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गांधीजी के उस 'गोल चश्मे' की लंबी कहानी, जो दुनिया में बना ट्रेंड

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: September 29, 2019, 6:14 AM IST
गांधीजी के उस 'गोल चश्मे' की लंबी कहानी, जो दुनिया में बना ट्रेंड
युवा और वृद्ध गांधीजी के चित्रों में चश्मे के फर्क को जानें.

#GANDHI@150 : गांधी के विचारों और आदर्शों (Gandhian Philosophy) को अपनाने वाले दुनिया में कम नहीं रहे लेकिन क्या आप जानते हैं कि गांधी के एक स्टाइल (Gandhian Style) को दुनिया ने कितने प्यार से अपनाया?

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  • Last Updated: September 29, 2019, 6:14 AM IST
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एक ऐनक (Eye-Glass) बनाकर महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की छवि बनाने वाले पुराने स्केच की याद अगर आपके ज़हन में नहीं है तो आप स्वच्छ भारत अभियान (Clean India Mission) का लोगो देख सकते हैं, जिसमें गांधीजी के चश्मे का इस्तेमाल किया गया है. गांधीजी का चश्मे को सिर्फ एक डिज़ाइन (Specs Design) समझने वालों के लिए ये जानना ज़रूरी है कि इस चश्मे को चिंतन, दूरदृष्टि और गांधी के परोपकार भाव का प्रतीक तक माना गया है. इस चश्मे की एक पूरी कहानी है, जो न सिर्फ दिलचस्प है बल्कि गांधी के चिंतन (Gandhian Thoughts) और जीवन के कई पहलू समेटे हुए है.

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'इस चश्मे ने मुझे आज़ाद भारत (Free India) का नज़रिया दिया.' यह कहते हुए गांधीजी ने अपना आइकॉनिक चश्मा (Iconic Spectacle) 1930 के दशक में कर्नल एचएस श्रीदीवान नवाब को सौंपा था. टेलिग्राफ की रिपोर्ट की मानें तो कर्नल ने गांधीजी से ऐसी कोई चीज़ मांगी थी, जो उन्हें हमेशा प्रेरणा (Inspiration) दे सके. गांधीजी ने कब और कैसे बनवाया था अपना चश्मा? कब तक साथ रहा और कैसे ये चश्मा उनका ऐसा स्टाइल बनता चला गया जिसे दुनिया की कई जानी मानी हस्तियों (Famous Personalities) ने अपनाया?

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कब खरीदा था गांधीजी ने चश्मा?
गोल लेंस वाला आइकॉनिक चश्मा गांधीजी ने पहली बार 1890 के दशक में तब खरीदा था जब वह लंदन में कानून की पढ़ाई कर रहे थे. डेलीमेल की एक रपट की मानें तो इस चश्मे की नीलामी बड़ी कीमत पर हुई थी. इस चश्मे के साथ डेलीमेल ने उसके कवर का चित्र भी छापा, जिसमें ग्लॉसेस्टर के एक चश्मा विक्रेता की छाप दिखती है. हालांकि इस बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है कि गांधीजी ने गोल लेंस का पतले फ्रेम वाला ये चश्मा क्यों चुना था लेकिन सादगी और उस वक्त के प्रचलन को इसका कारण बताया जाता है.

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गांधीजी ने क्या हमेशा वही चश्मा पहना?
लंदन में खरीदा चश्मा कब तक उनके साथ रहा? इसकी कोई ठीक जानकारी नहीं है लेकिन कहा जाता है कि कर्नल नवाब को उन्होंने जो चश्मा भेंट किया था, वह हूबहू वैसा ही था इसलिए हो सकता है कि वो वही चश्मा रहा हो. हालांकि इससे पहले ही गांधीजी स्वदेशी आंदोलन से जुड़ चुके थे और विदेशी चीज़ों के त्याग को लेकर आंदोलन में भागीदार रहे थे. बहरहाल, इसके बाद उन्होंने और चश्मे तो भारत में बनवाए लेकिन डिज़ाइन वही रखा.

