हिटलर ने 80 साल पहले आज ही जारी किया था लाखों लोगों की हत्या का फरमान

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: September 1, 2019, 3:06 PM IST
हिटलर ने 80 साल पहले आज ही जारी किया था लाखों लोगों की हत्या का फरमान
जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर. फाइल फोटो.

जर्मनी के तानाशाह (German Dictator) एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) ने दूसरे विश्व युद्ध (Second World War) के शुरुआती समय में नरसंहार के एक आदेश पर हस्ताक्षर कर बर्बरता के जिस युग का आगाज़ किया था, उसकी कहानी पढ़ें.

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जब जर्मनी की सत्ता हिटलर (Hitler Rule) के हाथ में आई, तो उसने 'नए जर्मनी' में विकलांगों (Handicapped) और विरोधियों को बाधा माना और हर बाधा को खत्म कर देने का रास्ता चुना. बजाय कमज़ोर को ताकतवर बनाकर उसे मुख्यधारा में लाने के, उसके अस्तित्व को खत्म कर देने की हिटलर की ज़िद एक तरफ जर्मनी में हत्याओं (Mass Murders) का इतिहास लिखती चली गई और दूसरी तरफ, हिटलर को हिटलर बनाती चली गई. इसी हिटलरशाही या नाज़ीवाद (Nazism) की शुरुआत का ​मिशन था 'यूथेनेशिया प्रोग्राम', जिसे 1 सितंबर 1939 के एक आदेश के बाद एक कोडवर्ड के साथ वहशियाना गति मिली.

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साल 1939 में गर्मियों के मौसम में हिटलर की मंशा के चलते कई रणनीतिकारों ने देश के अपंग बच्चों को मिटाने के बारे में योजनाएं बनाईं. 18 अगस्त को एक आदेश (Secret Letter) जारी हुआ जिसके अनुसार सभी नर्सों, डॉक्टरों को ये हिदायत दी गई कि वो तीन साल से कम उम्र के उन सभी बच्चों की जानकारी दें, जो मानसिक या शारीरिक अपंगता (Mental & Physical Disability) के शिकार थे. ऐसे बच्चों को छांटकर कुछ विशेष अस्पतालों में भेजे जाने के आदेश दिए गए. लोगों को लगा था कि इन विशेष अस्पतालों में बेहतर इलाज होगा, लेकिन असल में ये उन बच्चों के कत्लखाने (Deadly Clinics) थे.

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नरसंहार का प्रोग्राम था यूथेनेशिया
नाज़ी जर्मनी में भीषण नरसंहार का पहला कार्यक्रम था यूथेनेशिया. यूथेनेशिया शब्द अस्ल में, इच्छा मृत्यु के लिए इस्तेमाल होता रहा. यदि कोई व्यक्ति बेहद तकलीफ के साथ मौत की तरफ बढ़ रहा हो तो उसे तकलीफ के बगैर मौत दिए जाने की व्यवस्था को इच्छा मृत्यु कहा जाता रहा लेकिन इस शब्द को गलत अर्थों में मानवता के खिलाफ इस्तेमाल करने की रणनीति बनाकर हिटलरशाही ने सिर्फ तीन साल तक के नहीं बल्कि 17 साल तक के करीब 5 हज़ार विकलांग अवयस्कों को पहले मौत के घाट उतरवाया. गौरतलब है कि गैर यहूदी बच्चों के लिए विकलांग होने के मापदंड तक बदल दिए गए थे.

टी4 था हत्याओं का फरमान
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हिटलर ने 1 सितंबर 1939 को एक गुप्त पत्र पर दस्तखत कर 'यूथेनेशिया' प्रोग्राम को अवयस्कों ही नहीं बल्कि पूरी आबादी पर लागू किया और हत्याओं को अंजाम देने वाले डॉक्टरों, प्रशासकों व मेडिकल स्टाफ को पूरी सुरक्षा दिए जाने के आदेश भी दिए. इस कार्यक्रम के बारे में हर तरह के समन्वय का दफ्तर बर्लिन स्थित टियरगारर्टेन्सट्रास 4 नामक सड़क या इलाके में था इसलिए इस प्रोग्राम को टी4 कोडवर्ड दिया गया. हत्याओं को अंजाम देने के लिए इस आदेश के बाद छह स्थानों पर गैस चेंबर बनवाए गए.

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हिटलर का निजी फिज़िशियन रहा कार्ल ब्रैंड्ट और एनसाएक्लोपीडिया के पोर्टल पर 1 सितंबर 1939 को हिटलर द्वारा जारी पत्र की तस्वीर.


बर्लिन में हैवल नदी के पास ब्रैंडेनबर्ग, दक्षिण पश्चिम जर्मनी में ग्रैफनेक, सैक्सनी में बर्नबर्ग व सॉनेस्टीन, ऑस्ट्रिया स्थि​त हार्थेम और हेज़ेन के हैडेमर स्थानों पर कत्लखाने यानी गैस चेंबर्स बनवाए गए थे. टी4 के अपने आंकड़ों के हिसाब से इस कार्यक्रम के तहत अगले दो सालों के भीतर 70 हज़ार से ज़्यादा लोग मौत के घाट उतारे गए.

प्रोग्राम का दूसरा चरण और भयानक था
1941 में हिटलर ने 'यूथेनेशिया' कार्यक्रम को रोकने का आदेश दिया था, लेकिन इसका मतलब सिर्फ कुछ समय के लिए रुकने से था. 1942 में इस कार्यक्रम का दूसरा चरण और ज़्यादा सुनियोजित ढंग से शुरू हुआ और इस बार तमाम विरोधियों, यहूदियों और युद्ध व राजनीतिक बंदियों को कत्ल किया गया. ये कार्यक्रम ​दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने तक जारी रहा और इतिहासकारों का मानना है कि इस टी4 के तहत ढाई लाख लोगों को मार डाला गया.

ये लोग थे कत्लों के रणनीतिकार
हिटलरशाही में 1939 में इस तरह के नरसंहार की योजना बनाने और उसे अंजाम देने के लिए एक टीम बनाई गई थी जिसमें हिटलर की प्राइवेट चांसलरी का निदेशक फिलिप बॉहलर और हिटलर का निजी फिज़िशियन कार्ल ब्रैंड्ट की प्रमुख भूमिका थी. इसी नाज़ी फिज़िशियन बैंड्ट को योजना बनने के बाद यूथेनेशिया प्रोग्राम का डायरेक्टर बनाया गया था. इसके अलावा हिस्ट्री चैनल की मानें तो यूथेनेशिया विभाग का प्रमुख डॉ विक्टर ब्रैक भी मुख्य भूमिका में था जिसने टी4 की योजना का निरीक्षण किया था.

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First published: September 1, 2019, 2:52 PM IST
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