डूबता हैदराबाद : कहने को 'ग्लोबल सिटी', सच में या सिर्फ ढकोसला?

हैदराबाद में बाढ़ का एक दृश्य.
हैदराबाद में बाढ़ का एक दृश्य.

राज्य सरकार (State Government) ने 5000 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान होने का अनुमान लगाकर केंद्र से 1350 करोड़ रुपये की मदद मांगी है. हज़ारों लोग बेघर हो चुके हैं, कई इलाके डूब में आ चुके हैं और इस सबकी वजह क्या है, लापरवाही?

  • News18India
  • Last Updated: October 19, 2020, 10:39 AM IST
  • Share this:
हैदराबाद में भारी बारिश (Heavy Rains in Hyderabad) से बाढ़ के हालात चिंताजनक बने हुए हैं और कम से कम 50 लोग मारे जा चुके हैं. एक तरफ खबरें कह रही हैं कि आगामी 21 अक्टूबर तक भारी बारिश (Weather Forecast) का सिलसिला जारी रह सकता है, तो दूसरी तरफ सवाल उठ रहा है कि बाढ़ से बेहाल हो गया शहर आखिर कहां चूक गया, जो बारिश का कहर इतना भीषण हो गया? राहत दल बचाव कार्य में लगे हुए हैं और अब तक हज़ारों परिवारों को बाढ़ प्रभावित इलाकों (Flood Affects City) से निकाला जा चुका है.

Covid-19 से जूझ रहे देश और महानगर को बाढ़ की आपदा से जूझना पड़ रहा है. समझा जा सकता है कि यह कितना मुश्किल और जोखिम भरा समय है. सवाल बहुत जायज़ है कि वो कौन सी गलतियां हैदराबाद में हुईं, जिनकी वजह से इन हालात का शिकार होना पड़ा. आपको जानकर हैरानी भी हो सकती है कि हैदराबाद में बाढ़ के पीछे एक नहीं कई बड़े कारण हैं. 5 बिंदुओं में जानिए.

ये भी पढ़ें :- Everyday Science : धरती पर मौसम क्यों बदलते हैं?



1. शहर कहां और किस तरह खड़ा है?
बड़ी चौड़ी सड़कें, गगनचुंबी इमारतें और सरपट दौड़ती गाड़ियां, देखकर तो यही लगता है कि यह शहर बेहद संपन्न होगा. लेकिन ये सब निर्माण जहां खड़ा है, वहां ज़मीन है ही नहीं! जी हां, दो बातें ध्यान से समझने की हैं. एक, हैदराबाद पश्विम में गोदावरी और पूर्व में कृष्णा नदी के बेसिन के बीच में बसता है. पूरा महानगर एक तरह से जल इकाइयों यानी कैचमेंट का सिस्टम है.

hyderabad flood, hyderabad flood news, hyderabad flood 2020, hyderabad weather, हैदराबाद बाढ़, हैदराबाद स्टेट, हैदराबाद सिटी, बाढ़ बचाव
हज़ारों परिवारों को राहत दलों द्वारा बचाया जा रहा है.


दूसरी प्रमुख बात है कि पिछले करीब 40 सालों में यहां खेती किसानी की जितनी भूमि थी, उसे भुलाकर पूरा नया शहर खड़ा कर दिया गया. जल स्रोतों की छाती तक सड़कें तान दी गईं, बगैर बफर ज़ोन के. प्रसिद्ध नेकलेस रोड इस लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण है. हैदराबाद अर्बन लैब्स के विशेषज्ञ के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि निर्माण को लेकर एक प्रो एनवायरनमेंट नीति की ज़रूरत साफ बन चुकी है.

ये भी पढ़ें :- जानिए NIA को पहचान दिलाने वाले IPS संजीव सिंह कौन थे

2. ड्रेनेज सिस्टम है बेहाल!
चूंकि हैदराबाद डेक्कन क्षेत्र में है इसलिए यहां ड्रेनेज पैटर्न बेहद अस्त व्यस्त है. एक तरफ नहीं बल्कि कई तरफ ढलान होने के कारण पानी कई दिशाओं में बहता है. इस तरह का सिस्टम खेती किसानी को ध्यान में रखकर बनाया गया था, लेकिन अब वो तो रही नहीं, लेकिन ये सिस्टम बना हुआ है. सिर्फ नालों ही नहीं पूरे ड्रेनेज सिस्टम के कायाकल्प की ज़रूरत बनी हुई है. अतिक्रमणों को हटाकर पूरे शहर को व्यवस्थित करना विशेषज्ञ ज़रूरी मान रहे हैं.

