के ज़ख़्म दिखाऊं और इतिहास के किस्से सुनाऊं, पहले ये जानिए कि दुनिया में जो कॉस्मोपॉलिटन शहर हैं, उनमें मैं बहुत खास रहा हूं. मेरे बाशिंदों की गिनती आखिरी बार 2007 में हुई थी, लेकिन एक हालिया अंदाज़ा यूं है कि मेरी गोद में 10 लाख से ज़्यादा लोग बसते हैं. मेरा फैलाव भी हो रहा है यानी ग्रेटर बेरूत की आबादी भी जोड़ें तो करीब 22 लाख लोग मेरे बाशिंदे हैं.

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    अरब वर्ल्ड के सांस्कृतिक शहर बेरूत की एक तस्वीर Pixabay से साभार.


    मेरे बाशिंदों में सबसे ज़्यादा ईसाई और मुस्लिम हैं. करीब 45 फीसदी ईसाई आबादी है तो करीब 50 फीसदी मुस्लिम हैं. 5 फीसदी द्रूज़ भी हैं, जो मुस्लिमों का ही एक अलग समुदाय है. मुस्लिम आबादी में शिया और सुन्नी आधे आधे हैं. ईसाइयों के कई समुदाय रहते हैं. परंपरा कुछ ऐसी रही है कि मेरा मेयर हमेशा सुन्नी मुस्लिम होता है और गवर्नर हमेशा यूनानी ईसाई समुदाय का व्यक्ति बनता है.

    सिविल वॉर से मिले दर्द याद हैं?
    इस तरह की मिली जुली आबादी का अपना एक इतिहास रहा. थोड़े में बताऊं तो लेबनान में हमेशा से मिली जुली आबादी थी. फिर 1920 से 1943 के बीच फ्रांसीसी औपनिवेशिक शक्तियों के असर से यहां की सियासत और धार्मिक ढांचों में बदलाव हुए. ईसाइयों ने संसदीय सिस्टम को तरजीह दी तो यहां की अरबी ज़मीनों से जुड़ी मुस्लिम आबादी ने इसका विरोध किया. फिर 1948 से 1967 के बीच करीब 1 लाख फिलीस्तीनी रिफ्यूजी लेबनान आकर बसे, तो आबादी का पलड़ा मुस्लिमों की तरफ झुका.

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    अरब देशों की सियासत, यूरोपीय देशों की रणनीतियों और सोवियत रूस के शीत युद्ध से लेबनान पर कई तरह से असर पड़े. इन तमाम वजहों से 1975 में लेबनान के भीतर ईसाइयों और मुस्लिमों के बीच जंग जैसे हालात शुरू हुए. 1990 तक चले इस गृह युद्ध यानी सिविल वॉर में मेरे देश में करीब सवा लाख लोग मारे गए. 2012 में देखा गया कि करीब 76000 लेबनानी अपने देश से विस्थापित हो चुके थे. चूंकि मैं देश का सबसे बड़ा और प्रमुख शहर था इसलिए मेरी गलियों और चप्पों पर कलाकारों ने इस जंग की दर्द भरी यादों की तस्वीरें संजो दीं.

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    2750 टन अमोनियम नाइट्रेट के विस्फोट के बाद बेरूत की एक तस्वीर.


    मेरे पीछे है सदियों का इतिहास
    ये ज़ख़्म तो पिछले कुछ सालों के हैं, लेकिन मेरा इतिहास इससे बहुत पुराना और गौरवशाली रहा है. मैंने अपने इतिहास मे दुनिया की कई सभ्यताओं और तहज़ीबों के लोगों को न केवल देखा ​बल्कि अपनाया. यूनानी, रोमन, अरब, ओटोमान, तुर्क और फ्रेंच... न जाने कहां कहां से लोग मुझ तक आए. कोई हमलावर की शक्ल में आया तो कोई मेहमान की, लेकिन फिर बहुत से लोग मेरे ही होते चले गए.

    लंबे अरसे तक अपनी सांस्कृतिक ज़िन्दादिली के लिए मुझे जाना जाता रहा है. यूं ही थोड़े मुझे 'अरब दुनिया में जश्न की राजधानी' कहा जाता रहा. दुनिया के सबसे शुरूआती लॉ स्कूलों की बात हो, या किस्म किस्म के संग्रहालयों की या जगह जगह दिखने वाली आर्ट गैलरीज़ की, मेरा जिक्र इज़्ज़त के साथ होता रहा. मेरी संपन्नता और समृद्धि का आलम ये रहा कि मिडिल ईस्ट में सबसे महंगे शहरों में मेरा शुमार रहा.

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    साल 2019 में दुनिया भर के पर्यटकों ने मुझे 'मस्ट विज़िट' शहर माना. पहले भी दुनिया के पर्यटन नक्शे पर मेरा ज़िक्र होता रहा. फैशन और फूड में दुनिया की पसंद रहा. ग्रीस के एथेंस, यूएस के लॉस एंजिल्स, रूस के मॉस्को, आर्मेनिया की राजधानी येरेवान और इज़रायल के नाज़रेथ शहरों के 'जुड़वां शहर' के तौर पर मुझे पुकारा जाता है. पर्यटन के साथ ही बैंकिंग, फाइनेंस और पोर्ट के ज़रिये कारोबार मेरी अर्थव्यवस्था के आधार हैं.

    ऐसा नहीं कि मेरे वजूद में कोई समस्या है ही नहीं! कुछ ही साल पहले मेरे बाशिंदों ने गार्बेज संकट का सामना किया था. इसके अलावा मेरा 80 फीसदी से ज़्यादा हिस्सा सीमेंट कॉंक्रीट से पाट दिया गया है, मेरी गोद में सिर्फ दो ही काबिले ज़िक्र बगीचे रह गए हैं. क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वॉर्मिंग मेरे सामने बड़े मुद्दे हैं.

    इनके अलावा, इस साल कोरोना वायरस के कहर से मेरी अर्थव्यवस्था और आबादी को बड़ी तकलीफ हुई. मैं इस दर्द को झेल ही रहा था कि पोर्ट पर एक वेयरहाउस में इलेक्ट्रिकल कामों के चलते हुए धमाके ने एक और नई मुश्किल खड़ी कर दी. मैं, बेरूत, करीब आधा तो मलबे में दब चुका हूं लेकिन मुझे विश्वास है कि मैं एक बार फिर खड़ा हो सकूंगा.

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