किसी राज्य में चुनाव की घोषणा के बाद सियासी दलों पर कैसे लगती है लगाम?

न्यूज़18 क्रिएटिव
न्यूज़18 क्रिएटिव

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 : लोकतंत्र का त्योहार यानी चुनावों को ठीक तरह से, शांति से और लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग (Election Commission) बताता है कि कोई पार्टी क्या कर सकती है, क्या नहीं.

  • News18India
  • Last Updated: September 29, 2020, 1:52 PM IST
  • Share this:
बिहार चुनाव (Bihar Elections) को लेकर सरगर्मियां तेज़ हैं. बैठकों के साथ ही, रैलियों और सभाओं की योजनाएं बन रही हैं. Covid-19 के कारण बदले वक्त में इसे लेकर भी चर्चा है कि किस तरह इन्हें अंजाम दिया जाएगा. रैलियां वर्चुअल (Virtual Rally) की जाएं या पहले की तरह सामान्य रूप से ही? बहरहाल, जैसे भी हों, लेकिन एक आदर्श संहिता (Code of Conduct) का पालन तो करना ही पड़ेगा कि क्या बोलना है, कैसे और किस तरह का बर्ताव करना है. अस्ल में, किसी राज्य में जब चुनाव आयोग चुनाव की घोषणा (Announcement of Elections) कर देता है तो राजनीतिक पार्टियों (Political Party) के लिए एक कोड ऑफ कंडक्ट तय हो जाता है.

सियासी दल क्या नहीं कर सकते?
जातियों, समुदायों या संप्रदायों आदि के बीच पहले से बने तनाव को और भड़काने या आपसी नफरत को उकसाने वाली बयानबाज़ी कोई पार्टी या उम्मीदवार नहीं कर सकता. यह चुनाव संबंधी आचार संहिता का उल्लंघन माना जाता है. और भी ऐसे कई मानक तय किए गए हैं, जिन्हें आचार संहिता के रूप में जाना जा सकता है. जैसे चुनावी माहौल में आप विरोधी पार्टी या नेता की आलोचना उसके काम, नीति या पिछले रिकॉर्ड पर कर सकते हैं, निजी जीवन को लेकर नहीं.

ये भी पढ़ें : कितने देशों में मुमकिन हुई वर्चुअल संसद? भारत में मांग और मुश्किलें
bihar election 2020, bihar assembly election, bihar election schedule, bihar assembly polls, बिहार चुनाव 2020, बिहार विधानसभा चुनाव, बिहार चुनाव शेड्यूल, बिहार इलेक्शन
न्यूज़18 क्रिएटिव




आरोप, प्रचार और भ्रष्टाचार
विरोधियों की आलोचना करते हुए पार्टियों और कैंडिडेट्स को खयाल रखना चाहिए कि वो अप्रमाणित तथ्यों के आधार पर आरोप लगाने से बचें. इसके साथ ही, वोट के लिए जाति या संप्रदाय के आधार पर अपील नहीं की जा सकती. चुनावी प्रोपैगैंडा के लिए मंदिर, मस्जिद, चर्च जैसे धार्मिक स्थानों का उपयोग नहीं किया जा सकता.

ये भी पढ़ें : खाकी से खादी... कितने पुलिस अफसर सियासत में कैसे आज़मा चुके हैं किस्मत?



कोई भी पार्टी या उम्मीदवार ऐसा कोई काम नहीं कर सकता, जो चुनाव संबंधी कानूनों के तहत भ्रष्टाचार के दायरे में आता है. वोटरों को फुसलाने, उन्हें कोई रकम या उपहार बांटने जैसे काम प्रतिबंधित हैं. पोलिंग स्टेशन से 100 मीटर के दायरे में आप चुनाव प्रचार नहीं कर सकते. पोलिंग बूथ पर वोटरों को लाने ले जाने की सुविधा देना भी भ्रष्टाचार के दायरे में है.

