ममता के खेवैया बने 'पीके' ने किस-किसकी नैया लगाई है पार?

चुनाव प्रचार अभियानों के लिए राजनीतिक पार्टियों को मज़बूती देने वाले प्रशांत किशोर को पीके के नाम से जाना जाता है. अपनी तरह की एक अनूठी कंपनी बनाने और चलाने के लिए मशहूर पीके 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान पहली बार चर्चा में आए थे.

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Updated: August 4, 2019, 4:38 PM IST
ममता के खेवैया बने 'पीके' ने किस-किसकी नैया लगाई है पार?
ममता बनर्जी के लिए कैंपेनिंग कर रहे हैं प्रशांत किशोर.
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Updated: August 4, 2019, 4:38 PM IST
चुनाव प्रचार के लिए अभियानों को सोच समझकर डिज़ाइन किया जाता है और एक रणनीति बनाई जाती है, ताकि राजनीतिक पार्टी या उसके नेताओं की छवि तैयार की जा सके. इस तरह की रणनीति डिज़ाइन करने वाली प्रमुख कंपनी आई-पैक के संस्थापक हैं प्रशांत किशोर, जिन्हें सियासी गलियारों में पीके भी कहा जाता है. फिलहाल पीके पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीतिक पार्टी तृणमूल कांग्रेस और ममता की छवि के लिए काम कर रहे हैं. हो सकता है कि कुछ ही समय में आप फायरब्रांड नेता मानी जाने वाली ममता को किसी नए अवतार में देखें.

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भाजपा ने बंगाल में ममता के राजनीतिक किले में जिस तरह सेंध लगाई है, उसकी भरपाई के लिए टीएमसी ने पीके को हायर किया है. ताज़ा खबर ये है कि टीएमसी के ढेरों कार्यकर्ताओं और कुछ नेताओं के बीजेपी में शामिल होने को लेकर जवाबी हमले के तौर पर राज्य में पांच लाख युवाओं को राजनीति से जोड़ने के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू किया गया है. हालांकि इसे औपचारिक तौर पर टीएमसी की जवाबी कार्यवाही नहीं कहा जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ये पीके का ही एक दांव है, जिससे ममता बनर्जी को लाभ हो सकता है.

चुनाव मैनेजर के तौर पर मशहूर हो चुके चुनाव प्रचार रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अब तक क्या झंडे गाड़े हैं? पांच साल पहले केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के ​पीछे किशोर का क्या हाथ था? जानिए कि सियासत के इस पीके की बॉक्सऑफिस रिपोर्ट कैसी रही? इस रिपोर्ट में जानें कैसे इस पीके की अब तक पांच में से चार पिक्चरें बेहद कामयाब रहीं यानी सक्सेस रेट 80 फीसदी रहा.

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रेड्डी की जीत में किशोर की रणनीति को बड़ा श्रेय दिया गया. File Photo


 
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जगनमोहन को हज़ारों किमी पैदल चलवाया
इसी साल दो महीने पहले ही आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने वायएस जगनमोहन रेड्डी ने विधानसभा चुनावों में प्रभावशाली जीत दर्ज की थी. राज्य की 175 में से 151 सीटें वायएसआर कांग्रेस पार्टी ने जीतकर एकतरफा और भारी बहुमत से सरकार बनाई. ये राज्य में बहुत बड़ा बदलाव था लेकिन यह उपलब्धि हासिल करने के पीछे दो सालों की जी-तोड़ मेहनत थी. मई 2017 में जगनमोहन रेड्डी ने प्रशांत किशोर को अपने राजनीतिक सलाहकार के तौर पर हायर कर उनकी कंपनी की सेवाएं ली थीं.

किशोर की कंपनी आई-पैक ने रेड्डी के चुनाव अभियान का खाका तैयार किया था. रेड्डी ने अपने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान 'समर संखवरम', 'अन्ना पिलुपु' और 'प्रजा संकल्प यात्रा' जैसे जो कार्यक्रम किए, वो सब किशोर की बनाई रणनीति के हिस्से थे. संकल्प यात्रा के तहत राज्‍य में रेड्डी ने 3,600 किलोमीटर की पदयात्रा की और उन्‍हें जनता का खासा समर्थन हासिल हुआ. रेड्डी की जीत में किशोर की रणनीति को बड़ा श्रेय दिया गया.

