Explained: क्या है असम-मिज़ोरम सीमा विवाद, जिसके कारण फिर भड़की हिंसा

उत्तर पूर्वी राज्यों की सीमाएं.
उत्तर पूर्वी राज्यों की सीमाएं.

Mizoram-Assam Border Tension: दोनों मुख्यमंत्रियों ने ताज़ा तनाव को शांत करने की कोशिश की, जिसमें लैलापुर और वैरेंगते गांवों के लोग आपस में भिड़ गए थे. लेकिन यह विवाद बरसों पुराना है, जो बार-बार भड़कता है.

  • News18India
  • Last Updated: October 20, 2020, 8:20 AM IST
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वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन (India-China) के बीच सीमा पर तनाव (Border Tension) बने रहने के बीच भारत के दो उत्तर पूर्वी राज्यों (North East States) असम और मिज़ोरम के बीच सीमा विवाद (Border Dispute) फिर भड़क उठा है. असम के कछार ज़िले और मिज़ोरम के कोलसीब ज़िले के बॉर्डर पर हाल ही जो हिंसक झड़प हुई, उसके बाद दोनों ही राज्यों ने अपने बॉर्डर पर सुरक्षा बल (Security Forces) तैनात कर दिए हैं और अपनी सीमाओं में रह रहे लोगों को सुरक्षा का आश्वासन दिया. आखिर क्या है इन दो राज्यों के बीच सीमा विवाद और क्या यह अचानक सुर्खियों में आ गया है?

1990 के दशक से इस सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कई बार संवाद हुआ, लेकिन कोई निर्णायक नजीजा निकला नहीं. बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन और 1993 के इनर लाइन ऑफ लुशाई हिल्स नोटिफिकेशन के आधार पर असम और मिज़ोरम ने सीमा को लेकर विवाद हल करने की कोशिश की थी. लेकिन यह विवाद कितना पुराना है?

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शुरूआत कैसे हुई थी?
साल 1962 से जब असम से अलग होकर अलग राज्य बनने का सिलसिला शुरू हुआ, तबसे ही केंद्र सरकार ने दूरदर्शिता नहीं दिखाई और इसी वजह से सीमाओं को लेकर विवाद रहे. जनजातीय इलाके अब भी ठीक तरह से सीमांकित नहीं हैं, जिसकी वजह से असंतोष रहता है. ज़ाहिर है कि असम ही इन तमाम विवादों के केंद्र में है क्योंकि आज़ादी के बाद से उसके पड़ोसी राज्य उससे ही अलग होकर बने.

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असम और मिज़ोरम ने अपने बॉर्डर पर सुरक्षा बल तैनात किए हैं.


ये अलग राज्य इसलिए बनाए गए थे ताकि भारतीय संघ की व्यवस्था बन सके और जनजातियों व आदिवासियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके.

विवाद की जड़
असम और मिज़ोरम के बीच 164.6 किलोमीटर लंबी सीमा है. दक्षिण असम के साथ मिज़ोरम करीब 123 किमी की सीमा साझा करता है और मिज़ोरम का दावा है कि उसकी सीमा का करीब 509 वर्गमील के हिस्से पर असम का कब्ज़ा है. 1972 में केंद्रशासित प्रदेश बनने और फिर 1987 में मिज़ोरम राज्य बनने तक असम का जो लुशाई हिल्स ज़िला था, वह मिज़ोरम था. इसके बाद से ही दोनों राज्य एक स्ट्रेच के लिए झगड़ते रहे हैं.

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क्या है बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन?
करीब डेढ़ सौ साल पहले 1873 में BEFR के कारण इनर लाइन परमिट (ILP) व्यवस्था को कानूनी मान्यता मिली थी. अब अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिज़ोरम जैसे राज्यों के केस में यह BEFR लागू होता है. इस रेगुलेशन के चलते इन चार राज्यों में कोई भी प्रवासी भारतीय एंट्री नहीं पा सकता, अगर उसके पास ILP नहीं है. यानी यह रेगुलेशन यहां की मूल आबादी और उसके संसाधनों की सुरक्षा का प्रावधान देता है.

कुल मिलाकर विवाद ऐसा है
फॉरेन विभाग के 1875 के नोटिफिकेशन के कारण असम और मिज़ोरम के बीच वास्तविक बॉर्डर रेखांकित नहीं हो सका. शुरूआत में दोनों राज्य एक बॉर्डर पर सहमत रहे लेकिन जब मिज़ोरम ने यह मुद्दा उठाया कि असम अतिक्रमण कर रहा है तो दोनों राज्यों के बीच तनाव की स्थिति बनी. पहले भी ऐसे हालात बने कि दोनों राज्यों के बीच हथियारबंद जंग की नौबत आई, लेकिन गृह मंत्रालय के बीच बचाव से ऐसा हुआ नहीं.

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1994 से 2007 के बीच दोनों राज्यों के बीच तनाव रहा. मिज़ोरम मौजूदा सीमा को न मानते हुए यही कहता रहा कि BEFR के नोटिफिकेशन के हिसाब से इनर लाइन रिज़र्व फॉरेस्ट को लेकर जो व्यवस्था है, उसे ही बॉर्डर तय करने का आधार बनाया जाना चाहिए.

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बीते हफ्ते असम और मिज़ोरम के सीमावर्ती ग्रामीण आपस में भिड़ गए.


विवाद में कौन कौन उलझा है?
मिज़ोरम सरकार के गृह मंत्रालय, पर्यावरण व वन और राजस्व विभाग समेत असम के सुरक्षा और वन विभाग इस विवाद में प्रमुख सरकारी पार्टी हैं. इनके अलावा, दोनों राज्यों की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां इस मामले में समय समय पर किसी न किसी रूप में इस विवाद से जुड़ती रही हैं. साथ ही, दोनों राज्यों के किसान और भू स्वामियों की संस्थाएं भी इस विवाद में पार्टी हैं क्योंकि उन्हीं की ज़मीन दांव पर लगी है.

क्या यह एक राजनीतिक मुद्दा है?
समय के साथ ऐसा हो गया है. साल 2018 में जब मिज़ोरम में चुनाव होने थे, तब यह मुद्दा उछाला गया था, झड़पें हुई थीं और केंद्र सरकार को बाउंड्री कमीशन बनाकर इस विवाद को सुलझाने की सिफारिश की गई थी. इस बार जो विवाद और झड़पें हुई हैं, उसमें बॉर्डर पर अवैध बांग्लोदशी नागरिकों के रहने और अगले साल असम में होने जा रहे चुनाव के चलते राजनीतिक लाभ उठाए जाने की चर्चाएं हैं.
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