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जानें प्याज़ की कीमतों का चुनाव कनेक्शन और क्या हैं अंदेशे

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Updated: September 22, 2019, 6:47 PM IST
जानें प्याज़ की कीमतों का चुनाव कनेक्शन और क्या हैं अंदेशे
प्याज़ की कीमतों में लगातार इज़ाफ़े की खबरें हैं. फाइल फोटो.

प्याज़ की कीमतों में लगातार इज़ाफ़ा (Onion Prices) होने के कारणों के साथ ये भी जानिए कि सरकार क्या कदम उठा रही है और चुनावों के मौसम (Elections in States) में प्याज़ किसको कितना रुला सकता है.

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  • Last Updated: September 22, 2019, 6:47 PM IST
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प्याज़ की बढ़ती कीमतों (Onion Price Rise) से न केवल लोग बल्कि प्याज़ उत्पादक किसान (Farmers) भी परेशान हैं और ये सरकारों के लिए परेशानी की वजह बन सकती है. अगर प्याज़ की कीमतों पर जल्द काबू न पाया गया तो अगले महीने महाराष्ट्र (Maharashtra) और हरियाणा (Haryana) में होने वाले चुनावों (Elections) में वोटरों का मूड क्या करवट ले सकता है, कहा नहीं जा सकता. महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल प्याज़ के सबसे बड़े उत्पादक राज्य हैं और इनमें महाराष्ट्र सबसे बड़ा इसलिए यहां प्याज़ की कीमतें बढ़ना चिंता का सबब हो सकता है. जानिए क्यों बढ़ रही हैं प्याज़ की कीमतें और सरकार की क्या भूमिका है.

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मौसम की मार
प्याज़ की कीमतों में आ रहे उछाल का प्रमुख कारण मौसम (Weather) माना जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर की मानें तो महाराष्ट्र में पिछले साल के सूखे (Drought) और इस साल बारिश में देर (Late Monsoon) के कारण प्याज़ के उत्पादन पर भारी असर पड़ा है. साथ ही, कुछ इलाकों में ज़रूरत से ज़्यादा बारिश हो जाने के कारण फसल में देर होने की खबरें भी हैं. गौरतलब है कि मुंबई और पुणे (Mumbai & Pune) जैसे शहरों में 50 से 60 रुपये किलो तक बिक रहा प्याज़ अब 90 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच गया है. दिल्ली व उत्तर भारत के कई इलाकों में भी तकरीबन यही कीमतें हैं.

कुछ और कारण भी हैं
महाराष्ट्र के नाशिक, पुणे, अहमदनगर और औरंगाबाद ज़िलों को राज्य का ओनियन बेल्ट कहा जाता है और महाराष्ट्र देश के कुल प्याज़ उत्पादन का एक तिहाई पैदा करने वाला राज्य है. यहां प्याज़ की फसल को किसान नमी और धूल से बचाकर कांदा चॉल में रखा करते हैं और मांग के हिसाब से रिटेल बाज़ार में सप्लाई करते हैं.

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प्याज़ की कीमतों में और उछाल का अंदेशा. फाइल फोटो.


दूसरी ओर, श्रावण के बाद नवरात्रि जैसे उत्सवों के चलते बाज़ारों में प्याज़ और मांसाहारी भोजन की सामग्री की मांग घट जाती है, जिसके चलते भी मांग और सप्लाई के गणित इस तरह बैठते हैं कि कीमतों में इज़ाफ़ा होता है. प्याज़ की कीमतें इस बार बहुत से कारणों से बढ़ रही हैं और एक वजह ये भी है कि 2017-18 के मुकाबले महाराष्ट्र में 2018-19 में तकबरीन 90 लाख हेक्टेयर कम इलाके में उत्पादन हुआ है. पिछले साल बाज़ार में सितंबर में जहां 35 हज़ार क्विंटल प्रतिदिन प्याज़ की आवक थी, वहीं इस साल 25 हज़ार रह गई है.

इसलिए अभी ज़्यादा रह सकती हैं कीमतें
महाराष्ट्र और कर्नाटक में इस बार प्याज़ का उत्पादन गिरा है और कमोबेश यही स्थिति हर प्याज़ उत्पादक राज्य की रही है. दूसरी तरफ, पाकिस्तान से प्याज़ के आयात को रोक दिया गया है. खबरों की मानें तो अन्य देशों से प्याज़ का आयात नवंबर के अंत तक होने के आसार हैं इसलिए अभी कम से कम एक महीने तक प्याज़ की कीमतें और रुला सकती हैं.

तो क्या कोई इंतज़ाम नहीं?
ऐसा नहीं है कि ये सब अचानक हुआ है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस साल जून में सरकार ने एक्सपोर्ट सब्सिडी 10 प्रतिशत तक खत्म कर दी थी. ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि इस साल प्याज़ की मांग और सप्लाई के संकट को भांपा गया था. केंद्र सरकार ने 57 हज़ार टन प्याज़ का भंडार भी तैयार किया था लेकिन इसमें से 18 हज़ार टन अब तक खाली हो चुका है.

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First published: September 22, 2019, 6:47 PM IST
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