क्या थी नाज़ी पार्टी और नाज़ी कैंप? जिससे की गई कश्मीर की तुलना

क्या थी नाज़ी पार्टी और नाज़ी कैंप? जिससे की गई कश्मीर की तुलना
जर्मन तानाशाह अडोल्फ हिटलर.

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) ने कहा कि कश्मीर की हालत नाज़ी कॉन्सेंट्रेशन कैंप (Nazi Concentration Camp) जैसी हो गई है. नाज़ी पार्टी और उसके बदनाम कैंपों के बारे में आप क्या जानते हैं?

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 8, 2019, 4:51 PM IST
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जम्मू-कश्मीर (jammu and kashmir) के ताज़ा हालात की तुलना हिटलर से नाज़ी कैंप से की जाना कितना सही है? कश्मीर राज्य को स्पेशल स्टेटस देने वाले संविधान के आर्टिकल 370 (Article 370) का लोकसभा में विरोध करते हुए कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Choudhary) ने कश्मीर के हालात की तुलना हिटलर (Hitler) या नाज़ियों के कॉन्सेंट्रेशन कैंप (Nazi Camps) से कर डाली है. ये राजनीतिक बहस चलेगी, लेकिन इस संदर्भ में क्या आप जानते हैं कि विवादों में रही जर्मनी की नाज़ी पार्टी क्या थी? आपके लिए ये जानना ज़रूरी होगा कि नाज़ी कैंप और नाज़ी पार्टी की कहानी या हकीकत क्या थी.

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ऐसे बनी थी नाज़ी पार्टी
पहला विश्वयुद्ध 1919 में खत्म हुआ तो जर्मनी के हाथ हार लगी और इस हार की वजह से जर्मनी में आर्थिक और राजनीतिक हताशा पैदा हुई. ऐसे में हताश तीस साल के अडोल्फ ​हिटलर ने एक राजनीतिक पार्टी बनाई जिसका नाम रखा गया जर्मन वर्कर्स पार्टी. इस पार्टी की स्थापना में हिटलर के साथ कुछ और लोग जैसे एंटन ड्रेक्सलर और पत्रकार कार्ल हैरर भी शामिल हुए. इस पार्टी ने जर्मन राष्ट्रवाद को केंद्र में रखा और ज्यूज़ यानी यहूदियों के खिलाफ नफरत की एक लहर पैदा की.
हिटलर की इस पार्टी ने पहले विश्वयुद्ध की समाप्ति के दौरान फ्रांस के साथ हुई संधि को जर्मनी के साथ अन्याय करार दिया. जर्मन राष्ट्रवाद के नारों, भाषण कला और जर्मनी की समस्याओं के लिए यहूदियों व मार्क्सवादियों को ज़िम्मेदार ठहराने की आक्रामक नीतियों के चलते देखते ही देखते हिटलर जर्मनी का सबसे बड़ा नेता बन गया. 1921 के दौरान हिटलर की पार्टी का नया नामकरण हुआ नेशनलिस्ट सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी. जर्मन भाषा में इस नाम का शॉर्ट फॉर्म बना नाज़ी यानी नाज़ी पार्टी.



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जर्मनी में नाज़ियों के प्रताड़ना कैंपों की बेहद भयानक तस्वीरें भी इंटरनेट पर उपलब्ध हैं.


ऐसे सत्ता में आई नाज़ी पार्टी
1920 के दशक में हिटलर धीरे धीरे प्रसिद्ध हो रहा था. 1923 के दौरान वह जर्मनी के एक हिस्से को टेकओवर करने की नाकाम कोशिश कर चुका था. इसके लिए उस पर राजद्रोह का आरोप लगा था और उसे पांच साल के ​लिए जेल भेजा गया लेकिन हिटलर सिर्फ एक साल ही जेल में रहा. उसकी प्रसिद्धि बढ़ने लगी थी, वह देश भर में जाना जा रहा था और जेल के एक साल में लिखी उसकी किताब मीन काम्फ का पहला भाग छप चुका था.

फिर, 1929 में जर्मनी एक आर्थिक संकट आया और बेरोज़गारी का भयानक दौर. नाज़ी नेताओं ने इस मौके को भुनाया और सरकार गिराने की पूरी कवायद शुरू की. जुलाई 1932 में चुनाव हुए तो नाज़ी पार्टी ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की. जनवरी 1933 में हिटलर जर्मन चांसलर बना और नाज़ी सरकार सत्ता में आई.

नाज़ी सरकार में क्या हुआ?
नाज़ी पार्टी की सरकार बनते ही दूसरी सभी राजनीतिक पार्टियों को प्रतिबंधित कर दिय गया. 1933 में ही पहला नाज़ी कॉन्सेंट्रेशन कैंप डैशॉ में खोला गया जहां राजनीतिक कैदियों को रखा गया. डैशॉ का यह कैंप पहला ऐसा कैंप बना, जहां हज़ारों यहूदी कुपोषण, बीमारियों, ज़रूरत से ज़्यादा काम या सज़ा ए मौत के चलते मार डाले गए. यहूदियों के अलावा इस कैंप की भेंट और भी लोग चढ़े जैसे विरोधी राजनीतिक, कलाकार, बुद्धिजीवी, जिप्सी, विकलांग और समलैंगिक लोग क्योंकि हिटलर का मानना था कि ये लोग नए जर्मनी की अवधारणा में अनफिट थे.

दूसरे विश्वयुद्ध का कारण बना नाज़ीवाद
हिटलर की सरकार आते ही जर्मनी ने फ्रांस के साथ हुई संधि को खारिज किया. हिटलर की पार्टी ने कहा कि ये समझौता जर्मनी को जर्मनी से ही अलग करने वाला था और जर्मनी के अधिकार सीमित करने वाला भी इसलिए इसे नहीं माना जाएगा. हिटलर ने आक्रामक कदम उठाते हुए सबसे पहले 1933 में जर्मनी को लीग ऑफ नेशन्स से अलग किया. समझौते के प्रावधानों को ठेंगा दिखाकर जर्मनी की सशस्त्र सेना बनाई. राइनलैंड पर कब्ज़ा किया, ऑस्ट्रिया को अलग किया और चेकोस्लवाकिया में घुसपैठ की.

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जर्मनी की नाज़ी पार्टी ने 1 सितंबर 1939 को पोलैंड में घुसपैठ की थी. (इस कहानी के लिए तस्वीरें हिस्ट्री.कॉम से साभार)


इसके बाद नाज़ी पार्टी ने पोलैंड को ​हथियाने का कदम उठाया तो फ्रांस और ग्रेट ब्रिटेन ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन फिर भी जर्मनी ने 1 सितंबर 1939 को पोलैंड में घुसपैठ कर ही दी. इसके बाद फ्रांस और ​ग्रेट ब्रिटेन ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की यानी छह साल के कार्यकाल में नाज़ी पार्टी की विदेश नीतियों ने ही दूसरे विश्वयुद्ध की आग भड़काई.

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