एक भाषण से राजनीति में यूथ आइकॉन बने जेटीएन से देश को क्या हैं उम्मीदें?

#DigitalPrimeTime: जेटीएन (JTN) उर्फ जामयांग सेरिंग नामग्याल (Jamyang Tsering Namgyal) को एक भाषण के बाद सोशल मीडिया ही नहीं बल्कि भाजपा हाईकमान (BJP) ने भी खूब सराहा. इस युवा सांसद के बारे में हर वो बात, जो आप जानना चाहते हैं.

News18Hindi
Updated: August 12, 2019, 9:03 PM IST
एक भाषण से राजनीति में यूथ आइकॉन बने जेटीएन से देश को क्या हैं उम्मीदें?
लद्दाख लौटने पर सांसद का ज़बरदस्त स्वागत हुआ.
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Updated: August 12, 2019, 9:03 PM IST
मेरी आँखों का ख्वाब बस तुम हो, मेरे दिल का अरमान बस तुम हो, जीते हैं हम बस तुम्हारे सहारे, क्योकि मेरे दिल की धड़कन बस तुम हो... सिर्फ ढाई तीन महीने पहले फेसबुक पर जो युवा नेता अपनी पत्नी के लिए इस तरह की पोस्ट लिख रहा था, अब अपने भाषण के वीडियो, लोकसभा (Lok Sabha) की तस्वीरें और नए प्रदेश की तस्वीर बदलने संबंधी जानकारियां पोस्ट कर रहा है. ये युवा नेता रातों रात देश में ताज़ा सनसनी बन रहा था, सोशल मीडिया (Social Media) पर ट्रेंड कर रहा था और उसके मुरीद फॉलोअर्स के तौर पर लगातार बढ़ते जा रहे थे, लेकिन उस युवा नेता के माता पिता यही कह रहे थे कि टीवी पर बार-बार तुम दिख रहे हो, क्या चल रहा है..! क्या कहानी है राजनीति में यूथ आइकॉन (Youth Icon) बन गए इस युवा नेता की?

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ये युवा नेता लद्दाख (Ladakh) का वो चेहरा है, जिसे हाल में पूरे देश ने लोकसभा में 20 मिनट का भाषण देते सुना. लद्दाख के एक सामान्य किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले 34 वर्षीय सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल अपने एक भाषण से सिर्फ लद्दाख नहीं, बल्कि पूरे देश और शीर्ष नेतृत्व (High Command) के चहेते के रूप में उभरकर सामने आए हैं.

भाजपा सांसद नामग्याल का बैकग्राउंड क्या है? उनका परिवार कैसा है? इस युवा सांसद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा का शीर्ष नेतृत्व क्यों इतना महत्व दे गया? किन कारणों से नामग्याल रातों रात सोशल मीडिया स्टार बन गए और उनका राजनीतिक बैकग्राउंड क्या कहानी बयान करता है? और अब उनसे लद्दाख व देश को क्या उम्मीदें हैं? इन सब सवालों के जवाब हम आपको डिजिटल प्राइमटाइम स्टोरी में देंगे, जिसमें लद्दाख के इस सांसद के बहाने लद्दाख के ज़मीनी इतिहास के साथ ही वहां भविष्य की संभावनाओं की परतों को भी टटोला जाएगा.

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लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बिल पर लोकसभा में भाषण के दौरान नामग्याल.


'मेरी फ्रेंड लिस्ट लिमिट तक पहुंच गई'
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कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित किए जाने के कानून को लेकर बीते 6 अगस्त को नामग्याल ने लोकसभा में लद्दाख के लोगों की भावनाओं को अपने भाषण में रखा. 7 अगस्त को हालत ये थी कि नामग्याल को फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर कहना पड़ा कि 'मैं और फ्रेंड रिक्वेस्ट नहीं ले सकता क्योंकि एफबी की लिमिट क्रॉस हो गई है. आप लोग प्लीज़ अब मुझे और मेरे एफबी पेज को लाइक व फॉलो करें'. इसी तरह ट्विटर पर नामग्याल के फॉलोअर्स की संख्या कुछ हज़ार से सवा दो लाख से ज़्यादा हो गई. एक भाषण की वजह से नामग्याल सोशल मीडिया के हॉट ट्रेंड बन गए.

