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क्यों अभिजीत बनर्जी के नोबल अवार्ड को कमतर बताने के हो रहे हैं दावे

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: October 16, 2019, 6:11 PM IST
क्यों अभिजीत बनर्जी के नोबल अवार्ड को कमतर बताने के हो रहे हैं दावे
इस साल अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के लिए बनर्जी सहित तीन अर्थशास्त्री चुने गए.

क्या आप जानते हैं कि अर्थशास्त्र (Economics) के क्षेत्र में बनर्जी से पहले अमर्त्य सेन (Amartya Sen) को भी नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) नहीं मिला था! जानिए कि इस दावे के पीछे क्या कारण हैं.

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  • Last Updated: October 16, 2019, 6:11 PM IST
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भारत के लोगों के लिए बेशक ये खुशी और गर्व का विषय है कि अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee) को इकोनॉमिक्स का नोबल अवार्ड (Nobel Award in Economics) हासिल हुआ है. नोबल अवार्ड को दुनिया का सबसे बड़ा अवार्ड माना जाता है लेकिन अभिजीत बनर्जी को ये अवार्ड मिलते ही इसे कमतर ठहराने के दावे भी शुरू हो गए हैं. जहां तक इसकी प्रक्रिया और प्राइज की बात है तो बिल्कुल वैसी ही है जैसी अन्य क्षेत्रों में नोबल अवार्ड देने में.

जैसे ही अभिजीत बनर्जी को नोबल अवार्ड मिलने की खबर आई, वैसे ही कुछ लोग ये दावा करने लगे कि ये नोबल अवार्ड असली नोबल नहीं है. क्योंकि असली नोबल तो केवल पांच क्षेत्रों में ही मिलते हैं. जो फिजिक्स, केमेस्ट्री, साहित्य, शांत और चिकित्सा में हैं.

लेकिन हकीकत ये है कि रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेस (Royal Swedish Academy of Sciences) फिजिक्स और केमेस्ट्री में नोबल अवार्ड का निर्धारण करती है. उसी ने 1968 से इकोनॉमिक्स में भी उन्हीं मानकों पर नोबल अवार्ड देना शुरू किया. नोबल अवार्ड कमेटी ने इस पर मुहर भी लगाई. लेकिन इकोनॉमिक्स में ऩोबल अवार्ड को चूंकि स्वीडन का केंद्रीय बैंक स्विरिग्स रिक्सबैंक (Sveriges Riksbank Sweden’s central bank) स्पांसर करता है. नोबल कमेटी खुद स्पष्ट करती है कि ये अवार्ड भी नोबल अवार्ड के सिद्धांतों और प्रक्रियाओं के जरिए दिया जाता है.



 

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अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पहली बार 1969 में दिया गया था.
क्या हैं नोबेल पुरस्कार?
 नोबेल पुरस्कार के नाम से उन पुरस्कारों को जाना जाता है, जो स्वीडन के प्रसिद्ध केमिस्ट, इंजीनियर और उद्योगपति रहे अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के आधार पर स्थापित किए गए थे. वसीयत के मुताबिक केमिस्ट्री, फिज़िक्स, साहित्य, शांति और चिकित्सा के क्षेत्र में पांच पुरस्कार शुरू हुए थे.

पहली बार 1901 में दिए गए थे, इन्हें नोबेल पुरस्कार कहा जाता है. बाद में ये महसूस किया गया कि इसमें इकोनॉमिक्स को भी जोड़ा जाना चाहिए. इस पर नोबल अवार्ड फाउंडेशन ने मुहर भी लगा दी. लेकिन इस अवार्ड में प्राइज देने का जिम्मा स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने संभाला हुआ है.

अर्थशास्त्र से जुड़े नोबेल पुरस्कार का मतलब?
नोबेल पुरस्कार के 68 साल के इतिहास के बाद अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार की स्थापना 1968 में हुई. 1969 में इस क्षेत्र का पहला पुरस्कार दिया गया. स्वीडन के केंद्रीय बैंक स्वेरिजेज़ रिक्सबैंक ने अपनी 300वीं सालगिरह के मौके पर नोबेल फाउंडेशन के लिए एक अनुदान जारी किया.

