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कौन हैं वो 3 लोग जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने दी शाहीन बाग प्रदर्शनकारियों को मनाने की जिम्मेदारी

News18Hindi
Updated: February 17, 2020, 9:12 PM IST
कौन हैं वो 3 लोग जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने दी शाहीन बाग प्रदर्शनकारियों को मनाने की जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े के साथ वकील साधना रामचंद्रन को वार्ताकार के तौर पर नियुक्त किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े के साथ वकील साधना रामचंद्रन को वार्ताकार के तौर पर नियुक्त किया है. इसके साथ ही वजहत हबीबुल्लाह, चंद्रशेखर आजाद इस दौरान वार्ताकारों की मदद करेंगे.

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  • Last Updated: February 17, 2020, 9:12 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में शाहीन बाग (Shaheen Bagh) में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने की याचिकाओं पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने कहा कि आपको विरोध करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए आप सड़क जाम नहीं कर सकते. अदालत ने इस मामले में सीनियर वकील संजय हेगड़े को प्रदर्शनकारियों को मनाने की जिम्मेदारी दी है. साथ ही दिल्ली पुलिस कमिश्नर को इस मामले में हलफनामा दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले की 24 फरवरी को सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े के साथ वकील साधना रामचंद्रन को वार्ताकार के तौर पर नियुक्त किया है. इसके साथ ही वजाहत हबीबुल्लाह इस दौरान वार्ताकारों की मदद करेंगे.

कौन हैं संजय संजय हेगड़े
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े हाल में सोशल मीडिया साइट ट्विटर के साथ अपनी भिड़ंत को लेकर मीडिया की सुर्खियों में आए थे. बीते साल ट्विटर ने दो बार संजय हेगड़े का अकाउंट सस्पेंड किया था जिसे लेकर काफी हो हल्ला मचा था. इसे लेकर संजय हेगड़े ने ट्विटर पर लीगल केस दायर किया था. संजय हेगड़े ने अपनी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए ट्विटर से सार्वजनिक माफी की मांग की थी. संजय हेगड़े ने एलएलबी की की पढ़ाई 1989 में बॉम्बे विश्वविद्यालय से की. इसके बाद अपनी वकालत की प्रैक्टिस की शुरुआत कर दी थी. साथ ही उन्होंने 1991 में इसी यूनिवर्सिटी से LLM की पढ़ाई भी पूरी की थी.

संजय हेगड़े




साधना रामचंद्रन


साधना रामचंद्रन सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकील हैं. माना जा रहा है कि उन्हें शामिल करने पीछे शाहीन बाग के आंदोलन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी है. साधना रामचंद्रन पहले भी न्यायिक मध्यस्थता से जुड़ी रही हैं.

वजाहत हबीबुल्लाह भी टीम में शामिल
सुप्रीम कोर्ट ने इस टीम में वजाहत हबीबुल्लाह को भी शामिल किया है. वो भारत के पहले मुख्य सूचना आयुक्त रह चुके हैं. वजाहत हबीबुल्ला राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष भी रहे हैं. हबीबुल्लाह 1968 से अगस्त 2005 में अपनी सेवानिवृति तक भारतीय प्रशासनिक सेवा से अधिकारी रह चुके हैं.

अभिव्यक्ति की एक सीमा है: सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने दूसरे पक्ष को सुनने के दौरान कहा कि हम ये नहीं कर रहे हैं कि प्रदर्शन नहीं किया जा सकता. सवाल ये है कि प्रदर्शन कहां होना चाहिए. हर कोई सड़क पर उतर जाएगा तो क्या होगा? कोर्ट ने कहा, 'लोकतंत्र लोगों की अभिव्यक्ति से ही चलता है, लेकिन इसकी एक सीमा है. अगर सभी सड़क बंद करने लगे तो परेशानी खड़ी हो जाएगी. आप दिल्ली को जानते हैं, लेकिन दिल्ली के ट्रैफिक को नहीं. ट्रैफिक नहीं बंद होना चाहिए. आपको विरोध का अधिकार है, लेकिन सड़क जाम करने का नहीं.' अदालत ने कहा, 'अगर हर कोई पब्लिक रोड को ब्लॉक करने लगे भले ही कारण कोई भी हो, तो क्या होगा? हमारी चिंता इस बात पर है कि प्रदर्शन सड़क पर किया जा रहा है. हमारा मानना है कि इस केस या दूसरे केस में सड़क को ब्लॉक नहीं किया जा सकता.'

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First published: February 17, 2020, 4:05 PM IST
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