आखिर लोग क्यों कर लेते हैं खुदकुशी?

कैफे कॉफी डे के मालिक वीजी सिद्धार्थ की आत्महत्या के बाद ये सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है कि आखिर वो कौन सी वजहें होती हैं, जिनसे लोग आत्महत्या करने का फैसला कर डालते हैं.

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Updated: August 1, 2019, 10:41 AM IST
आखिर लोग क्यों कर लेते हैं खुदकुशी?
प्रतीकात्मक तस्वीर
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Updated: August 1, 2019, 10:41 AM IST
खुदकुशी या आत्महत्या को हमारे देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई समाजों में ऐसा विषय माना जाता रहा है, जिस पर खुलकर बातचीत नहीं की जाती. लोग अक्सर इस बारे में बात करने से हिचकते हैं. ऐसे में होता यह है कि जो लोग खुदकुशी करने के विचारों या जज़्बात से जूझ रहे होते हैं, वो किसी से बात नहीं कर पाते और खुद को अकेला महसूस करते हुए खुदकुशी के विकल्प को आखिरी हल मान बैठते हैं.

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आत्महत्या के मामलों से जुड़ा एक बड़ा तथ्य यह भी है कि ये रास्ता इख्तियार करने वाले लोगों की बातों या बर्ताव में कुछ लक्षण देखे जाते हैं, जो वास्तव में संकेत होते हैं. लेकिन समाज जिस तरह इस विषय को दरकिनार करता है, ऐसे संकेतों के बारे में भी हम जागरूक नहीं हो पाते. ताज़ा मामले में सीसीडी के मालिक वीजी सिद्धार्थ की खुदकुशी की खबरें चर्चा में हैं. आप भी जानते हैं कि खुदकुशी की खबरें लगातार सुर्खियों में बनी रहती हैं. क्या ये माना जा सकता है कि तनाव, चिंता, हताशा या निराशा जैसे लक्षण इन केसों में देखने को नहीं मिले थे! अगर ये संकेत समझे जाते तो क्या इन्हें बचाया नहीं जा सकता था?

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क्यों हम इस विषय पर बात नहीं करते? आत्महत्या को लेकर लोगों में कई तरह की गलतफहमियां या धारणाएं हैं. कई ऐसी बातें हैं जो वास्तविक नहीं हैं, लेकिन लोगों के मन में बैठी हुई हैं. ऐसी ही सात धारणाएं और उनसे जुड़े तथ्य जानिए.

- खुदकुशी के बारे में चर्चा से इस प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है.
फैक्ट : कई लोग इस तरह का डर पाले बैठे होते हैं, लेकिन इस डर को साबित करने के लिए कोई प्रमाण नहीं है. अगर आपको खुदकुशी करने जैसे विचार आते हैं या आपके किसी करीबी को, जिसे आप ऐसे खयालों से छुटकारा दिलाना चाहते हैं, तो सबसे ज़रूरी यही है कि इस बारे में बातचीत की जाए. अगर इस बारे में खुलकर बात नहीं की जाएगी, तो जो इन खयालों से जूझ रहे हैं, वो खुद को अलग थलग या अकेला महसूस करने लगते हैं और उन्हें किसी तरह की मदद मिलने के रास्ते बंद हो जाते हैं.
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- मानसिक समस्याओं से ग्रस्त ही खुदकुशी के रास्ते पर जाते हैं.
फैक्ट : ये बात ठीक है कि खुदकुशी के खयाल ज़्यादातर तभी आते हैं, जब आप किसी दुख, तनाव, नाउम्मीदी या हताशा से गुज़र रहे होते हैं. लेकिन ये भी सच है कि हर बार खुदकुशी के कारण मानसिक समस्याएं नहीं होतीं. ऐसे कई लोग हैं, जो मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन खुदकुशी नहीं करते और ये भी एक तथ्य है कि जितने लोगों ने खुदकुशी की है, सभी मानसिक समस्याओं से नहीं जूझ रहे थे.

