अपना शहर चुनें

States

बिहार चुनाव 2020: 20 साल पुरानी LJP ऐसे बदलती रही रिश्तों का गणित

बिहार चुनाव 2020 में लोजपा का बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट कैंपेन चर्चा में रहा.
बिहार चुनाव 2020 में लोजपा का बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट कैंपेन चर्चा में रहा.

Bihar Assembly Elelction 2020: कभी किसी सरकार (Government) में रहना तो कभी किसी, इस तरह की चर्चा में रही लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janashakti Party) फिर वही राजनीति करने जा रही है, जो 15 साल पहले उसे महंगी पड़ी थी. जानिए रोचक तथ्य.

  • News18India
  • Last Updated: October 5, 2020, 4:55 PM IST
  • Share this:
बिहार का विधानसभा चुनाव (Bihar Election) बेहद दिलचस्प ​मोड़ पर पहुंच गया है. लोक जनशक्ति पार्टी ने अपने कुछ पत्ते खोलते हुए यह साफ कर दिया है कि वह मौजूदा गठबंधन यानी एनडीए (NDA) के घटक के रूप में चुनाव नहीं लड़ेगी. राज्य के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से शिकायत जताते हुए लोजपा (LJP) ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) से अलग होकर चुनाव लड़ने की बात तो कही है लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) का साथ न छोड़ने की भी. यानी बिहार में एनडीए के समीकरण बदल रहे हैं और घटक दल आपस में भिड़ने वाले हैं.

चिराग पासवान के नेतृत्व में लोजपा 143 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. 243 विधानसभा सीटों वाले बिहार में लोजपा के कारण भाजपा का सिरदर्द बढ़ना तय है. सीट समझौता न हो पाने के चलते 'वैचारिक मतभेद' का कारण बताते हुए लोजपा ने जदयू के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान करते हुए दावा किया कि बिहार में अगली सरकार भाजपा और लोजपा मिलकर बनाएंगे. इस दावे का सच तो खैर सामने आएगा ही, लेकिन बिहार चुनाव में जो पार्टी चर्चा के केंद्र में आ गई है, उसके बारे में आप कितना जानते हैं?

ये भी पढ़ें :- तमिलनाडु में क्यों हर बार छिड़ जाती है हिंदी को लेकर महाभारत?




Lok Janshakti Party bihar, Lok Janshakti Party logo, Lok Janshakti Party join, LJP bihar, लोक जनशक्ति पार्टी बिहार, लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष, लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद, लोजपा बिहार
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए के भीतर उठापटक का दौर.


20 साल पहले क्यों बनी थी पार्टी?
जनता पार्टी के साथ शुरूआती राजनीति करने वाले रामविलास पासवान जनता दल के साथ रहे थे, लेकिन साल 2000 में मतभेदों के चलते पासवान ने जनता दल से अलग होकर लोक जनशक्ति पार्टी बनाई थी. बिहार में इस पार्टी की पकड़ निचली जातियों और दलित समुदाय में मानी जाती है. बहुत कम लोगों को साथ लेकर पासवान ने यह पार्टी बनाई थी और इसका मकसद राज्य के निचले तबके को जोड़ना था.

ये भी पढ़ें :- बॉलीवुड और मोदी फैन रहे चिराग ने कैसे अपनी पार्टी को बनाया आत्मनिर्भर?

पार्टी के गठन के बाद पासवान की इस पार्टी ने कांग्रेस और लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल के साथ गठबंधन में रहकर बिहार में अच्छा प्रदर्शन किया. 2004 के लोकसभा चुनाव में इस गठबंधन में रहते हुए लोजपा ने चार सीटें तो विधानसभा चुनाव में 29 सीटें जीती थीं. रामचंद्र पासवान, कैप्टन जयनाराण प्रसाद निषाद और रमेश जिगजिनागी पार्टी के प्रमुख नेता रहे.

बदलते रहे गठबंधन
साल 2009 के आम चुनाव में लोजपा 'चौथे मोर्चे' यानी फोर्थ फ्रंट में शामिल हुई थी. इसमें राजद के अलावा समाजवादी पार्टी उसके साथ थी. इस गठबंधन से लोजपा को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी. इस चुनाव के बाद लालू ने खुलकर कहा था कि कांग्रेस के यूपीए से निकलना गलती थी और उन्होंने फिर अपना समर्थन मनमोहन सरकार को दिया था. साथ ही, पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के बेटे ने मार्च 2009 में जन मोर्चा को लोजपा में विलय कर दिया था.

ये भी पढ़ें :-

आर्मेनिया-अज़रबैजान विवाद में भारत की भूमिका क्यों कश्मीर मुद्दे पर डालेगी असर?

Explained: भारत की K मिसाइल फैमिली क्या है और कितनी अहम है?

झारखंड की पूरी इकाई के कांग्रेस के साथ चले जाने पर लोजपा ने पूरी इकाई को निष्कासित कर दिया था. लोजपा ने 2010 का विधानसभा चुनाव फिर राजद के साथ मिलकर लड़ा. पार्टी को सिर्फ 3 सीटें हाथ लगीं. एक बड़ी खबर ये रही कि इन तीन में से 2 विधायकों ने बाद में जेडीयू जॉइन कर ली तो विधानसभा में गूंजा कि लोजपा का जेडीयू में विलय हो गया, लेकिन पार्टी ने इससे इनकार किया.

साल 2014 के आम चुनाव के समय लोजपा ने 12 साल बाद फिर एनडीए के साथ पुनर्मिलन की घोषणा की. इस गठबंधन में आकर 7 सीटों पर चुनाव लड़कर लोजपा ने 6 सीटें जीतीं. 2014 की एनडीए सरकार में पासवान को मंत्री पद भी मिला. एनडीए के ही दल के रूप में 2015 का बिहार विधानसभा चुनाव भी लोजपा ने 20 सीटों पर लड़ा और सिर्फ 2 सीटों पर जीत मिली, यानी पिछली बार से भी एक कम.

Lok Janshakti Party bihar, Lok Janshakti Party logo, Lok Janshakti Party join, LJP bihar, लोक जनशक्ति पार्टी बिहार, लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष, लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद, लोजपा बिहार
बिहार चुनाव 2020 के हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए न्यूज़18 ​के साथ.


क्या 15 साल पुराना फॉर्मूला इस बार चलेगा?
साल 2005 में विधानसभा चुनाव के वक्त लोजपा ने कांग्रेसनीत गठबंधन यूपीए में अंदरूनी बगावत की थी. यानी कांग्रेस के साथ रहते हुए यूपीए के सहयोगी आरजेडी के खिलाफ चुनाव लड़ा था और तब 29 सीटों पर जीत हासिल की थी. हालांकि उस वक्त किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था और लोजपा ने किसी को समर्थन नहीं दिया था. राष्ट्रपति शासन की स्थिति बनी और दोबारा हुए चुनाव में लोजपा को सिर्फ 10 सीटें हाथ लगी थीं और बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बनी थी.

इस बार भी यही स्थिति है कि लोजपा जेडीयू के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है, लेकिन भाजपा के नेतृत्व को कबूल किया है. इस बार देखना दिलचस्प होगा कि यह फॉर्मूला क्या रंग लाता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज