अयोध्या में राम लला के एक नहीं, अनेकों मंदिर हैं, जानिए उनकी कहानी

विवाद से इतर भी अयोध्या में ऐसे कई मंदिर हैं जो राम जन्मभूमि की गाथा कहते हैं.

News18Hindi
Updated: December 6, 2018, 5:50 AM IST
अयोध्या में राम लला के एक नहीं, अनेकों मंदिर हैं, जानिए उनकी कहानी
अयोध्या में राम मंदिर मुद्दे को लेकर देशभर में गर्मागर्मी का माहौल है. संतों के सम्मेलन से लेकर राजनैतिक बयानबाजियां भी चल रही हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद से इतर भी अयोध्या में ऐसे कई मंदिर हैं जो राम जन्मभूमि की गाथा कहते हैं. हिंदू पौराणिक मान्यताओं के आधार पर बनाए गए ये मंदिर अपनी कहानी के अलावा वास्तुशिल्प के लिए भी जाने जाते हैं.
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Updated: December 6, 2018, 5:50 AM IST
अयोध्या में राम मंदिर मुद्दे को लेकर देशभर में गर्मागर्मी का माहौल है. संतों के सम्मेलन से लेकर राजनैतिक बयानबाजियां भी चल रही हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद से इतर भी अयोध्या में ऐसे कई मंदिर हैं जो राम जन्मभूमि की गाथा कहते हैं. हिंदू पौराणिक मान्यताओं के आधार पर बनाए गए ये मंदिर अपनी कहानी के अलावा वास्तुशिल्प के लिए भी जाने जाते हैं.


राम लला मंदिर - माना जाता है कि अयोध्या में ही भगवान राम का जन्म हुआ था और इसलिए राम लला मंदिर की हिंदुओं में काफी मान्यता है. इसे सात मुख्य पवित्र स्थलों में से एक भी माना जाता है. मुगलकाल से शुरू हुए काफी सारे विवादों के बीच ये जगह अब अति संवेदनशील मानी जाती है और यहां तमाम सुरक्षा जांचों से गुजरने के बाद भी 50 मीटर या उससे ज्यादा दूरी से दर्शन करने को मिलता है.


हनुमान गढ़ी मंदिर- ये अयोध्या के कुछ प्रमुख मंदिरों में से है. यहां पर भगवान हनुमान की प्रतिमा है. अवध के नवाब ने हिंदू प्रजा की मान्यताओं के प्रति सम्मान जताने के लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया. यहां 70 खड़ी सीढ़ियां हैं, ऐसी मान्यता है कि उन्हें पार करके भगवान के दर्शन करने पर सारी इच्छाएं पूरी होती हैं.


कनक भवन- माना जाता है कि भगवान राम के विवाह के तुरंत बाद उनकी सौतेली मां ने बहू सीता को ये जगह तोहफे यानी मुंह-दिखाई में दी थी. यहां राम-सीता रहा करते थे जो कि उस वक्त की वास्तु का अद्भुत नमूना था. वक्त के साथ ये भवन खत्म होता चला गया, बाद में ओरछा के राजा ने इसका दोबारा निर्माण करवाया और इसी जगह पर राम-सीता के नाम पर कनक मंदिर बनाया गया.


गुप्तार घाट का मंदिर- यह सरयू नदी के किनारे है और हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ है. इस घाट के बारे में मान्यता है कि भगवान राम ने इस लोक को छोड़ने के लिए यहीं पर जल समाधि ली थी और भगवान विष्णु के पवित्र वास यानी बैकुण्ठ में प्रवेश किया था. यहां पर कई छोटे-छोटे मंदिर मिलकर अनुपम छवि प्रस्तुत करते हैं.


नागेश्वर मंदिर- इस मंदिर के बारे में कोई निश्चित मान्यता या विश्वास नहीं मिलता. स्थानीय लोगों में इसे लेकर अलग-अलग कहानियां प्रचिलत हैं. यह मंदिर त्रेता युग की कहानी कहता है और शिल्प में इसी तरह की चीजें अंकित हैं. यहां हर साल शिवरात्रि त्योहार का आयोजन खूब धूमधाम से किया जाता है.


दशरथ भवन- ये मंदिर अयोध्या के ठीक बीचोंबीच में स्थित है. ऐसा माना जाता है कि यहां पर त्रेतायुग में महाराज दशरथ रहा करते थे. बाद में ये मंदिर कई उथलपुथल से गुजरा और पुर्ननिर्माण के बाद यहां पर सीता-राम और लक्ष्मण की प्रतिमाएं रखी गई हैं.
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