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जानिए कौन है वो मौलाना जिसने इमरान खान की नाक में दम कर रखा है

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Updated: November 2, 2019, 8:46 AM IST
जानिए कौन है वो मौलाना जिसने इमरान खान की नाक में दम कर रखा है
पाकिस्तान की कथित सबसे बड़ी धार्मिक पार्टी के मुखिया एक मौलाना ने पाकिस्तान में तख्तापलट के लिए मुहिम छेड़ दी है

पाकिस्तान (Pakistan) में तख्तापलट के लिए हज़ारों लोग 'आज़ादी मार्च' (Azadi March) कर रहे हैं. जानें किस मौलाना की अगुआई में सियासी खेल खेला जा रहा है.

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  • Last Updated: November 2, 2019, 8:46 AM IST
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पाकिस्तान की मौजूदा इमरान खान (Imran Khan) सरकार (Pakistan Government) पर एक के बाद एक नया संकट गहराता जा रहा है. अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और विकास के मुद्दों पर संकटों में घिर चुकी इमरान सरकार के सिर पर ताज़ा संकट है विपक्षियों के विरोध का. पाकिस्तान की कथित सबसे बड़ी धार्मिक पार्टी (Religious Party) के मुखिया एक मौलाना ने पाकिस्तान में तख्तापलट के लिए मुहिम छेड़ दी है और खबरों की मानें तो करीब 1 लाख समर्थकों के साथ आज़ादी मार्च (Protest) किया जा रहा है. आपको जानना चाहिए कि कौन हैं ये मौलाना फज़ल-उर-रहमान (Maulana Fazal-ur-Rehman) और कैसे ये पहले भी और नेताओं के लिए सिरदर्द रहे हैं.

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तालिबानी समर्थक रहे रहमान
धार्मिक पार्टी और सुन्नी कट्टरपंथी दल जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के चीफ मौलाना फज़ल-उर-रहमान के पिता खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) के सीएम रहे थे. मौलाना रहमान पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) रह चुके हैं. पाकिस्तान की संसद में विदेश नीति पर स्टैंडिंग कमेटी और कश्मीर कमेटी (Kashmir Committee) के मुखिया रह चुके रहमान को तालिबान समर्थक माना जाता है लेकिन कुछ समय से मौलाना रहमान खुद के उदारवादी होने का दावा कर रहे हैं.

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मौलाना रहमान को रसूखदार नेता माना जाता है क्योंकि सत्ता में न रहते हुए भी मौलाना को नवाज़ शरीफ सरकार ने केंद्रीय मंत्री का दर्जा दिया था. इसके अलावा, मौलाना पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की ओर से उम्मीदवार भी थे.

बेनज़ीर के खिलाफ धार्मिक कट्टरता की राजनीति
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पिछले करीब तीन दशकों से मौलाना का धार्मिक कार्ड सबसे मज़बूत माना जाता रहा है. कभी तालिबान के खिलाफ अमेरिकी अभियान को इस्लाम विरोधी बताकर जेहाद का ऐलान तक कर चुके थे. बेनज़ीर भुट्टो के प्रधानमंत्री बनने के समय 1988 में मौलाना ने साफ तौर पर कह दिया था कि एक औरत की हुक्मरानी कबूल नहीं है. हालांकि बाद में मौलाना ने ये विरोध वापस ले लिया था.

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बेनज़ीर भुट्टो और परवेज़ मुशर्रफ के समय भी मौलाना रहमान सत्ता परिवर्तन की कोशिशों के लिए चर्चित रहे थे.


मुशर्रफ के खिलाफ सीक्रेट प्लान
मुशर्रफ के सत्ता में रहने के दौरान भी मौलाना रहमान इसलिए चर्चा में ​थे क्योंकि 9/11 के हमले के बाद पाकिस्तान ने तालिबान के खिलाफ अमेरिकी मुहिम का साथ दिया था और मौलाना ने मुशर्रफ की मुखालफत की थी. खबरों की मानें तो बाद में अमेरिकी केबल्स लीक से खुलासा हुआ था कि 2007 में मुशर्रफ की सत्ता को उखाड़ फेंकने के प्लान के तहत मौलाना ने अमेरिकी राजदूत के साथ सीक्रेट डिनर पर सांठ गांठ की थी.

क्यों कहा जाता है मौलाना डीज़ल?
मौलाना फज़ल-उर-रहमान पर आरोप लगते रहे हैं कि 90 के दशक में सरकार पर दबाव बनाकर डीज़ल के गैरकानूनी परमिट लिए थे. इसी वजह से उन्हें डीज़ल घोटाले से जोड़कर मौलाना डीज़ल कहा जाता है. यही नहीं पाकिस्तान के एक न्यूज़ चैनल एआरवाय के एक शो में मौलाना रहमान पर अपने करीबियों के नाम से आर्मी के साथ ज़मीनों के सौदे किए जाने के आरोप भी लगे थे.

इसके अलावा, मौलाना डीज़ल पर भ्रष्टाचार और भड़काऊ व अपमानजनक बयानबाज़ी के तमाम आरोप लगते रहे हैं. भ्रष्टाचार के आरोपों का आलम ये था कि पिछले साल चुनाव में इमरान खान की पार्टी ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने वाली सरकार बनाने के चुनावी वादे किए थे, जिसके चलते मौलाना को अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में बुरी हार का सामना करना पड़ा था.

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डीज़ल घोटाले में भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण मौलाना रहमान को मौलाना डीज़ल भी कहा जाता है.


अब क्या है मौलाना की रणनीति?
मौलाना रहमान ने पूर्व पीएम नवाज़ शरीफ और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी की पार्टी के समर्थन का दावा करते हुए साफ कहा ​है कि इमरान खान सरकार को गिराने तक वह चुप नहीं बैठेंगे और इसके लिए युद्ध स्तर पर रणनीति तैयार करते हुए बड़े विरोध प्रदर्शन लाहौर से इस्लामाबाद तक पहुंच गए हैं.

मौलाना का आरोप है कि इमरान खान पिछले चुनाव में धांधली से जीते और सेना के इशारे पर पीएम बना दिए गए. वहीं, द वीक की एक रिपोर्ट की मानें तो सेना की एक ब्रिगेड तख़्तापलट करने के लिए मौलाना का इस्तेमाल कर रही है क्योंकि वाम, दक्षिण और तकरीबन सभी धड़ों को साधने में माहिर मौलाना का राजनीतिक अनुभव और महत्वाकांक्षा किसी से छुपी नहीं है.

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First published: November 2, 2019, 8:46 AM IST
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