3. झीलों में जा रहा है गंदगी का ज़हर
सेव अर्बन लेक्स संस्था के मुताबिक हैदराबाद में बरसों से शहर भर का कचरा और सीवेज यहां की झीलों में डंप किया जा रहा है. अब झीलों ने जवाब दे दिया. कैसे हुआ? हाई कोर्ट ने 2016 में कहा था कि सूखा और गीला कचरा अलग अलग करके डंप किया जाए. लोगों ने घरों के स्तर पर तो ये प्रैक्टिस की, लेकिन प्रशासन ने सारा कचरा एक ही जगह डंप करने की कोताही ​बरती. संस्था की लुबना सरवत के मुताबिक 'इससे पहले कि हमारी झीलें और जलस्रोत मर जाएं और हम डूब जाएं, हमें चेतना ही होगा.'

ये भी पढ़ें :-

भारतीय नेवी कैसे रखती है जहाज़ों और सबमरीन के नाम?

क्या था ऑपरेशन गुलमर्ग? कैसे वही मंसूबे 73 साल बाद भी पाले है पाकिस्तान

फोरम फॉर ए बेटर हैदराबाद की मानें तो शहर में प्राकृतिक और कृत्रिम तौर पर 1990 के दशक में 3000 झीलें थीं, लेकिन बहुत कम समय में अब बहुत कम बची हैं या फिर कचरे से पट चुकी हैं.

4. क्या अतीत से सबक नहीं लिया?
यह गलती हैदराबाद को बहुत भारी पड़ी है. एक रिपोर्ट की मानें तो साल 2000 में बाढ़ के बाद विशेषज्ञों की एक कमेटी ने सरकार को सुझाव दिए थे कि 28000 अतिक्रमण ​हटाए जाएं और नाला सिस्टम का कायाकल्प किया जाए. इस पूरे प्रोजेक्ट का खर्च करीब 10 हज़ार करोड़ रुपये आंका गया इसलिए इस सिफारिश को नज़रअंदाज़ कर दिया गया. नालों के विस्तार और आधुनिकीकरण को लेकर एक और कमेटी ने 2007 में इसी तरह की रिपोर्ट दी, तो उसे भी अनदेखा किया गया.

hyderabad flood, hyderabad flood news, hyderabad flood 2020, hyderabad weather, हैदराबाद बाढ़, हैदराबाद स्टेट, हैदराबाद सिटी, बाढ़ बचाव
भारी बारिश पहले भी चेतावनी दे चुकी थी, लेकिन हैदराबाद ने उसे गंभीरता से नहीं लिया.


5. बारिश का कहर
बाढ़ की एक बड़ी वजह भारी बारिश है और पहले भी रही है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन बात यह है कि बारिश कारण नहीं बल्कि एक बहाना है, जो शहर के सिस्टम की पोल खोल देती है. साल 2000 में भारी बारिश से तकरीबन इसी तरह की ​स्थिति बन गई थी. उसके बाद छुटपुट तौर पर ऐसा कई बार हुआ और 2016 में भी बाढ़ की खासी तस्वीर दिखी थी. लेकिन, प्रशासन न तो भारी बारिश से चेता और न ही सिस्टम में ज़रूरी बदलाव करने को लेकर दिलचस्पी दिखाई गई.

इस पूरी कहानी से साफ है कि हैदराबाद राजनीति और खुदगर्ज़ मुनाफा नीतियों की भेंट चढ़ गया. डेक्कन हेरिटेज ट्रस्ट के मोहम्मद शफ़ीउल्लाह के शब्दों में हैदराबाद 20वीं सदी में ज़्यादा अक़्लमंद था, बजाय 21वीं सदी के. 'अब हमारे पास सिर्फ सियासी लोग हैं, दूरदर्शी और कुशल नीति निर्माता नहीं.'
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज