हिमालय में नई खोज, जानें दुनिया की सबसे ऊंची झील की कहानी

नेपाल में पर्यटकों (Tourists) और पर्वतारोहियों का तांता लगे रहने की बड़ी वजह हिमालय की पर्वत श्रंखला (Himalayan Range) है. इसी पर्वत श्रंखला में एक रहस्य छुपा हुआ था, जिसे हाल में खोजा (Discovery) गया. सबसे ऊंची झील के नए रिकॉर्ड के बारे में जानें.

News18Hindi
Updated: August 12, 2019, 1:15 PM IST
हिमालय में नई खोज, जानें दुनिया की सबसे ऊंची झील की कहानी
काजिन सारा झील के लिए एफबी पर दी गई तस्वीर.
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Updated: August 12, 2019, 1:15 PM IST
एक नई खोज सामने आई है और अगर इस नई खोज को मान्यता मिल जाती है तो दुनिया को सबसे ऊंची एक नई झील (Highest Altitude Lake) मिलेगी. जी हां, नेपाल (Nepal) में कुछ महीने पहले पर्वतारोहियों के एक दल ने इस झील को खोजा, जिसके बारे में अब तक दुनिया को पता ही नहीं था. हिमालय की पर्वत चोटियों पर चढ़ाई करने वाली एक टीम ने इस झील को खोजा, तो पाया गया कि अब तक सबसे ऊंची झील तिलिचो (Tilicho Lake) के मुकाबले ये झील ज़्यादा ऊंचाई पर स्थित है. चेम ग्रामीण नगरपालिका के सिंगारखड़का की सीमा में मिली इस नई झील को काजिन सारा (Kajin Sara) के नाम से जाना जा रहा है. आइए जानें दुनिया की सबसे ऊंची झील कैसी है और उसका रिकॉर्ड कैसे टूट सकता है.

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नेपाल के पोखरा (Pokhra) शहर से 55 किलोमीटर दूर मनांग (Manang) ज़िले में स्थित तिलिचो झील दुनिया की सबसे ऊंची झील मानी जाती है. समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 4919 मीटर या 16138 फीट है. तकरीबन 85 मीटर गहरी ये झील 4.8 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है. अब अगर नई खोज को मान्यता मिल जाती है तो तिलिचो झील सबसे ज़्यादा ऊंचाई पर स्थित झील नहीं रहेगी, बल्कि काजिन सारा झील के नाम ये रिकॉर्ड (World Record) दर्ज होगा.

क्या वाकई सबसे ऊंची झील है तिलिचो?

हिमालय की अन्नपूर्णा रेंज की पहाड़ियों के बीच तिलिचो झील को इस आकार की दुनिया की सबसे ऊंची झील का दर्जा प्राप्त है. हालांकि इससे भी ज़्यादा ऊंचाई पर नेपाल और तिब्बत में कुछ झीलें स्थित हैं, लेकिन अस्ल में, ये झीलें इतनी छोटी हैं कि इन्हें झील का दर्जा नहीं दिया जा सकता. दूसरी ओर, तिलिचो झील की लंबाई 4 किमी और चौड़ाई करीब 1.2 किमी है इसलिए इसे झील समझा जाता है.

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तिलिचो झील का विहंगम दृश्य. चित्र विकिपीडिया से साभार.

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कैसे पहुंचा जाता है यहां?
अन्नपूर्णा रेंज में होने वाले ट्रेक के दौरान तिलिचो झील तक पहुंचने के लिए करीब एक दिन की चढ़ाई करना होती है और केवल इसके किनारे से कुछ दूर तक ही पहुंचा जा सकता है. यहां कैंपिंग या लॉजिंग जैसी सुविधाएं नहीं हैं और इस झील से मनांग के बीच में किसी किस्म की रुकने की व्यवस्था नहीं है. फिलहाल इस झील तक पहुंचने के लिए थोरोंग ला पास का रास्ता है लेकिन यह रास्ता लंबा होने के कारण उत्तरी दिशा की तरफ एक और रास्ता कुछ समय से लोकप्रिय हो रहा है.

सबसे ज़्यादा ऊंचाई से स्कूबा डाइविंग
तिलिचो झील की और भी खूबियां हैं, जिनमें एक है कि ये दुनिया की सबसे ऊंची स्कूबा डाइविंग साइट्स में शुमार है. साल 2000 में एक रूसी टीम ने यहां स्कूबा डाइविंग का आयोजन किया था, लेकिन इस तरह के एडवेंचर काफी खतरनाक माने जाते हैं. तिलिचो की दूसरी खूबी ये है कि ये एकदम फ्रेश पानी की झील है और नेपाल के हाइड्रोलॉजी व मीट्रियोलॉजी विभाग के मुताबिक़ इस झील में कोई जलीय जीवन मौजूद नहीं है.

इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता भी है
हिंदू मानते हैं कि तिलिचो झील वही झील है, जिसका रामायण में काक भुषुंडी झील के तौर पर वर्णन है. काक भुषुंडी के बारे में मान्यता है कि उन्होंने ही सबसे पहले रामायण की कथा पक्षीराज गरुड़ को इसी झील के किनारे सुनाई थी. पक्षीराज को यह कथा सुनाने के लिए ऋषि काक भुषुंडी ने कौवे का रूप धारण किया था. यही रूप लेने के कारण ऋषि भुषुंडी का नाम काक भुषुंडी प्रचलित हुआ.

अब कैसे काजिन सारा बनाएगी रिकॉर्ड?
हिमालयन टाइम्स ने हाल में यह रिपोर्ट जारी की कि कुछ पर्वतारोहियों ने जिस काजिन सारा झील को खोजा था, उसका मापन किया गया है और पाया गया है कि यह झील समुद्र तल से 5200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यानी तिलिचो से ज़्यादा ऊंचाई पर. लेकिन, अभी इस मापन या अध्ययन का सत्यापन होना बाकी है. ये भी पाया गया है कि यह झील डेढ़ किलोमीटर लंबी और करीब 600 मीटर चौड़ी है यानी इसे झील का दर्जा दिया जा सकता है. अगर इसका सत्यापन हो गया तो 5000 मीटर से ज़्यादा की ऊंचाई पर स्थित यह दुनिया की इकलौती झील मानी जाएगी.

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First published: August 12, 2019, 1:15 PM IST
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