यूपी में नहीं चला था जादू
साल 2017 में हुए उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए 2016 में कांग्रेस ने किशोर को रणनीतिकार के तौर पर हायर किया था. लेकिन, तब किशोर की मदद भी कांग्रेस के काम नहीं आई. राज्य में 300 से ज़्यादा विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटों पर ही जीत मिली थी. इस चुनाव में कांग्रेस की बुरी हार के लिए तमाम आरोप प्रत्यारोप लगे थे, तब किशोर की कंपनी की तरफ से यही कहा गया था कि रणनीति बनाने और लागू करने के लिए कांग्रेस के नेताओं और विश्लेषकों ने सहयोग नहीं दिया.

लेकिन, कांग्रेस के मददगार बन चुके थे किशोर
पंजाब में लगातार दो बार से हार का मुंह देख रही कांग्रेस ने 2016 में ही किशोर को विधानसभा चुनाव के लिए रणनीतिकार के तौर पर हायर किया और 2017 में होने वाले चुनावों के लिए किशोर ने कैप्टन अमरिंदर के लिए रणनीति तैयार की थी. कैप्टन की जीत के बाद रणदीप सुरजेवाला और शंकरसिंह वाघेला जैसे कांग्रेस के कई नेताओं ने खुलकर किशोर के काम को जीत में अहम करार दिया था.

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नीतीश ने भी किशोर की रणनीतियों के असर को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया था. File Photo


नीतीश के लिए पीके रहे कारगर
इससे पहले 2015 में, किशोर ने अपनी कंपनी का ब्रांड बदलकर आई-पैक रखा था और बिहार के चुनावों के मद्देनज़र नीतीश कुमार के साथ जुड़े थे. नीतीश की जीत के बाद इस तरह के दावे भी किए गए थे कि किशोर ने चुनावी और गठबंधन की रणनीति के तहत कई तरह के ऐसे कदम भी उठाए, जिन्हें नैतिक नहीं कहा जा सकता था. ​बीते लोकसभा चुनावों के दौरान भी लालू यादव परिवार और किशोर के बीच उस वक्त हुई बातचीत को एक सौदेबाज़ी की कोशिश और ऐसा राज़ बताया गया, जिसके खुलने पर कई नेता शर्मिंदा हो सकते थे.

नीतीश के चुनाव अभियान के दौरान साइकिल पर 'नीतीश के निश्चय : विकास की गारंटी' स्लोगन के ज़रिए प्रचार की रणनीति कारगर साबित हुई. जीत के बाद नीतीश ने भी किशोर की रणनीतियों के असर को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया था.

पीके ऐसे बने थे चुनाव मैनेजर
साल 2014 में देश में आम चुनाव होने वाले थे. इसी के मद्देनज़र 2013 में प्रशांत किशोर ने राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनाव ​अभियान की रणनीति बनाने वाली एक कंपनी सिटिज़न्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस यानी सीएजी बनाई थी, जो पार्टियों के लिए प्रचार का ज़िम्मा उठा सकती थी. उस वक्त नरेंद्र मोदी ने किशोर की इस कंपनी की सेवाएं लीं. किशोर ने चाय पर चर्चा, रन फॉर यूनिटी और मंथन जैसे कई सोशल मीडिया कार्यक्रम मोदी के लिए तैयार किए थे.

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पहली बार किशोर तभी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने मोदी के लिए रणनीति तैयार की थी. File Photo


'नरेंद्र मोदी : द मैन, द टाइम्स' किताब के लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय ने कहा था कि 2014 चुनाव से महीनों पहले मोदी की टीम के लिए रणनीतियां तैयार करने वालों में किशोर प्रमुख थे. हालांकि इस चुनाव के बाद किशोर ने मोदी का साथ छोड़ा और अपनी कंपनी सीएजी को आई-पैक के नाम से रिडिज़ाइन किया, यह नाम अमेरिकी चुनाव प्रचार कंपनी पैक के नाम पर आधारित था. देश के चुनावी पटल पर पहली बार किशोर तभी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने मोदी के लिए रणनीति तैयार की थी और मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की थी.

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First published: August 4, 2019, 4:38 PM IST
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