LOCKDOWN को लेकर जिधर देखो उधर अफवाह.. क्यों और कैसे फैलती हैं अफवाहें?

न्यूज़18 क्रिएटिव
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Coronavirus संक्रमण के दौर में अफवाहों का संक्रमण तेज़ी से फैलने की खबरें हैं. लॉकडाउन को लेकर सोशल मीडिया (Social Networks) के साथ ही मीडिया के ज़रिये भी Fake News फैलाने की बातें लगातार चर्चा में हैं. ऐसे में जानिए कि क्या है अफवाह फैलाने का Science और Maths और क्या कहता है मनोविज्ञान (Psychology).

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भारत में Covid-19 के साथ ही कई और तरह की महामारियां पैदा हो रही हैं या पनप रही हैं. इनमें से एक है अफवाहों (Rumors) की महामारी. Social Media पर एक मैसेज इस तरह Viral हो जाता है, जिससे कई लोगों में हलचल मच जाती है और अफरातफरी मच जाती है. इस तरह की अफवाहें फैलाने वालों को अंदाज़ा तक नहीं होता कि कितने लोग बेवजह परेशान होते हैं और प्रशासन (Administration) के लिए भी नियंत्रण कितना कठिन हो जाता है.

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लॉकडाउन को लेकर देश के कई राज्यों में तरह तरह की अफवाहें फैलने का दौर एक बार ​फिर जारी है. सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से अफवाह थी कि 15 जून से देश में फिर लॉकडाउन होने वाला है. इन दिनों अफवाह फैल रही है कि 18 जून से फिर लॉकडाउन होगा. इसी तरह की और अफवाहों से कैसी परेशानियां हो रही हैं? और फिर जानेंगे कि सोशल मीडिया पर ​अफवाहें फैलने का गणित और विज्ञान क्या है.



तंबाकू और गुटखे के लिए मारामारी!
राजस्थान में सरकार ने प्रदेश की सीमाएं सील करने का आदेश दिया तो पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ी कि प्रदेश में लॉकडाउन के साथ ही तंबाकू उत्पादों पर बैन लगने वाला है. भीड़ की भीड़ उमड़ पड़ी. कालाबा​ज़ारियों की चांदी हो गई. महज़ चार घंटे में तंबाकू के विक्रेताओं ने माल खत्म हो जाने की घोषणा कर दी. इस बीच, सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां भी उड़ीं और कइयों ने मास्क भी नहीं पहना.

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लॉकडाउन संबंधी खबरों के मद्देनज़र पहले भी शॉपिंग के लिए लोगों के बड़े तादाद में इकट्ठे हो जाने की खबरें रही हैं. फाइल फोटो.


बाज़ारों में उमड़ पड़ी भीड़!
उत्तर प्रदेश में कई जगह यह अफवाह उड़ी कि फिर लॉकडाउन होने वाला है तो बाज़ारों में खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ पड़ी. होलसेलरों के हवाले से खबरों में कहा गया कि आगरा में लोग पहले की तरह लॉकडाउन में खाद्यान्न की कमी से फिर नहीं जूझना चाहते थे इसलिए कई महीनों के स्टॉक के लिए जमकर खरीदारी की गई. नतीजा वही हुआ कि नियम टूटे और दुकानदारों ने मनमानी कीमतें वसूलीं.

लॉकडाउन को लेकर कई जगह कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं. इसी के चलते राज्यों ने अपने लोगों के सामने सफाई पेश करने का सिलसिला भी शुरू किया है. मसलन महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने राज्य में फिर लॉकडाउन सख्त होने संबंधी मीडिया और सोशल मीडिया खबरों को अफवाह बताया. आखिर सोशल मीडिया पर कैसे फैलती हैं अफवाहें? क्या इसे किसी वैज्ञानिक ढंग से समझा जा सकता है?


