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इस्लामाबाद में मंदिर पर फतवा, जानें किस हाल में हैं पाकिस्तान के शहरों के कृष्ण मंदिर

कराची का इस्कान कृष्ण मंदिर

कराची का इस्कान कृष्ण मंदिर

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बनने जा रहे श्रीकृष्ण मंदिर के खिलाफ जामिया अशर्फ़िया लाहौर ने फतवा जारी करके इसे बनाना बंद करने की बात कही है. साथ ही अदालत से भी इसका निर्माण रोकने को कहा है. जानते हैं कि पाकिस्तान में अब जो कृष्ण मंदिर बचे हैं, वो किस हालत में हैं, वहां पूजा की क्या स्थिति रहती है.

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    इस्लामाबाद में बनने वाले पहले हिंदू कृष्ण मंदिर को बनाने को लेकर विवाद हो गया है. पाकिस्तान की ही एक मुस्लिम संस्था ने इसके निर्माण को रोकने को लेकर अदालत की शरण ली है. एक जमाना था जब पाकिस्तान (Pakistan) के लाहौर और रावलपिंडी जैसे शहरों में हिंदू (Hindu) और सिख (Sikhs) बहुतायत में ही नहीं थे बल्कि बहुसंख्यक थे लेकिन बंटवारे के बाद स्थिति बदल गई. हालांकि पाकिस्तान में अब भी कुछ भगवान कृष्ण के मंदिर हैं, जानते हैं क्या रहता है यहां पूजा-पाठ का हाल.

    आल पकिस्तान हिंदू राइट्स कमेटी ने पिछले दिनों वहां के मंदिरों का सर्वे किया था. इसके बाद उसने एक रिपोर्ट बनाकर बताया कि देश में अब कुल 428 हिंदू मंदिर बचे हैं, जिसमें 20 सही हालत में हैं, जहां अब भी पूजा अर्चना होती है.

    बाबरी मस्जिद ध्वंस के दौरान पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर मंदिरों को निशाना बनाया गया था. तब कम से कम 1000 के आसपास मंदिरों को क्षति पहुंची थी. कुछ पुराने मंदिर खुद समय के साथ खराब हाल में पहुंच गए. एक दर्जन से ज्यादा कृष्ण मंदिर अब भी बचे हैं. जिसमें कुछ अब भी बेहतर स्थिति में हैं. जन्माष्टमी के दौरान यहां काफी चहलपहल भी रहती है. पिछले कुछ सालों में इस्कॉन ने भी यहां पर अपने दो भव्य मंदिर बनवाए हैं.

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    पहले बात करते हैं रावलपिंडी के उस कृष्ण मंदिर की, जो 121 साल पुराना है. पिछले कुछ सालों से खराब हाल में है. करीब एक साल पहले पाकिस्तान सरकार ने इसके जीर्णोद्धार के लिए दो करोड़ रुपए मंजूर किए थे.

    गिने चुने मंदिरों में ही सुबह-शाम होती है पूजा 
    वैसे बताया जाता है कि पाकिस्तान में गिने चुने मंदिर ही ऐसे हैं, जिसमें दिन में दो बार .यानि सुबह और शाम नियम से पूजा होती है. उसमें लोग हिस्सा भी लेते हैं. अन्यथा पाकिस्तान के अन्य मंदिरों के साथ ये स्थिति नहीं है. हालांकि इस्कान ने जब कराची और क्वेटा में दो कृष्ण मंदिरों को बनवाया है, तब से उसमें लोगों की भीड़ जुटने लगी है.

    रावलपिंडी का कृष्ण मंदिर, जिसके जीर्णोद्धार के लिए पाकिस्तान सरकार ने दो करोड़ रुपए मंजूर किए


    रावलपिंडी का कृष्ण मंदिर 
    पाकिस्तान के डॉन अखबार के मुताबिक, शरणार्थी ट्रस्ट संपत्ति बोर्ड (ईटीपीबी) का कहना है कि सरकार के दो करोड़ रुपए रिलीज करने के बाद रावलपिंडी के कृष्ण मंदिर में काम जल्दी शुरू हो चुका है.

