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क्या मौत के बाद बनी रहती है आत्मा? मौत से जुड़ी 7 नई बातें

News18India
Updated: April 6, 2020, 4:34 PM IST
क्या मौत के बाद बनी रहती है आत्मा? मौत से जुड़ी 7 नई बातें
मौत से जुड़े हुए रहस्यों को समझने के लिए लगातार वैज्ञानिक अध्ययन हो रहे हैं. फाइल फोटो.

मौत के बारे में बातचीत करना कोई दुर्भाग्यपूर्ण बात या अपशकुन नहीं, बल्कि जीवन के एक खास अनुभव के ज़रिए जीवन को और बेहतर समझने का तरीका है. मौत के बाद आपकी चेतना, ऊर्जा का क्या होता है? वॉकिंग कॉर्प्स सिंड्रोम क्या है? जैसे कई सवालों के जवाब जानें.

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सदियों से दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों (Cultures) और सभ्यताओं में मृत्यु (Death) को लेकर एक डर और रहस्य की स्थितियां किसी न किसी स्तर पर बनी रही हैं. दूसरी तरफ, पिछली कुछ सदियों से विज्ञान (Science) ने मौत से जुड़े रहस्यों से परदा उठाने की चेष्टाएं लगातार की हैं और आधुनिक समय में मौत को लेकर कुछ चौंकाने वाली नई बातें पता चली हैं, जिन्हें जानना आपके लिए दिलचस्प होगा.

जीवविज्ञान (Biology) के विशेषज्ञों ने कई रहस्यों (Mystery) से परदा तो उठा दिया है, लेकिन मौत से जुड़े कई पहलू अभी भी ऐसे हैं, जिनसे जुड़े सवालों के जवाब नहीं मिले हैं. यह भी समझना चाहिए कि मौत के बारे में जानना, समझना या अध्ययन करना (Study) कोई अपशकुन नहीं बल्कि जीवन को और बेहतर समझने का ही एक उपाय है. बहरहाल, आइए जानें कि हालिया वक्त में मौत को लेकर ऐसे क्या खुलासे हुए हैं, जिनसे पहले लोग वाकिफ़ नहीं थे.

1. मौत के बाद भी रहती है चेतना
जैसे ही मौत होती है, तो चेतना का क्या होता है? यह सदियों पुराना सवाल है, लेकिन आधुनिक समय के विज्ञान ने इसका एक जवाब खोज लिया है. एनवायू लैंगॉन मेडिकल सेंटर के शोध निदेशक डॉ. सैम पार्निया ने शोध में पाया कि मौत के बाद चेतना बनी रही है. बि​गथिंक की रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. पार्निया की मानें तो मस्तिष्क का विचार करने वाले हिस्से सेरेब्रल कॉर्टेक्स में मस्तिष्किीय तरंगें बनी रहती हैं और क्लीनिकल डेथ के करीब 20 सेकंड तक यह चेतना रहती है.



2. मौत ही आखिरी पड़ाव है?


क्या मौत के बाद भी जीवन है? विज्ञान को अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है,​ जिससे साबित हो कि मौत के बाद भी किसी तरह की ज़िंदगी होती है. लेकिन, मौत के बाद भी हमारे जीन्स रहते हैं. रॉयल सोसायटी की ओपन बायोलॉजी में प्रकाशित हुए एक अध्ययन के मुताबिक चूहों और एक मछली पर किए गए प्रयोगों में पाया गया कि मौत के बाद हज़ार से ज़्यादा जीन्स ऐसे थे, जो ज़्यादा सक्रिय हो गए. कुछ मामलों में ये भी पाया गया कि ऐसे जीन्स मौत के चार दिन बाद तक सक्रिय रहे.

 

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वॉशिंग्टन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और अध्ययनकर्ता पीटर नोबल ने न्यूज़वीक को बताया था कि क्या आप सोच सकते हैं कि मौत के 24 घंटे बाद लिये गए सैंपल के अध्ययन में दिखता है कि जीन्स बढ़ रहे हैं. यह वाकई चौंकाने वाला सच था.

3. ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती
जीन्स भी कुछ समय के बाद निष्क्रिय हो जाते हैं, लेकिन एक चीज़ है, जो कभी नष्ट नहीं होती.. वह है आपकी ऊर्जा. यह थर्मोडायनामिक्स का पहला नियम भी है कि ऊर्जा केवल रूपांतरित होती है. भौतिकी के विशेषज्ञ आरोन फ्रीमैन ने इसकी व्याख्या इस तरह की है :

अपनी दुखी मां को थर्मोडायनामिक्स का पहला नियम याद दिलाने के लिए आपको सच में किसी फिज़िसिस्ट की जरूरत है! आपकी पूरी ऊर्जा, हर तरंग, हर उष्मा, आपके हर कण की हर हरकत इसी दुनिया में रहती है, रहेगी, यही होगा.