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गांधीजी की सहयोगी रहीं राजकुमारी अमृत कौर के 1940 के दशक के एक पत्र के हवाले से टीओआई की एक रिपोर्ट में उल्लेख था कि सेवाग्राम से बंबई स्थित एक चश्मा कंपनी को पत्र में लिखा था 'महात्मा जी नया चश्मा पहन रहे हैं और उन्होंने कहा है कि अब तक तो ठीक लग रहा है अगर ​कोई दिक्कत आई तो बताएंगे'.

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गांधीजी के चश्मे और कवर का जो चित्र डेलीमेल ने छापा था, उसमें ग्लॉसेस्टर के विक्रेता की पता था.


चश्मा बन गया बड़ा प्रतीक!
साउथ अफ्रीका के दिनों में और वहां से भारत वापसी के बाद भी कुछ समय तक गांधीजी को नियमित रूप से चश्मा लगाते नहीं देखा गया था. 1920 के दशक से उनकी जो तस्वीरें मिलती हैं, उनमें ज़्यादातर वह इस चश्मे के साथ दिखाई देते हैं. उनके आंदालनों और विचारों की लोकप्रियता के साथ साथ उनका चश्मा उनके चिंतन, बौद्धिकता और सहिष्णुता तक का प्रतीक समझा जाने लगा. कई लेखों और कलाकृतियों में इस चश्मे का उनके नज़रिए के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा.

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कितना बड़ा ट्रेंड है गांधी चश्मा?
चश्मों के विक्रेता एक पोर्टल ने 2018 की रिपोर्ट में गांधी स्टाइल चश्मों के डिज़ाइनों और ट्रेंड को लेकर एक रपट में बताया था कि दुनिया के प्रतिष्ठित चश्मा निर्माता गांधी स्टाइल के यानी गोल लेंस वाले धातु के पतले फ्रेम के चश्मे बनाने में अब तक दिलचस्पी लेते हैं. इसके अलावा इसे विंटेज स्टाइल का भी नाम मिल चुका है. वहीं हैरी पॉटर, वेल्मा जैसे कुछ और काल्पनिक किरदारों को भी गांधी स्टाइल चश्मे में देखा जा चुका है.

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गांधी स्टाइल के चश्मे को अपनाने वालों में जॉन लेनन और स्टीव जॉब्स का नाम प्रमुख रूप से यादगार रहा है.


चश्मे के ज़रिए हस्तियों ने अपनाया गांधीवाद
बीटल्स के मशहूर कलाकार और गायक रहे जॉन लेनन गांधीवाद से प्रभावित थे और उन्होंने सत्याग्रह व अहिंसक आंदोलनों में भी हिस्सा लिया. जॉन लेनन ने लंबे समय तक गांधी स्टाइल का चश्मा अपनाए रखा और यह गांधी से प्रेरित होने के कारण ही था. वर्तमान समय के मशहूर उद्यमियों में शुमार दिवंगत स्टीव जॉब्स ने भी गांधी स्टाइल चश्मे को अपनाया था और यहां तक कहा था कि गांधी उनके हीरो और आदर्श थे और वह उनके सिद्धांतों में अटूट विश्वास रखते थे.

और चश्मे का एक अनोखा प्रयोग
गांधीजी के चश्मे की कहानी आने वाले समय तक भी चलती रहेगी, यह दावा इसलिए किया जा सकता है क्योंकि तकनीक के क्षेत्र में उनके सिद्धांतों के साथ ही उनके प्रतीकों का सहारा लिया जा रहा है. करीब नौ साल पहले लियो बर्नेट इंडिया कंपनी ने देवनागरी के लिए गांधीजी फॉण्ट्स का विकास किया था जिसे अब कंपनी फेसबुक के ज़रिए बढ़ावा भी देने में जुटी है. इन फॉण्ट्स की विशेषता ये है कि इसके अक्षरों की आकृतियां गांधीजी के चश्मे के गोल लेंस से प्रेरित हैं.

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गांधीजी फॉण्ट्स की विशेषता ये है कि इसके अक्षरों की आकृतियां गांधीजी के चश्मे के गोल लेंस से प्रेरित हैं.


अलकिस्सा बात ये है कि एक चश्मा दुनिया के लिए एक नज़रिया इसलिए बन चुका है क्योंकि उसके पीछे वो नज़र थी, जिसने समझा था: 'आंख के बदले आंख का कायदा पूरी दुनिया को अंधा बना देगा.'

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First published: September 29, 2019, 6:14 AM IST
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