इस ग्रह पर मिल गया है पानी, क्या इंसान अब यहीं जाकर रहेंगे?

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Updated: September 12, 2019, 10:01 PM IST
इस ग्रह पर मिल गया है पानी, क्या इंसान अब यहीं जाकर रहेंगे?
वैज्ञानिकों ने दी एक नए ग्रह पर जीवन की भरपूर उम्मीद की खुशखबरी.

चांद (Moon) और मंगल ग्रह (Mars) पर पानी की खोज के तमाम अभियानों (Space Missions) के बीच एक ऐसे ग्रह का खुलासा हुआ है जिसे आप दूसरी पृथ्वी (Earth) भी कह सकते हैं. जानें कैसा है ये ग्रह और कितनी रोमांचक है जीवन की संभावना

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चांद और मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाओं (Possibility of Life) की लंबी तलाश के बीच अगर कोई ऐसा ग्रह ही मिल जाए, जहां ज़िंदा रहने के लिए पहले से ही अनुकूल स्थितियां हों तो? जी हां, आप ये जानकर सुखद आश्चर्य महसूस कर सकते हैं कि एक ऐसे ग्रह (New Planet) का पता लगा लिया (Discovery) गया है, जहां हमारी पृथ्वी जैसा ही पर्यावरण और तापमान है. यही नहीं बल्कि इस ग्रह पर पानी (Water in Space) होने तक का दावा किया गया है, यानी मुमकिन है कि अगले कुछ समय में पृथ्वी के अलावा कहीं और इंसानी बस्ती होने का सपना सिर्फ सपना न रह जाए बल्कि हकीकत हो.

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आपने कभी सोचा है कि पृथ्वी अगर जीने लायक ग्रह न बचे तो क्या कोई ऐसी जगह है, जहां इंसान ज़िंदा रह सकें? ये सवाल कोरी कल्पना नहीं है बल्कि इस सवाल के कारण भी है और इसके इर्द गिर्द शोध (Research) भी ज़ोरों पर हैं. एक तरफ चांद और मंगल (Moon & Mars) पर जीवन की संभावनाओं की तलाश पूरी ताकत के साथ की जा रही है और इसके अलावा भी अंतरिक्ष (Space) में और विकल्प खोजे जा रहे हैं. आइए जानें कि जीवन के लिए आशा की किरण देता ये नया ग्रह कैसा है और इसे लेकर शोध कहां तक पहुंचे हैं.

नए ग्रह का नाम है K2-18B

वैज्ञानिकों ने फिलहाल उस ग्रह को K2-18B नाम दिया है जो पृथ्वी से 111 प्रकाश वर्ष दूर यानी हमारे सौरमंडल से बाहर है. इस ग्रह पर पानी द्रव रूप में होने मनुष्यों के अनुकूल तापमान होने की बात लंदन के वैज्ञानिकों ने 'नेचर' नाम की पत्रिका में लिखे एक लेख में कही है. साथ ही ये भी बताया है कि ये ग्रह पृथ्वी से दोगुने आकार का है. वैज्ञानिकों का दावा है कि K2-18B पर तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच है.

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वैज्ञानिकों के मुताबिक ये पहला मौका है जब पृथ्वी के अलावा किसी ग्रह पर सचमुच पानी और भाप दिख रही है. प्रतीकात्मक तस्वीर.

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लेकिन ​ऐसा नहीं है कि यह तुरंत पहुंच में हो. खगोलशास्त्रियों की चिंता यह है कि चूंकि ये ग्रह पृथ्वी से बहुत ज़्यादा दूरी पर है इसलिए उस तक पहुंचकर पूरी जानकारी जुटा पाना कैसे मुमकिन हो सकता है. लेकिन वैज्ञानिकों ने ये उम्मीद भी जताई है कि आने वाले दशक में अत्याधुनिक टेलिस्कोप की मदद मिलेगी और इस ग्रह के बारे में अध्ययन किया जा सकेगा.

पृथ्वी जैसा भी और काफी अलग भी
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में खगोलशास्त्री जॉवना टिनेटी के हवाले से एक समाचार एजेंसी ने लिखा है कि 'हम ये कल्पना नहीं कर सकते कि इस ग्रह की सतह पर समुद्र हैं लेकिन इसकी संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता'. वहीं, इस खोज का नेतृत्व कर रहे कनाडा स्थित मॉन्ट्रियाल यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर बियर्न बेनेक के मुताबिक 'ये पहला मौका है जब पृथ्वी के अलावा किसी ग्रह पर सचमुच पानी और भाप दिख रही है. ये ग्रह ऐसी जगह पर है जहां इसे पर्याप्त मात्रा में उष्मा मिल सकती है. इस मामले में ये पृथ्वी की तरह है और इसलिए यहां जीवन की संभावना है'.

हालांकि बेनेक मानते हैं कि कुछ मामलों में ये ग्रह पृथ्वी से काफ़ी अलग है. बेनेक के मुताबिक 'इस ग्रह का व्यास पृथ्वी के व्यास से लगभग ढाई गुना ज़्यादा होने के कारण हम समझ सकते हैं कि ऐसे ग्रहों के चारों ओर गैसों का मोटा आवरण होता है और इसके अंदर जाते हुए तापमान बढ़ता जाता है इसलिए हमें अभी सतर्क रहना चाहिए'.

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हाल ही खोजे गए ग्रह K2-18B को पृथ्वी का दूसरा वर्जन या अवतार मानना जल्दबाज़ी होगी. प्रतीकात्मक तस्वीर.


इसे पृथ्वी 2.0 समझना गलत होगा
हाल ही खोजे गए ग्रह K2-18B को पृथ्वी का दूसरा वर्जन या अवतार मानना जल्दबाज़ी होगी. यूसीएल के एक और वैज्ञानिक एंजेलोज़ त्ज़ियारस के मुताबिक किसी और ग्रह पर पानी का मिलना बहुत ही आशावादी और उत्साहित करने वाली खोज है. लेकिन सिर्फ इसी आधार पर इस ग्रह को पृथ्वी का जुड़वां या विकसित वर्जन मान लेना ठीक नहीं है. अब हमें ये भी सोचना होगा कि क्या पृथ्वी अपने आप में अनोखा या इकलौता ग्रह है भी कि नहीं.

कैसे मुमकिन होगा और समझना?
साल 2016 व 17 में हबल स्पेस दूरबीन से जो डेटा मिला था, एंजेलोज़ और उनकी टीम ने उसका विश्लेषण कर K2-18B ग्रह के वातावरण को जानने समझने का बीड़ा उठा रखा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि तारों की गणना और उन्हें देखने की नई जनरेशन की तकनीक वाली जेम्स वेब स्पेस दूरबीन और यूरोपियन स्पेस एजेंसी के एरियल मिशन से उम्मीद है कि पृथ्वी के सौरमंडल के बाहर स्थित इस ग्रह और शेष ग्रहों के वातावरण को जानने समझने में ज़्यादा मदद मिल सकेगी. गौरतलब है कि एरियल मिशन 2028 तक लॉंच होगा और करीब 1000 ग्रहों की सैंपलिंग करेगा.

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First published: September 12, 2019, 3:08 PM IST
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