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गांधी को मिले और गांधी के दिए कितने निकनेम्स जानते हैं आप?

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: October 6, 2019, 7:41 PM IST
गांधी को मिले और गांधी के दिए कितने निकनेम्स जानते हैं आप?
न्यूज़18 आर्काइव से 1931 में ली गई महात्मा गांधी की एक तस्वीर.

#Gandhi@150 : महात्मा गांधी ने अपने जीवन में 35 हज़ार से ज़्यादा चिट्ठियां लिखी थीं इसलिए उन्हें 'मैन ऑफ लैटर्स' (Man of Letters) भी कहा जाता है. वह अपने साथियों को अक्सर किसी खास नाम से संबोधित करते थे.

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'अगर मेरे स्वभाव में सेंस ऑफ ह्यूमर (Sense of Humour) नहीं होता, तो मैंने कबकी खुदकुशी कर ली होती.' इस वाक्य के बाद आप समझ सकते हैं कि महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) अपने निजी जीवन में कितने हंसमुख और ज़िंदादिल इंसान रहे होंगे. गांधी ने अपने जीवन में कई किताबें (Gandhi Books), कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेख के साथ ही ​35 हज़ार से ज़्यादा पत्र (Letters by Gandhi) लिखे थे और इन ​पत्रों में वह अक्सर कुछ ख़ास लोगों को ख़ास संबोधन (Nicknames) दिया करते थे. इस कहानी के साथ आपके लिए ये जानना भी दिलचस्प हो सकता है कि खुद गांधी (M. K. Gandhi) को कितने नामों से पुकारा गया.

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टैगोर ने कहा था महात्मा
लेखक और कलाकार गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर (Rabindra Nath Tagore) ने जुलाई 1915 में गांधी जी को महात्मा (Mahatma) नाम से पहली बार पुकारा था. अस्ल में, दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में अपने चर्चित आंदोलनों (Movements) के बाद 1915 में ही गांधी जी भारत लौटे थे और फिर भारत की यात्रा पर निकले थे, ताकि देश की मूल समस्याओं और भावनाओं को समझकर अपने आंदोलन का स्वरूप तय कर सकें.

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गुरुदेव और महात्मा एक साथ.


बापू और राष्ट्रपिता किसने कहा?
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साबरमती के आश्रम में गांधी जी के अनुयायी जो साथ रहा करते थे, वो उन्हें बापू नाम से पुकारा करते थे और उनकी पत्नी कस्तूरबाई को बा कहा करते थे. ये भी ज़िक्र है कि टैगोर ने ही पहली बार बापू नाम से महात्मा गांधी को दर्ज किया था. राष्ट्रपिता का टाइटल या उपाधि महात्मा गांधी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दिया था, जब सिंगापुर रेडियो से 6 जुलाई 1944 को उनका एक वक्तव्य प्रसारित हुआ था.

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गांधी के और निकनेम्स
बचपन में दोस्त महात्मा गांधी को मोहन के नाम से पुकारते थे, लेकिन उनके घर में उन्हें मोनिया नाम से पुकारा जाता था. गांधी जी पर शोध कर जीवन प्रभात किताब लिखने वाले प्रभुदास गांधी ने लिखा है कि उनके पिता और दादा के भी निकनेम्स की परंपरा के चलते उन्हें मोनिया नाम दिया गया था. इनके अलावा, दक्षिण अफ्रीका के आश्रम में लोग गांधी को 'भाई' कहकर पुकारा करते थे, जबकि अंग्रेज़ नस्लवादी टिप्पणी करते हुए भारतीयों को कुली कहते थे, जो महात्मा गांधी को भी कहा गया था.

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न्यूज़18 क्रिएटिव


गांधी ने किसे दिया कौन सा निकनेम?
पुलित्ज़र पुरस्कार विजेता रहे जोसेफ लेलिवेल्ड की किताब में गांधी जी के लिखे पत्रों का उल्लेख और विश्लेषण है. इसमें उन्होंने पत्रों के हवाले से दर्ज किया है कि कैसे वो कुछ ख़ास लोगों को ख़ास नामों से संबोधित किया करते थे. ये नाम अक्सर अंग्रेज़ी में रहे हैं, जिनके हिंदी मतलब के साथ यहां प्रस्तुत हैं.

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मेरी प्यारी शांतिदूत, प्रिय बुलबुल, प्रिय बुज़ुर्ग गायिका, मेरी आत्मा की गार्जियन गायिका और मां, प्रिय अम्माजान जैसे कई संबोधन गांधी जी ने सरोजिनी नायडू को लिखे पत्रों में दर्ज किए. इसी तरह राजकुमारी अमृत कौर को गांधी जी ने मेरी प्रिय विद्रोही और प्रिय मूर्ख जैसे संबोधन दिए थे.

विश्व नेताओं को दिए खास नाम
जर्मन तानाशाह हिटलर को लिखे पत्र में गांधी जी ने उसे प्रिय दोस्त संबोधित किया था, जो ख़ासा चर्चित भी हुआ था. विंस्टन चर्चिल के लिए गांधी जी पत्रों में 'डियर प्राइम मिनिस्टर' लिखा करते थे. वहीं, मशहूर वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन को जो पत्र गांधी जी ने लिखे, उनमें उन्हें 'सु​हृदय प्यारा दोस्त' लिखा था. दूसरी ओर मोहम्मद अली जिन्ना को उन्होंने 'प्रिय कायदे-आज़म' संबोधित किया था. सेक्रेट्री रहे महादेव देसाई के बेटे नारायण देसाई के लिए गांधी जी ने बबलू नाम लिखा था.

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जिन्ना को लिखे पत्रों में गांधी जी उन्हें 'कायदे-आज़म' लिखा करते थे.


सिर्फ एक को लिखा 'सर' और खुद को 'जुलाहा'
गांधी जी के कई पत्रों के हवाले से दावा किया जाता है कि उन्होंने सिर्फ मशहूर लेखक लियो टॉल्स्टॉय को 'सर' कहकर संबोधित किया था, जिन्हें वो अपना आदर्श माना करते थे. वहीं सरोजिनी नायडू को लिखे पत्रों में वह खुद के लिए जुलाहा और अदना सा आदमी जैसे शब्द लिखते थे तो अमृत कौर को लिखे पत्रों में उन्होंने अपने लिए लुटेरा और निर्दयी जैसे शब्द भी लिखे थे.

लव मैरिज, तलाक और मैरिटल रिलेशन को लेकर फेमिनिस्ट थे गांधीजी?

एक गांधीवादी के हवाले से टीओआई की रिपोर्ट में लिखा गया कि इन पत्रों और संबोधनों को आज के समय के सामाजिक और सांस्कृतिक बोध के हिसाब से समझना अक्लमंदी नहीं होगा. बात सही भी है कि ये पत्र उनके लोगों के साथ निजी संबंधों पर आधारित थे और जिनके प्रमाण नहीं हैं, उनके बारे में गांधी जी के सेंस ऑफ ह्यूमर और केमिस्ट्री को पहले समझना ही होगा.

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First published: October 6, 2019, 7:38 PM IST
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