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जब एक वोट से CM नहीं बने थे जोशी... अब राजस्थान संकट में होगी अहम भूमिका

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी.

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी.

राजस्थान सरकार पर वर्तमान संकट (Rajasthan Crisis) के समय में विधानसभा स्पीकर डॉ. सीपी जोशी की भूमिका बेहद खास होने वाली है. सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट (Sachin Pilot) के बीच जो तनातनी है, उसमें जोशी का रोल इसलिए खास है क्योंकि कांग्रेस के बड़े नेता रहे जोशी और गहलोत के बीच रिश्तों का एक इतिहास है.

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    राजस्थान कांग्रेस और सरकार पर संकट (Rajasthan Political Crisis) के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस (Rajasthan Congress) के अध्यक्ष सचिन पायलट और उनके खेमे के विधायक बगावत पर उतारू हैं. राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष (Rajasthan Assembly Speaker) सीपी जोशी ने बागी विधायकों को नोटिस जारी करने के मामले में अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की शरण ली है. माना जा रहा है कि राजस्थान संकट के समय में विधानसभा स्पीकर की भूमिका सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण होने वाली है.

    अस्ल में, स्पीकर की भूमिका को लेकर कानूनी पेंच ये है कि विधायकों को अयोग्य ठहराने का अधिकार संविधान स्पीकर को देता है, लेकिन इस व्यवस्था को अदालत में चुनौती दी गई है. ऐसे मामलों में पहले भी अदालतें कह चुकी हैं कि इसे संविधान संशोधन के ज़रिये संसद में बदला जा सकता है. लेकिन राजस्थान के ताज़ा विवाद के चलते कानूनी लड़ाई फिलहाल जारी है. इसी बीच, कांग्रेस के दिग्गज नेता जोशी के बारे में कुछ दिलचस्प फैक्ट्स से उनकी हस्ती जानिए.

    जब एक वोट ने किया था उलटफेर
    नाथद्वारा से फिलहाल कांग्रेस के विधायक के तौर पर जोशी विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका में हैं लेकिन 2008 में इसी विधानसभा क्षेत्र में बड़ा उलटफेर हुआ था. तब विस चुनाव में जोशी के खिलाफ उन्हीं के चेले कहे जाने वाले कल्याण सिंह चौहान भाजपा के टिकट पर खड़े हुए थे. इस चुनाव में सीपी जोशी जीतते तो, राजस्थान के मुख्यमंत्री की कुर्सी उनके पास होती, लेकिन सिर्फ एक वोट से जोशी को शिकस्त मिली और राजस्थान में दूसरी बार बनी कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बने.

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    सीपी जोशी ने आज बुधवार को यह ट्वीट किया.


    हार से घबराए नहीं, बल्कि फिर लड़े जोशी
    2008 विधानसभा चुनाव को अदालत में चुनौती हालांकि जोशी ने दी ज़रूर थी, लेकिन इससे हुआ कुछ नहीं. फिर 2009 में जोशी ने भीलवाड़ा सीट से चुनाव लड़ा और लोकसभा पहुंचे. केंद्र में दूसरी बार बनी यूपीए सरकार में 2009 से 2011 के बीच जोशी ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री रहे और 2011 से 2013 के बीच सड़क परिवहन व हाईवे मंत्री रहे. 2012 में जब ममता बनर्जी ने यूपीए छोड़ दिया था, तब जोशी ने कुछ समय के लिए रेल मंत्रालय भी संभाला था.

    क्रिकेट प्रशासन में जोशी रहे प्रमुख
    राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में भी जोशी प्रमुख भूमिका निभा चुके हैं. दो बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट रहे जोशी ने 2017 में ललित मोदी के बेटे रुचिर मोदी को प्रेसिडेंट चुनाव में हराया था. पिछले साल 2019 में जब सीएम गहलोत के बेटे वैभव गहलोत आरसीए के प्रेसिडेंट बने, तब उन्होंने ​कहा था कि वो जोशी के मार्गदर्शन में काम करेंगे.

    वो विवाद, जब जोशी को मांगना पड़ी माफी
    जोशी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो भाजपा के दिग्गज नेता नरेंद्र मोदी, उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा की जाति और उनकी धर्म की समझ को लेकर कटाक्ष के लहजे में तल्ख बातें करते नज़र आए थे. इस वीडियो के बाद विवाद खड़ा हुआ तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद जोशी ने माफी मांगी थी.

    संगठन में भी निभाया अहम रोल
    अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में महासचिव की भूमिका के लिए जोशी ने 2013 में कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था. 2018 तक जोशी AICC के महा​सचिव की भूमिका निभाते रहे. इस बीच उन्होंने 2014 में जयपुर ग्रामीण क्षेत्र से लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन पांच बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके जोशी यह चुनाव जीत नहीं सके थे. लेकिन कांग्रेस पार्टी के लिए कोई भी भूमिका निभाने में जोशी पीछे नहीं रहे. साथ ही, उन्हें गांधी परिवार का करीबी माना जाता है.

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    राहुल गांधी के साथ सीपी जोशी.


    गहलोत के लिए अहम होंगे जोशी
    अस्ल में, राजस्थान की राजनीति में 70 के दशक में जोशी तब आए थे, जब साइकोलॉजी के लेक्चरर के तौर पर उनकी प्रतिभा को कद्दावर नेता मोहन लाल सुखाड़िया ने पहचाना और उनसे अपना चुनाव कैंपेन डिज़ाइन करवाया. सुखाड़िया चुनाव जीते और 1980 में जोशी को विधानसभा चुनाव के लिए टिकट दिलाने के लिए उन्होंने कइयों को नाराज़ भी किया. जोशी चुनाव जीते और जल्द ही नाथद्वारा ही नहीं, राजस्थान के चर्चित नेता बनते गए.

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    2008 में जब वो एक वोट से चुनाव हारने के कारण सीएम बनने से वंचित रहे, तब ऐसी थ्योरीज़ थीं कि गहलोत की साज़िश थी कि जोशी को कांग्रेस की राजनीति में साइडलाइन कर दिया जाए. बहरहाल, 1998 की गहलोत सरकार में मंत्री भी रहे जोशी की गहलोत के साथ तनातनी चलती रही. 2013 के विधानसभा चुनावों के दौरान जोशी ने कोई मंच गहलोत के साथ साझा नहीं किया था.

    इतिहास बताता है कि जोशी और गहलोत के बीच पावर पॉलिटिक्स को लेकर रिश्तों में कड़वाहटें रही हैं. एक तरफ, जहां यह कहा जाता है कि जोशी को इसलिए राजस्थान विधानसभा में आलाकमान ने स्पीकर चुना था ताकि गहलोत की निरंकुशता काबू में रहे, तो दूसरी तरफ, पिछले साल गहलोत के बेटे को आरसीए में प्रमुख पद तक जोशी ही लेकर गए. जोशी और गहलोत के बीच रहे समीकरण साफ बता रहे हैं कि मौजूदा राजस्थान संकट में जोशी बहुत अहम होने वाले हैं, खास तौर से गहलोत के लिए.

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