इस महिला ने 132 साल पहले क्या कारनामा किया था? जो अब बन रहा है उसका स्मारक

एक महिला पत्रकार ने कैसे अपनी जान जोखिम में डालकर एक अस्पताल में मरीज़ों पर हो रहे अत्याचारों का भंडाफोड़ किया था? कैसे उस खुलासे से पूरा शहर और प्रशासन हिल गया था? पढ़िए एक रोमांचक और यादगार कहानी.

News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 9:33 PM IST
इस महिला ने 132 साल पहले क्या कारनामा किया था? जो अब बन रहा है उसका स्मारक
नेली ब्लाय ने किया था अस्पताल के भयानक अत्याचारों का खुलासा. प्रतीकात्मक तस्वीर.
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Updated: July 29, 2019, 9:33 PM IST
आप कोई कारनामा करते हैं और फिर उसके लिए आपको सम्मान या प्रतिसाद 132 साल बाद मिले, तो इसे आप क्या कहेंगे? यक़ीनन हमारे देश में ऐसी मिसालें कम नहीं हैं जब ये हुआ हो. किसी फिल्म का कलात्मक दर्जा सालों बाद पहचाना गया तो किसी किताब या लेखक को सालों बाद तरजीह मिली. लेकिन, ये कहानी एक पत्रकार की है और वो भी अमेरिकी महिला पत्रकार, जिसने संभवत: दुनिया के पहले बेहद खतरनाक स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम देकर एक बड़ा खुलासा किया था और प्रशासन की चूलें हिला दी थीं. अब 132 साल बाद उस ऑपरेशन का महत्व समझकर उसी जगह उस महिला पत्रकार की प्रतिमा स्थापित की जाने वाली है. जानिए क्या था वो स्टिंग ऑपरेशन और उस पत्रकार की क्या कहानी थी.

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ये महिला पत्रकार थी नेली ब्लाय, जिसका असली नाम एलिज़ाबेथ कोचरन था और वह नेली ब्लाय के नाम से लेखन करती थी. 23 साल की नेली अपने शुरूआती पत्रकारिता करियर में कुछ कठोर विषयों पर रिपोर्टिंग कर चुकी थी, लेकिन उसके बाद कला और थिएटर की रिपोर्टिंग की असाइनमेंट दिया गया था. इससे बोरियत महसूस करते हुए नेली 'पिट्सबर्ग डिस्पैच' नामक अखबार छोड़ जोसफ पुलित्ज़र (जिनके नाम पर पुलित्ज़र पुरस्कार दिया जाता है) के अखबार 'न्यूयॉर्क वर्ल्ड' से जुड़ी. वहां एक अंडरकवर असाइनमेंट की रूपरेखा तैयार हुई.

ऐसा था जान के जोखिम वाला ऑपरेशन

ब्लैकवेल आईलैंड, जिसे अब रूज़वेल्ट आईलैंड के नाम से जाना जाता है, में एक मेंटल असायलम यानी मानसिक रोगियों का अस्पताल था. वहां रोगियों के साथ क्या बर्ताव किया जाता था? कितनी यातनाएं दी जाती थीं और क्या हालात थे? इसका जायज़ा लेने के लिए इस अंडरकवर ऑपरेशन के संबंध में चर्चा हुई. काम खतरनाक था क्योंकि योजना के मुताबिक एक पागल के तौर पर नेली को इस अस्पताल में दाखिल होना था और कब तक रहना पड़ सकता था, कुछ तय नहीं था. खतरा ये भी था कि उस पागलखाने में उस पर क्या गुज़रने वाली थी, इसका अंदाज़ा भी नहीं था.

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एक पत्रकार, लेखिका के अलावा नेली को उद्यमी और नारीवादी विचारों की महिला के रूप में याद किया जाता है.

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नेली ने किया जोखिम उठाने का इरादा
अंडरकवर ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार थी और नेली इरादा कर चुकी थी. इसके लिए नेली ने पहले अपने घर में आईने के सामने खड़े होकर एक मानसिक रोगी जैसा दिखने की प्रैक्टिस की थी. उसके बाद वह एक चॉलनुमा बोर्डिंग हाउस में गई और वहां उसने सबके सामने एक मानसिक रोगी जैसी एक्टिंग करते हुए कई लोगों को डराया. अंजाम ये हुआ कि पुलिस को बुलाया गया और फिर गिरफ्तारी के बाद नेली को कोर्ट में पेश किया गया. एक पुलिस अफसर, एक डॉक्टर और एक जज ने परीक्षण के बाद नेली को विक्षिप्त मानकर ब्लैकवेल आईलैंड के असायलम में भेजने का फैसला सुनाया.