क्या है अफवाह फैलने का गणित?
सोशल मीडिया यानी आपके हाथ में एक स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन की सुविधा. वॉट्सएप, फेसबुक जैसे किसी भी तरह के सामाजिक मीडिया मंच पर मिर्च मसाला लगाकर कुछ सूचनाओं को परोसा जाता है और कई बार झूठी, अनर्गल और मनगढ़ंत बातों को इस तरह प्रस्तुत कर दिया जाता है कि वो एक नज़र में सही लगती हैं और लोग जाने अनजाने उन बातों का प्रचार-प्रसार करने लगते हैं. सोशल मीडिया पर अफवाह फैलने संबंधी कई अध्ययन हो चुके हैं, उनमें से कुछ का ज़िक्र यहां करते हैं.

अफवाहों का गणित समझाता है DK मॉडल
सोशल नेटवर्क पर अफवाहें फैलने के बारे में डैली और केंडैल के अध्ययन को डीके मॉडल कहा जाता है. इसमें सोशल मीडिया पर एक्टिव लोगों को तीन श्रेणियों में बताया गया है. 1. जो अफवाह को लेकर उदासीन रहते हैं यानी आई. 2. जो अफवा​हें फैलाते हैं यानी एस. 3. जो अफवाहें पहचानकर इन्हें फैलाने में रुचि नहीं लेते यानी आर. अब किसका किससे संपर्क होता है, अफवाह फैलने के नतीजे उस पर निर्भर होते हैं.

मान लीजिए कि एक एस एक आई को अफवाह का संदेश भेजता है तो आई भी एस में कन्वर्ट होकर अफवाह फैलाने में मदद कर सकता है. बाकी दोनों जोड़ियों के केस में आपसी बातचीत के बाद एस भी आर श्रेणी में हो सकता है यानी यहां अफवाह फैलने पर विराम लग सकता है.


दूसरा मानक मॉडल है MK
अफवाह फैलने के बारे में गणितीय ढंग से समझाने वाला एमके यानी माकी-थॉम्प्सन मॉडल है. जब स्प्रेडर यानी एस बाकी लोगों के साथ संपर्क करता है तभी अफवाह फैलने की शुरूआत होती है. यह संपर्क तीन तरह से हो सकता है. 1. एस जब आई से संपर्क करेगा तो आई भी एस हो जाएगा यानी अफवाह फैलाएगा. 2. जब दो एस आपस में संपर्क करेंगे तो उनमें से एक आर हो जाएगा यानी एक स्रोत से अफवाह रुकेगी. 3. जब एस किसी आर से संपर्क करेगा तो एस को भी अफवाह में रुचि नहीं रहेगी और अफवाह का संक्रमण रुकेगा.

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फिर लॉकडाउन संबंधी अफवाहों के चलते बाज़ारों में भीड़ टूट पड़ी. फाइल फोटो.


लोग क्यों फैलाते हैं अफवाहें?
गॉर्डन ऑलपोर्ट और लिओ पोस्टमैन की किताब साइकोलॉजी ऑफ रूमर्स के हिसाब से किसी व्यक्ति के अफवाह फैलान के पीछे पांच मुख्य कारण हो सकते हैं : जब स्थितियों को लेकर अनिश्चितता का माहौल हो तब कोई शक के आधार पर अफवाह फैला सकता है; जब मानसिक तनाव या चिंता की स्थिति हो; जब कोई व्यक्ति किसी सूचना को बेहद ज़रूरी समझे; जब कोई किसी सूचना पर पूरी तरह भरोसा करे; जब किसी सूचना के प्रसार की बात किसी की इमेज या सोशल स्टेटस से जुड़ी हो.

बहरहाल, संकट की स्थितियों में मानवीयता यह है कि अफवाहें फैलाने से बचा जाए क्योंकि एक अफवाह कइयों के लिए दोहरा संकट तक बन जाती है. जैसे लॉकडाउन बढ़ने की तारीखों को लेकर फिलहाल जो अफवाहें बनी हुई हैं, उनके चलते कई लोग फिर अपने घरों के लिए सफर पर निकल पड़े हैं ताकि पिछली बार की तरह परदेश में फंसकर न रह जाएं.

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