दो साधुओं की मॉब लिंचिंग के कारण चर्चाओं में आए पालघर के बारे में जानें 10 बातें

दो साधुओं की मॉब लिंचिंग के कारण चर्चाओं में आए पालघर के बारे में जानें 10 बातें
पालघर का रेलवे स्टेशन, पालघर कस्बा जिले का मुख्यालय भी है

महाराष्ट्र (Maharashtra state) का पालघर (Palghar) कस्बा हमेशा से ही चर्चाओं में रहता आया है. पिछले कुछ समय से सांप्रदायिक वजहों, बुलेट ट्रेन के विरोध और बांग्लादेशी शरणार्थियों के कारण भी चर्चाओं में रहा है. जानते हैं इस जगह से जुड़ी 10 खास बातें

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 20, 2020, 6:22 PM IST
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महाराष्ट्र में मुंबई के करीब बसा कस्बा पालघर हमेशा ही पिछले कुछ बरसों में गलत कारणों से चर्चाओं में रहा है. अबकी बार ये दो साधुओं की मॉब लिंचिंग के कारण की गई हत्या के कारण चर्चा में है. आइए जानते हैं कि पिछले कुछ सालों में किन किन मामलों में पालघर चर्चाओं में आया है. क्या है इसकी डेमोग्राफी. यहां की सियासी हवा किस ओर बहती है.

1. पालघर के सांसद और विधायक - पालघर मुंबई से करीब 90 किलोमीटर दूर है. ये नगर पालिका है. यहां के सांसद और विधायक दोनों ही शिवसेना से ताल्लुक रखते हैं. यहां के सांसद अरुण गोवित हैं जबकि विधायक अमितकृष्ण गौड़ा

2. फेसबुक टिप्पणी पर बरपा था हंगामा-  पहली बार पालघर तब सुर्खियों में आया था जब 2012 में फेसबुक पर टिप्पणी के कारण यहां की दो लड़कियों को गिरफ्तार कर लिया गया था. ये टिप्पणी उन्होंने बाल ठाकरे के निधन के बाद शोक में पूरे महाराष्ट्र को बंद करने पर की थी.
3. बड़े पैमाने पर विस्फोटक मिले थे-  वर्ष 2016 में यहां बड़े पैमाने पर विस्फोटक बरामद हुए थे. ये विस्फोटक जमीन पर दबाकर रखे गए थे. पुलिस के कारण इन विस्फोटक की मात्रा 10-15 किलो के आसपास थी.



4. कहां हैं पालघर -  पालघर मूल तौर पर कोंकण डिविजन में आने वाला एक कस्बा है, जो पालघर जिले का प्रशासकीय मुख्यालय भी है. ये मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर स्थित है.

5. साक्षरता में बहुत आगे- पालघर साक्षरता के लिहाज से बहुत आगे है. यहां की कुछ साक्षरता दर 77,52 है. जहां इस जिले के लिए 81.2 फीसदी पुरुष शिक्षित हैं वहीं 73.35 महिलाएं साक्षर हैं. इस लिहाज से इसकी साक्षरता दर देश की औसत साक्षरता दर से कहीं ज्यादा है.

6. हिंदू आबादी सबसे ज्यादा - पालघर में हिंदू आबादी सबसे ज्यादा है लेकिन उसके अलावा यहां जैन, बौद्ध, मुस्लिम भी पर्याप्त संख्या में रहते हैं. पालघर जिले की कुल आबादी 14.30 लाख के आसपास है जबकि पालघर कस्बे की जनसंख्या 70 हजार के आसपास.
7. यहां दो साल पहले बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी शरणार्थियों को गिरफ्तार किया गया था. माना जाता है कि पालघर में काफी संख्या में बांग्लादेशी शरणार्थी रहते हैं.

पालघर का शिरगांव फोर्ट. पालघर में कई पुराने किले हैं. ये जगह टूरिज्म के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है


8. आजादी की लड़ाई में रहा है प्रमुख केंद्र - पालघर को वर्ष 2014 में जिला बनाया गया. वैसे इस शहर का आजादी का इतिहास भी काफी समृद्ध है. 1942 में जब देश में असहयोग आंदोलन छिड़ा था, तब भी पालघर एक प्रमुख केंद्र के तौर पर उभरकर सामने आया था.

9. टूरिज्म के लिहाज से भी अहम- पालघर जिले में कई तरह के पुराने किले हैं. पर्यटन के लिहाज से ये महत्वपूर्ण केंद्र है. यहां 10 से ज्यादा पुराने किले हैं. आजादी से पहले यहां से बड़े पैमाने पर लकड़ी की स्मगलिंग हुआ करती थी.

10. बुलेट ट्रेन का हुआ था बड़ा विरोध- प्रधानमंत्री ने बुलेट परियोजना का शिलान्यास किया तो उसका सबसे ज्यादा विरोध यहां के आदिवासियों की ओर से हुआ. 12 जनवरी 2017 को यहां पश्चिमी और मध्य भारत के करीब एक लाख आदिवासी जुटे. आदिवासी एकता परिषद (एईपी) के इस सम्मेलन के जरिए मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना का विरोध किया गया.
दरअसल आदिवासियों का विरोध ये था कि इस परियोजना से पालघर के 73 गांवों के आदिवासी विस्थापित हो जाएंगे. इसमें दो गांव ऐसे भी हैं जो पहले से ही एक बांध के निर्माण के चलते दोबारा बसाए गए थे. इन दोनों गांवों के विस्थापित परिवार अभी भी सरकार द्वारा किए गए स्कूल, अस्पताल और जायज आर्थिक मुआवजा के वादों के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं.

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