पागलखाने के वो दस भयानक दिन
'तकरीबन पूरी रात औरतों के चीखने की आवाज़ आती रही, एक चिल्ला रही थी कि हे भगवान मुझे मौत दे दो. दूसरी चीख थी : मार डाला और तीसरी : पुलिस पुलिस. ऐसी कराहती आवाज़ों में रात कटी.' उस पागलखाने में नेली की पहली रात इस तरह गुज़री. उसने अगले कुछ दिनों में देखा कि मानसिक मरीज़ों को भयानक यातनाएं दी जाती थीं. उन्हें बर्फ जैसे ठंडे पानी में रात भर नहलाया जाता था, बांधकर रखा जाता था, पीटा जाता था, खराब पानी पीने को दिया जाता था और बदबूदार मक्खन लगी जली हुई काली ब्रेड खाने को.

नेली ने वहां देखा कि करीब 45 मरीज़ थे, ​जो अमानवीय हालात में जी रहे थे. कुछ बहुत खतरनाक मरीज़ थे और कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें जबरन पागल करार देकर उस अस्पताल में दाखिल करवा दिया गया था. सारा दिन, सारी रात उन्हें यातनाएं दी जाती थीं और उस पूरे अस्पताल में चीखें और कराहें गूंजती रहती थीं.


दस दिन बाद वापसी, फिर लेख से तहलका
इन भयानक हालात में खुद भी यातनाएं सहती हुई नेली यही सोच रही थी कि कब उसे यहां से निकलने का मौका मिलेगा. दूसरी तरफ, अखबार न्यूयॉर्क वर्ल्ड ने अपने वकीलों के ज़रिये नेली को बाहर निकालने का कानूनी रास्ता बनाया और दस दिन बाद नेली को उस असायलम से छुड़वाया गया. इसके बाद नेली के अनुभवों को अखबार ने खुलासे की एक सीरीज़ 'असायलम में नेली ब्लाय के अनुभव' के तौर पर फ्रंट पेज पर छापा. जिसके शीर्षक थे 'कैसे शहर के इस अभागे वार्ड को पोसा जाता है' और 'बर्फ में नहलाने जैसे नर्सों की निर्दयता और क्रूरता के नमूने'. नेली ने लिखा था :

एक पूरी तरह स्वस्थ महिला को आप चुप रहने को कहें और स्ट्रेट बैक वाली एक बेंच पर सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक सीधे बैठे रहने का हुक्म दे दें. उसे इस दौरान बिल्कुल चुप रखें, कुछ बोलने न दें... उसे बेकार खाना दें और कठोर बर्ताव और फिर देखें कि कितना वक्त लगता है उसे पागल होने में. दो महीनों के भीतर वो मानसिक रोगी हो जाएगी.


बड़ा असर हुआ और बदलाव भी
पूरा पत्रकारिता जगत नेली के इस साहस के समर्थन में आया और कई कहानियां छापी गईं. पत्रकार पहली बार देख रहे थे कि किसी महिला पत्रिकार ने इस तरह की खोजी पत्रकारिता की थी. प्रशासन की नींव हिल गई और तुरंत कार्रवाई करते हुए नेली को लेकर उस असायलम के दौरे किए गए लेकिन तब तक कुछ दिन हो चुके थे इसलिए दिखाने के लिए काफी कुछ ठीक कर दिया गया था. फिर भी, नेली के लेखन का असर था कि उस मानसिक रोग उपचार केंद्र के कायाकल्प के कई इंतज़ाम किए गए. 1887 में 10 लाख डॉलर का फंड उस अस्पताल के कायाकल्प के लिए जारी किया गया.

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नेली ने किताब लिखी थी 'टेन डेज़ इन ए मैड हाउस'.


यही नहीं, बल्कि उस समय के महान लेखक चार्ल्स डिकेन्स और मारग्रेट फुलर जैसे व्यक्तित्वों ने उस असायलम का दौरा कर लेखन किया, लेकिन चूंकि ऐसे कलाकारों के दौरे नियोजित और प्रायोजित थे इसलिए उन्हें उतने क्रूर और सच्चे व कच्चे अनुभव नहीं मिल सके, जो नेली को मिले थे.

नेली ने बाद में किताब भी लिखी 'टेन डेज़ इन ए मैड हाउस'. इस किताब ने नेली को बेहद चर्चित और स्मरणीय बना दिया. पत्रकारिता के लेखन को एक नई दिशा देने वाली इस किताब के बाद भी नेली के कारनामे जारी रहे. नेली पहली महिला पत्रकार बनीं जिसने 19वीं सदी में पहली बार वर्ल्ड टूर किया और दुनिया की यात्रा की कहानियां लिखीं. नेली अपने समय में पूरी दुनिया नहीं तो अमेरिका में एक चर्चित नाम बन गई थी. अब जाकर उस ब्लैकवेल आईलैंड पर नेली का स्मारक बनाने की योजना बनी है. 2020 तक इस प्रतिमा को स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसका बजट 5 लाख डॉलर का है.

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First published: July 29, 2019, 9:32 PM IST
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