इस अनुदान से अर्थशास्त्र के क्षेत्र में पुरस्कार के लिए सालाना राशि जुटाई जाती है. अर्थशास्त्र के इस पुरस्कार को बाकी नोबेल पुरस्कारों के बराबर ही माना जाता है. हकीकत यही है कि वही रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेस इसकी प्रक्रिया पूरी करती है, जो फिजिक्स और केमेस्ट्री में नोबल अवार्ड के विजेताओं को छांटती है.

क्या है इस पुरस्कार का नाम?
स्थापना के वक्त से ही इस पुरस्कार का नाम एक दर्जन बार बदला जा चुका है. पहले और दूसरे पुरस्कार के समय यानी 1969-70 में इसका नाम था 'प्राइज़ इन इकोनॉमिक साइंस डेडिकेटेड टू मेमोरी ऑफ अल्फ्रेड नोबेल'. 1971 में सिर्फ 'प्राइज़ इन इकोनॉमिक साइंस' इसका नाम रहा.

अमर्त्य सेन को 1998 में जब यह पुरस्कार मिला था, तब इसका नाम 'बैंक ऑफ स्वीडन प्राइज़ इन इकोनॉमिक साइंसेस इन मेमोरी ऑफ अल्फ्रेड नोबेल' था. लेकिन नोबल अवार्ड कमेटी ने इसे अपना नोबल अवार्ड ही मानती है. अल्फ्रेड नोबल की वसीयत में भी लिखा है कि भविष्य में अवार्ड अन्य क्षेत्रों में देने पर विचार किया जा सकता है बजाए गणित के.

साल 2006 से इस साल तक इस पुरस्कार का नाम स्वेरिजेज़ रिक्सबैंक प्राइज़ इन इकोनॉमिक साइंसेस इन मेमोरी ऑफ अल्फ्रेड नोबेल' है. यानी इस 'मेमोरियल' पुरस्कार के नाम का मतलब है कि अल्फ्रेड नोबेल की याद में स्वीडिश बैंक द्वारा दिया जाने वाला पुरस्कार.

अर्थशास्त्र के 'नोबेल' के बारे में ये भी है खास
चूंकि ये पुरस्कार स्वीडिश बैंक के माध्यम से स्थापित हुआ था इसलिए इसे अर्थशास्त्र के क्षेत्र में केंद्रित किया गया. लेकिन समय के साथ कई सवाल और उलझनें पेश आती रहीं. मसलन अर्थशास्त्र का दायरा क्या माना जाएगा? विजेता चुनने का पैमाना क्या होगा? किन हालात में दो या अधिकतम तीन विजेता होंगे? इन सवालों के जवाब खोजे गए और पूरी नियमावली तय हुई.

समय के साथ तय किया गया कि अर्थशास्त्र के दायरे में इतिहास, समाजशास्त्र या राजनीति शास्त्र जैसे कुछ और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र भी आएंगे जिनका अर्थशास्त्र से सीधा और गहरा संबंध है. ऐसे में विजेता चुनते वक्त ध्यान रखा जाएगा कि भले ही वह किसी और समाज विज्ञान का विशेषज्ञ हो, लेकिन अर्थशास्त्र से जुड़े किसी विषय में उसने उल्लेखनीय सफलता हासिल की हो.

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स्वीडन के केंद्रीय बैंक स्वेरिजेज़ रिक्सबैंक का इतिहास साढ़े तीन सौ साल पुराना है.


नोबेल प्राइज़ के आधिकारिक पोर्टल पर दिए गए पूरे ब्योरे के मुताबिक एक ही विषय, मुद्दे या दायरे पर मौलिक और शानदार काम करने की स्थिति में अधिकतम तीन विजेता एक साथ चुने जा सकते हैं. इस स्थिति में तीनों को समान रूप से ही पुरस्कार का हकदार माना जाएगा, कोई बड़ा या छोटा जैसा नहीं समझा जाएगा.

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First published: October 16, 2019, 5:04 PM IST
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