भाषण में नामग्याल ने कहा क्या था?
लोकसभा में अपने भाषण के दौरान नामग्याल ने लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के फैसले का ज़बरदस्त समर्थन करते हुए 'मोदी है तो मुमकिन है' नारे को दोहराते हुए सीधे तौर पर पूर्ववर्ती कांग्रेस व नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकारों पर हमला बोला था. नामग्याल ने साफ कहा था कि लद्दाख के साथ हमेशा भेदभाव किया जाता रहा और उसे कश्मीर राज्य के तहत रखकर अन्याय किया गया. बकौल नामग्याल लद्दाख पिछले 71 सालों से अलग प्रदेश की मांग कर रहा था, जो अब मंज़ूर हुई.

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नामग्याल का एक मौके पर अभिनंदन करते पीएम नरेंद्र मोदी.


इस भाषण में नामग्याल ने नेहरू व शेख अब्दुल्ला की नीतियों सहित विपक्ष पर तीखे हमले किए और एक जुमला दिया कि 'लद्दाख के अलग केंद्रशासित प्रदेश बनने से ये नुकसान होगा कि कश्मीर के दो परिवारों की रोजी रोटी बंद हो जाएगी'. भाषण के दौरान लोकसभा में भाजपा एवं एनडीए नेताओं ने कई बार मेज़ थपथपाकर नामग्याल की तारीफ और हौसला अफ़ज़ाई की.

क्या इस भाषण के पीछे कोई कहानी थी?
अगर आपको लगता है कि केंद्र सरकार ने ये फ़ैसला जम्मू कश्मीर राज्य की समस्याओं को ही ध्यान में रखकर लिया और लद्दाख को अलग राज्य बनाया जाना कश्मीर समस्या को हल करने का साइड इफेक्ट रहा, तो ऐसा नहीं है. लद्दाख लंबे समय से कश्मीर की व्यवस्था से अलग होने की मांग कर रहा था. युवा सांसद नामग्याल खुद भी इस आंदोलन का हिस्सा रहे हैं और पांच साल पहले 2014 में उन्होंने एक लेख लिखा था, जिसका शीर्षक था 'डिवीज़नल स्टेटस फॉर लद्दाख-इट्स इंप्लिकेशन्स'. नामग्याल के इस लेख के कुछ अंश देखिए...

'कश्मीरी नेतृत्व ने हमेशा लद्दाखी जनता के लिए 'फूट डालो राज करो' की नीति अपनाई. उन्होंने हमेशा दिशाभ्रमित किया कि अगर लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया तो मुस्लिम आबादी बौद्ध आबादी के नीचे दबकर अत्याचार की शिकार होगी...'
'शेख अब्दुल्ला ने ग्रेटर लद्दाख का जो आइडिया दिया था, वो अस्ल में लद्दाख को हमेशा मुख्यधारा से दूर रखने और कश्मीर की व्यवस्था के अधीन रखने के नज़रिए से ही दिया गया था..'
'डिवीज़नल स्टेटस? आप क्यों इस तरह के बड़े लेकिन गलत निर्णय ले रहे हैं, वो भी लद्दाख के नेताओं और लोगों की भावनाओं को नज़रअंदाज़ करते हुए? क्या आप लद्दाख के लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं?'



कुल मिलाकर कहानी ये है कि नामग्याल अपने पूर्ववर्ती लद्दाखी नेताओं के नक्शे कदम पर चलते हुए हमेशा से इसी पक्ष की वकालत करते रहे कि लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मिले. स्पष्ट है कि पिछले दिनों लोकसभा में नामग्याल का भाषण आकस्मिक नहीं था और न ही केंद्र सरकार के फैसले का कसीदा भर था, बल्कि नामग्याल इसके पूरे इतिहास से न केवल वाकिफ़ रहे हैं बल्कि उसमें शामिल रहे हैं.

युवा राजनीति का प्रतीक
देश इस बार की संसद में कई युवाओं के चेहरे देख रहा है, जिनमें से नामग्याल का नाम प्रमुख बन गया है. हालांकि नामग्याल का राजनीतिक करियर बहुत पुराना नहीं है, लेकिन उनकी बातें संकेत देती हैं कि उन्होंने लद्दाख की समस्याओं और उससे जुड़ी राजनीति के प्रति अच्छी समझ बनाई है इसलिए सोशल मीडिया पर उन्हें युवा नेतृत्व का एक आइकॉन करार दिया जा रहा है. इसी दशक की शुरूआत में छात्र नेता के रूप में राजनीति में आने के बाद उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति का सफर शुरू किया. वह लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल के प्रमुख रहे और इस बार सांसद का चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंचे हैं.

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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के साथ नामग्याल.