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- खुदकुशी के विचारों से छुटकारा मुमकिन नहीं है.
फैक्ट : खुदकुशी के खयालों का आना या खुदकुशी का खतरा बढ़ना समय के साथ कम या खत्म हो सकता है, अगर परिस्थितियां बदल जाएं तो. खुदकुशी के खयालों से अगर कोई पीड़ित रहा है और हालात बदलने के बाद वह सामान्य हुआ है, तो मुमकिन है कि उसके जीवन में फिर स्थितियां बदलें तो उसे फिर ऐसे खयाल आएं. लेकिन, खुदकुशी के लिए प्रेरित होने वाले खयाल स्थायी नहीं होते, ये हालात पर निर्भर करते हैं और ये भी ज़रूरी नहीं कि इन खयालों के चलते हर हाल में कोई खुदकुशी कर ही ले.

- खुदकुशी के खयालों से जूझने वाला अपना जीवन खत्म करने पर आमादा होता है.
फैक्ट : जितने लोग खुदकुशी की कोशिश करने के बाद बच सके हैं, उनमें से कई ने इस बात को माना कि वो वाकई मरना नहीं चाहते थे, बल्कि अपने कष्टों से छुटकारा चाहते थे. वो एक ऐसी खास परिस्थिति से जूझे थे, जहां जीने और मरने में उन्हें अंतर नहीं समझ आता था. खुदकुशी की एक कोशिश के बाद कुछ ने स्पष्ट तौर पर माना कि वो आगे जीना चाहते हैं और ज़्यादातर ने खुदकुशी की एक कोशिश के बाद कभी दूसरी कोशिश नहीं की. कुल मिलाकर बात ये है कि अगर सही समय पर मदद मिल जाए, तो इस मुश्किल से छुटकारा संभव है.

- खुदकुशी के ज़्यादातर मामलों में कोई संकेत नहीं मिलता.
फैक्ट : जब एक बड़ा अध्ययन किया गया, तो पाया गया कि खुदकुशी करने वाले ज़्यादातर लोगों की बातों या व्यवहार में कुछ हफ्तों पहले से कुछ संकेत साफ दिखे. कुछ मामले ऐसे भी होते हैं, जिनमें खुदकुशी को लेकर कोई विचार नहीं किया जाता, किसी क्षणिक आवेग में जान दे दी जाती है. लेकिन, ऐसे मामलों में भी खुदकुशी से ठीक पहले एक खास किस्म की चिंता, तनाव, हताशा या इस तरह का कोई और लक्षण ज़रूर दिखता है. ज़रूरी ये है कि ऐसे संकेतों को समय रहते समझा जाए और उनका निदान किया जाए.

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- जो लोग खुदकुशी को लेकर चर्चा करते हैं, वो खुदकुशी नहीं करते.
फैक्ट : जो लोग इस बारे में बात करते हैं, संभव है कि वो कोई मदद या हल खोज रहे हों. ज़्यादातर लोग खुदकुशी की अपनी प्रवृत्ति को लेकर बात करने में हिचकते हैं इसलिए वो इस पर किसी चुटकुले या किसी दूसरे के हवाले से इशारों में बात करते हैं. ज़रूरत इस बात की है कि इस विषय के प्रति एक संवेदनशीलता और गंभीरता बरती जाए और मदद की पूरी कोशिश की जाए. खुदकुशी के बारे में सोचने वाले ज़्यादातर लोग तनाव, चिंता या निराशा से गुज़र रहे होते हैं और इस बात से भी मायूस होते हैं कि उन्हें कोई मदद या इलाज नहीं ज़र आ रहा होता.

- खुदकुशी की कोशिश सिवाय एक हंगामे या ध्यान खींचने के कुछ नहीं है.
फैक्ट : खुदकुशी की किसी भी तरह की कोशिश हो, मामूली या गंभीर, उसके प्रति गंभीर होना और सही इलाज के उपाय करना ज़रूरी है क्योंकि ऐसा न करने पर पीड़ित अत्यंत दुख महसूस कर सकता है. ऐसे किसी भी प्रयास को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित की मानसिक हालत या समस्याओं को समझना और उनका निदान करना चाहिए ताकि भविष्य में वह कोई और घातक कदम न उठाए.

सामाजिक दबाव, रिश्‍तों में तनाव, उदासी, डिप्रेशन, वित्तीय संकट और परिवार के तनाव का  उपाय आत्महत्या नहीं है. Hindi.News18.com पर आप ‘डिप्रेशन और आत्महत्या’ से बचाव के लिए हर दिन ‘जीवन संवाद’ पढ़ सकते हैं.

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First published: July 31, 2019, 12:24 PM IST
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