4. मौत से पहले आने लगते हैं विचित्र सपने
विचित्र ही नहीं बल्कि कठोरता के चरम तक के सपने मौत से पहले आने लगते हैं. कुछ लोग सपने में देखते हैं कि उनका शरीर उतरा रहा है. कुछ को अपने मृतक परिजनों से मिलने के सपने आते हैं. ऐसा क्यों होता है? यह तो अब तक नहीं पता, लेकिन बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक केंटुकी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केविन नील्सन के न्यूरोलॉजी के एक अध्ययन के मुताबिक जो लोग मौत के करीब होते हैं, उनके शरीर में एक उत्तेजना प्रणाली सक्रिय हो जाती है, जिससे वो नींद की रैपिड आय मूवमेंट की स्थिति में पहले ही प्रवृत्त हो जाते हैं.

5. पहली बार कब दफनाई गई थी लाश?
मानविकी के विशेषज्ञ डोनाल्ड ब्राउन के अध्ययन के हवाले से बिग​थिंक की रिपोर्ट की मानें तो यह पता करना बेहद कठिन है कि मानव इतिहास में पहली बार कब या किसकी लाश दफनाई गई थी, लेकिन एक थ्योरी है, जिसे होमो नैलडी के नाम से जाना जाता है.

इस अध्ययन के मुताबिक जीवाश्मों से पता चला कि लुप्त हो चुकी पूर्व मानव की एक जनजाति होमिनिन के समय की एक कब्रिस्ताननुमा संरचना दक्षिण अफ्रीका में पाई गई. लेकिन यह संरचना जान बूझकर बनाई गई थी या अनजाने में बन गई थी, इसके बारे में कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है.

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प्राचीन मानव की होमिनिन प्रजाति के समय में सबसे पहली कब्र के प्रमाण मिलते हैं. फाइल फोटो.


6. चलती फिरती लाश यानी वॉकिंग कॉर्प्स सिंड्रोम क्या है?
सामान्य तौर से हम ज़िंदा हैं या मुर्दा, इसका भेद कर लेते हैं और समझते हैं कि हम ज़िंदा हैं. और ऐसा समझने या महसूस करने में हमें कोई खास मशक्कत नहीं करना पड़ती लेकिन कुछ लोगों में एक खास विकृति पैदा हो जाती है और वो इस फर्क को समझने में नाकाम हो जाते हैं कि वो ज़िंदा हैं या नहीं.

1882 में डॉ. जूल्स कोटार्ड ने इस समस्या को सबसे पहली बार समझा था और इसे कोटार्ड सिंड्रोम कहा था. इस सिंड्रोम से ग्रस्त लोग खुद को मुर्दा समझने लगते हैं या अपने शरीर के अंगों को गुम पाते हैं या अपनी आत्मा को. अस्ल में, बाहरी सच्चाई को न समझ पाने वाली एक स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें एक शून्यवादी भ्रांति पनपती जाती है.

7. क्या मौत के बाद बढ़ते हैं नाखून और बाल?
जी नहीं. यह पूरी तरह मनगढ़ंत बात है क्योंकि सामान्य तौर पर यह मुमकिन नहीं है. मौत के बाद बाल या उंगलियों के नाखून इसलिए नहीं बढ़ सकते क्योंकि मौत के बाद नयी कोशिकाओं का निर्माण नहीं होता इसलिए नयी मृत कोशिकाएं शरीर में नहीं होतीं. साथ ही, मरने के बाद शरीर पानी से लेकर कोई भी पदार्थ ग्रहण करने की क्षमता खो देता है, इसलिए किसी किस्म की कोशिका वृद्धि संभव नहीं होती.

आखिरकार, सवाल यह है कि जब मौत के बाद वापसी संभव नहीं है, तो मौत के बारे में इतना अध्ययन करना ही क्यों?

एनवायू के डॉ. सैम पार्निया इस सवाल का जवाब इस तरह देते हैं कि इस तरह के अध्ययन से यह समझने की कोशिश की जाती है कि पूरी दुनिया में लोग मौत का अनुभव किस तरह करते हैं. यह ऐसा ही है कि प्रेम जैसे मनुष्यों की श्रेष्ठ भावना या एहसास को समझने के लिए अध्ययन किए जाएं.

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First published: April 6, 2020, 4:33 PM IST
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