भाषण के बाद लद्दाख में असर
लोकसभा में नामग्याल के चर्चित भाषण के बाद लद्दाख में बड़ा असर देखने को मिला. जब नामग्याल लद्दाख लौटे तो ढोल नगाड़े बजाकर भारी भीड़ ने उनका स्वागत किया और इसकी तस्वीरें नामग्याल ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं. पूरे लद्दाख में ऐसा जश्न देखा गया जैसे कोई विजेता या हीरो वहां पहुंचा हो. यही नहीं, नामग्याल के भाषण के असर की कहानी ये भी है कि पीएम मोदी ने ट्वीट करके उनके भाषण की तारीफ की. स्मृति ईरानी ने भी नामग्याल के भाषण को ट्वीट कर शेयर किया.

किस परिवार से आते हैं जेटीएन?
जामयांग सेरिंग नामग्याल खुद को सामान्य किसान परिवार की संतान बताते हैं. उनकी मां इशे पुटिट एक गृहिणी हैं जबकि पिता स्टैंज़िन मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस के लिए एक कारपेंटर के तौर पर काम करते रहे हैं. परिवार और दोस्तों में नामग्याल को जेटीएन के नाम से ही पुकारा जाता है. लोकसभा में भाषण के बाद सनसनी बन गए जेटीएन ने एक टीवी शो में कहा कि दिन भर सोशल मीडिया और टीवी पर उनकी चर्चा हो रही थी, तब उनका परिवार उनसे यही पूछ रहा था कि ये सब क्या हो रहा है क्योंकि उनका परिवार राजनीति से दूर है और ग्रामीण परिवेश में एक सामान्य जीवन बिताता है.

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पत्नी सोनम के साथ नामग्याल. जेटीएन अपने निजी जीवन की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर करते रहे हैं.


जेटीएन ने इसी साल की शुरूआत में डॉक्टर सोनम वांगमो के साथ शादी की थी, जो सरकारी नौकरी करती हैं. बगैर किसी पारिवारिक बैकग्राउंड के राजनीति में आने वाले जेटीएन ने चुनाव के वक्त दाखिल किए एफिडेविट में बताया था कि उनके पास कुल संपत्ति 10 लाख रुपये की है.

अब क्या है जेटीएन के लिए आगे का रास्ता?
लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि विकास होगा तो क्या लद्दाख की प्रकृति या पर्यावरण को खतरा होगा? ये भी सवाल है कि लद्दाख के भविष्य को अब कैसे देखा जाए. इन सब मामलों पर जेटीएन ने एक टीवी इंटरव्यू में साफ कहा कि लद्दाख में लैंड प्रोटेक्शन पहले से है. यहां पॉलीथीन पूरी तरह प्रतिबंधित है और ये भी कहा कि उनके स्वागत में यहां किसी ने पटाखे नहीं फोड़े. कुल मिलाकर जेटीएन ये साबित करना चाह रहे थे कि लद्दाख के लोग पर्यावरण को लेकर जागरूक हैं और यहां के प्रशासन को विकास या निवेश करने वाली कंपनियों के लिए इस तरह की हिदायतें साफ रखनी होंगी कि यहां प्रकृति को नुकसान न पहुंचे.

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प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संदेश सुनते हुए नामग्याल.


दूसरी बात ये कि नामग्याल लद्दाख को देश ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए हर्बल और औषधीय उत्पादों के निर्माता के तौर पर पहचान दिलाना चाहते हैं. इसके लिए वह पहले ही एक मिशन छेड़ चुके हैं 'मिशन ऑर्गेनिक डेवलपमेंट इनिशिएटिव' यानी 'मोदी'. नामग्याल बताते हैं कि इस मिशन का उद्देश्य लद्दाख को आत्मनिर्भर और विकसित बनाना ही है. इसके साथ ही लद्दाख को पर्यटन के नक्शे पर आगे बढ़ाने को लेकर भी नामग्याल काफी उत्साहित हैं.

और लेखक भी हैं जेटीएन
जैसा कि इस लेख में पहले उल्लेख किया जा चुका है कि नामग्याल पहले भी राजनीति व लद्दाख से जुड़े कई विषयों पर लिखते रहे हैं. इसके अलावा वह एक कवि भी हैं और उनकी कविताओं की एक किताब भी छप चुकी है जिसके शीर्षक का हिंदी अनुवाद 'कविता का तोहफ़ा' है. साथ ही, वह लद्दाख की भाषा 'भोती' को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की पैरवी करते हुए भी कुछ लेख लिख चुके हैं.

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First published: August 12, 2019, 9:03 PM IST
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