    इस मंदिर का निर्माण 1897 में सद्दर में कांची मल और उजागर मल राम पांचाल ने कराया था. बंटवारे के बाद कुछ सालों के लिए ये मंदिर बंद भी कर दिया गया था. 1949 में इसे फिर खोला गया. पहले तो यहां रहने वाले हिंदू इसकी देख रेख करते थे. 1970 में इसे ईटीपीबी के नियंत्रण में दे दिया गया. 1980 तक इस्लामाबाद में रहने वाले भारतीय राजदूत यहां पूजा करने आते थे.

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    लाहौर का कृष्ण मंदिर 
    लाहौर अविभाजित भारत में हिंदुओं का बड़ा शहर था. जहां उनके कई मंदिर थे. अब भी यहां 22 के आसपास मंदिर हैं लेकिन पूजा केवल दो में ही होती है. उनमें एक कृष्ण मंदिर है और दूसरा वाल्मीकि मंदिर.
    हर जन्माष्टमी के दौरान लाहौर सजता है. यहां रहने वाले हिंदू इसमें आते हैं. लाहौर के केसरपुरा स्थित इस मंदिर के भी 90 के दशक में तब नुकसान पहुंचाने की खबरें आईं थी जब अयोध्या में विवादित ढांचे तो तोड़ा गया था. ये मंदिर काफी क्षतिग्रस्त भी हुआ था. बाद में सरकार ने 1.2 करोड़ रुपए देकर इसे ठीक कराया था.

    एबोटाबाद और हरिपुर में टूटे हुए मंदिर 
    पाकिस्तान के एबोटाबाद और हरीपुर में भी प्राचीन कृष्ण मंदिर हैं लेकिन ये टूटे हुए हैं. जहां कोई पूजा नहीं होती. अमरकोट में बड़े पैमाने पर हिंदू रहते हैं, वहां एक कृष्णा मंदिर है. हिंदू आबादी वाले इलाके थारपरकार में भी एक हिंदू मंदिर है. इन दोनों मंदिरों में हिंदू श्रृद्धालु पूजा के लिए आते हैं.



    सिंध में सबसे ज्यादा मंदिर 
    वैसे पाकिस्तान में सबसे ज्यादा बचे हुए मंदिर सिंध प्रांत में हैं. इनकी संख्या करीब 58 है. जिसमें कराची शहर में ही 28 मंदिर हैं. लेकिन इसमें से बहुत कम में पूजा अर्चना होती है. बाकि मंदिर काफी पुराने और खराब हाल में हैं.

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    कराची में श्रीस्वामीनारायण मंदिर है. इसमें हरे कृष्ण महाराज और राधा कृष्णदेव की मूर्तियां हैं. कुछ सालों पहले इस्कॉन ने कराची के जिन्ना एयरपोर्ट के करीब राधा गोपीनाथ मंदिर खोला था. ये बड़ा मंदिर है, जिसकी गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं.

    क्वेटा में राधा नाथ मंदिर


    इस्कॉन का मंदिर 
    क्वेटा में भी एक कृष्ण मंदिर है, जिसे वर्ष 2007 में पाकिस्तान सरकार से जमीन लेकर इस्कॉन ने बनवाया था. यहां भी कृष्ण से जुड़ी गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं. वैसे हाल के बरसों में पाकिस्तान सरकार ने अपने यहां टूरिज्म को विकसित करने के लिए प्राचीन हिंदू और बौद्ध मंदिरों की ओर ध्यान देना शुरू किया है. हालांकि ये सही है कि पाकिस्तान के हिंदू मंदिर अक्सर वहां निशाना बनते रहे हैं. अब भी कई बार बहुसंख्यक मुस्लिमों की नाराजगी का वो निशाना बनते हैं.

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