निजता का खयाल रखना ज़रूरी
किसी वोटर को वोट देने के लिए उसके निजी जीवन में किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जा सकता. किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति को उसकी मर्ज़ी के बगैर चुनावी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करना पार्टी या कैंडिडेट का अधिकार नहीं है. यानी कोई पार्टी या उम्मीदवार अपने झंडे, बैनर या पोस्टर किसी की निजी प्रॉपर्टी पर बगैर इजाज़त के नहीं लगा सकता.

bihar election 2020, bihar assembly election, bihar election schedule, bihar assembly polls, बिहार चुनाव 2020, बिहार विधानसभा चुनाव, बिहार चुनाव शेड्यूल, बिहार इलेक्शन
चुनाव आयोग का ट्वीट.


सबकी आज़ादी की बात
​कोई राजनीतिक पार्टी या उम्मीदरवार किसी दूसरी पार्टी या उम्मीदवार की चुनावी सभा या जुलूस में बाधा नहीं पहुंचाए, यह खयाल रखना ज़रूरी है. किसी पार्टी के कार्यकर्ता या समर्थक अन्य पार्टी के चुनाव प्रचार में बाधा नहीं डाल सकते. चुनाव प्रचार के दौरान आपसी टकराव न हो इसलिए एक पार्टी के मीटिंग स्थल पर या उसके पास दूसरी पार्टी अपना जुलूस आदि कार्यक्रम नहीं कर सकती.

सभा व जुलूस के नियम
अगर कोई पार्टी या उम्मीदवार अपने चुनाव प्रचार से संबंधित कोई मीटिंग, रैली, जुलूस या किसी अन्य तरह का सार्वजनिक कार्यक्रम करना चाहता है तो उसे एक प्रोसीजर के तहत अनुमतियां लेना होती हैं. यानी पुलिस और प्रशासन की पहले से मंज़ूरी के बगैर ऐसा नहीं किया जा सकता. लाउडस्पीकरो के लिए पहले से लाइसेंस लेना होता है. साथ ही, तय या मंज़ूर रूट, स्थान और समयसीमा के भीतर ही कार्यक्रम संपन्न करना होता है.

ये भी पढ़ें :-

Explained : श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुद्दा, 1968 का समझौता और ताज़ा विवाद क्या है?

अमेरिका चुनाव में अंतरिक्ष से वोट कैसे देते हैं एस्ट्रॉनॉट्स?

ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज़ से पुलिस और प्रशासन को पूर्व सूचना व मदद के लिए अर्ज़ी दी जाती है. इस मंज़ूरी के बाद पार्टी या कैंडिडेट कोई गतिविधि कर सकता है. दूसरे अगर दो या दो से ज़्यादा पार्टियों को एक ही वक्त और एक ही स्थान या रूट पर जुलूस या सभा आदि करने की नौबत आए तो पहले से तय किए गए नियमों का पालन करना होता है ताकि टकराव या तनाव की स्थिति न बने.

bihar election 2020, bihar assembly election, bihar election schedule, bihar assembly polls, बिहार चुनाव 2020, बिहार विधानसभा चुनाव, बिहार चुनाव शेड्यूल, बिहार इलेक्शन
चुनाव की घोषणा से चुनाव संपन्न होने तक लागू रहती है आचार संहिता.


यह आचार संहिता चुनाव की घोषणा के फौरन बाद से चुनाव संपन्न होने तक लागू रहती है. यानी वोटिंग के दिन और वोटिंग के लिए तय बूथों या पोलिंग स्टेशनों के लिए भी पूरा कोड ऑफ कंडक्ट होता है. वोटरों को लुभाने जैसी कोई गतिविधि बूथों के आसपास या चुनावी प्रचार खत्म होने की समयसीमा के बाद नहीं की जा सकती. चुनावी ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों, मशीनरी और वोटिंग प्रक्रिया में शामिल चीज़ों को लेकर किसी तरह की रुकावट नहीं डाली जा सकती.

भारतीयी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर आचार संहिता के बारे में विस्तार से उल्लेख है. इस पूरी आचार संहिता का पालन न करने पर संबंधित पार्टी या उम्मीदवार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई से लेकर दंडात्मक कार्रवाई तक की जा सकती है. चुनाव आयोग यह कार्रवाई कर सकता है और ज़रूरत पड़ने पर अदालतों के दरवाज़े भी खटखटाए जा सकते हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज