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हर बार क्यों तबाही की वजह बन जाती है मुंबई की बारिश?

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Updated: September 8, 2019, 5:46 PM IST
हर बार क्यों तबाही की वजह बन जाती है मुंबई की बारिश?
अगले 24 घंटों में मुंबई में हो सकती है भारी बारिश.

इस साल मुंबई में भारी बारिश (Heavy Rains in Mumbai) का ये तीसरा दौर है यानी लगातार तीसरे महीने बारिश से तबाही (Rain Caused Havoc) हो रही है. जानें वो वजहें, जिनके चलते मुंबई में बारिश इतनी तबाही मचाती है.

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  • Last Updated: September 8, 2019, 5:46 PM IST
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पिछले दशक में 26 जुलाई 2005 (July 26 Floods) का दिन मुंबई में एक त्रासदी के तौर पर याद किया जाता है, जब एक हज़ार से ज़्यादा लोग भारी बारिश के बाद बाढ़ के हालात (Mumbai Floods) के चलते मारे गए थे. 2017 के अगस्त महीने में फिर मुंबई में भारी बारिश (Heavy Rains) के बाद बाढ़ के हालात बने और तब भी कई जानें गईं. इस साल फिर मुंबई में भारी बरसात से जानो-माल का नुकसान हो रहा है. जुलाई और अगस्त में बारिश के कहर के बाद सितंबर महीने में यह तीसरे दौर (Third Phase of Rains) की बाढ़ जैसी बारिश से जनजीवन फिर अस्त-व्यस्त हो रहा है. आखिर क्यों बार-बार मुंबई में बारिश जान की आफत बन रही है? आइए, कारणों की पड़ताल करें.

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ताज़ा खबर के मुताबिक भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अंदेशा जताया ​है कि मुंबई और आसपास के इलाकों (Mumbai Suburban Areas) में रविवार और सोमवार को भारी बारिश होगी. प्रशासन ने लोगों से घर में रहने की अपील की है क्योंकि सड़क, रेल (Railways) और हवाई मार्ग अवरुद्ध हो रहे हैं. मुंबई और ठाणे (Thane) के अलावा पालघर (Palghar) में भी अगले 24 घंटों में भारी बारिश होने का अनुमान है. दूसरी ओर सवाल वही है कि मुंबई में अब तक इस तरह की आपदा (Natural Disasters) से बचने के इंतज़ाम क्यों नहीं हो सके. जवाब टेढ़ा है क्योंकि इस आफत के पीछे एक नहीं ज़्यादा और ज़्यादा पेचीदा वजहें हैं.

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सबसे बड़ी वजह है पुराना ड्रेनेज सिस्टम
मुंबई में जो ड्रेनेज सिस्टम यानी व्यर्थ पानी निकासी का जो इंतज़ाम है, वो 20वीं सदी की शुरूआत में बना था और तबसे इसमें कोई बड़ा सुधार काम नहीं हुआ है. समय समय पर इसकी सफाई और दुरुस्तीकरण ही प्रशासन के लिए चुनौती बना रहा है. 2005 में जब मुंबई में बाढ़ के हालात बने थे, तब भी यही सिस्टम विलेन साबित हुआ था. जानकारी के मुताबिक इस सिस्टम की क्षमता करीब 25 मिलीमीटर पानी प्रति घंटे निकालने की है, जबकि भारी बारिश के समय ज़रूरत 993 मिलीमीटर प्रतिघंटे तक की हो जाती है. इसका अंजाम ये होता है कि जगह जगह पानी भर जाता है.

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बढ़ता प्रदूषण मुंबई के पुराने ड्रेनेज को लाचार कर देता है.

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ऐसा नहीं कि इस दिशा में प्रयास नहीं हुए. विशेषज्ञ संस्थाओं ने इस बारे में स्टडी करके एक प्रस्ताव तैयार किया था, जिसके क्रियान्वयन में करीब 12 साल का समय लगना था और खर्च 6 अरब रुपये के लगभग होना था, लेकिन तब बीएमसी ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था कि यह बहुत महंगा था.

उत्तरी मुंबई में ​बेतरतीब विकास
मुंबई में जल्दी जल्दी बाढ़ जैसे हालात बनने का दूसरा सबसे बड़ा कारण है उत्तरी मुंबई यानी बांद्रा और कुर्ला के आसपास के बड़े इलाकों में बेतरतीब विकास किया जाना. बताया जाता है कि यहां बड़े बड़े भवन बगैर उचित ड्रेनेज सिस्टम के बना दिए गए. बगैर सोची समझी प्लानिंग के हुए इस विकास के कारण यहां कई जगह पानी निकासी इंतज़ाम चोक हो जाते हैं. ये भी एक तथ्य है कि 1990 के दशक में ही भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को सूचित कर दिया गया था कि बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स को मंज़ूरी दिए जाने से भविष्य में त्रासदियां संभव हैं.

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क्लाइमेट चेंज
मुंबई में आफत की बारिश के पीछे क्लाइमेट चेंज के कारण मानसून के बदले तेवरों को भी कारण माना जा रहा है. 2017 में भी इस ​तरह की रिपोर्ट आई थी और ताज़ा हालात को लेकर भी मुंबई नगरपालिका के प्रमुख प्रवीण परदेशी ने भी यही थ्योरी दी है. एक स्टडी के हवाले से कहा जा चुका है कि क्लाइमेट चेंज के कारण अरब सागर से नमी भरी हवाओं का चलन बदला है, जिनके कारण मध्य भारत में भारी बारिश होने लगी है.

मैंग्रूव इकोसिस्टम की तबाही
न्यूज़18 ने कुछ ही रोज़ पहले इस वनस्पति से बनने वाले सुरक्षा कवच के बारे में आपको बताया था. मुंबई में भी बाढ़ जैसे हालात बनने के पीछे यह प्रमुख कारण माना जा रहा है कि यहां मैंग्रूव इकोसिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया गया है.

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मीठी नदी और माहिम की खाड़ी के इलाकों में मैंग्रूव के जंगल हुआ करते थे लेकिन बिल्डरों ने विकास की दौड़ में इनका विनाश किया. एक आकलन कहता है कि ज़मीन और समुद्र के बीच एक रक्षा कवच बनाने वाले मैंग्रूव के जंगलों का 40फीसदी हिस्सा 1995 से 2005 के बीच तहस नहस हुआ. कुछ बिल्डरों ने बर्बाद किया और कुछ पर अतिक्रमण करके झुग्गी बस्तियां बन गईं.

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आफत की बारिश के पीछे क्लाइमेट चेंज के कारण मानसून के बदले तेवरों को भी कारण माना जा रहा है. मुंबई में शनिवार को हुई बारिश के कारण बने हालात की तस्वीर.


प्रदूषण और बढ़ती आबादी
भारत की व्यापारिक राजधानी के नाम से मशहूर मुंबई में लगातार बढ़ती आबादी से पूरे सिस्टम पर दबाव बढ़ा है, इसमें दोराय नहीं है. कई तरह के सुधार कार्यों के न हो पाने की वजह भी यही दबाव रहा है. दूसरी ओर, प्रदूषण को लेकर जनसामान्य में जागरूकता नहीं है. सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरों की भरमार है, जिसमें नाले, नालियां और गलियां प्लास्टिक कचरे से पटी पड़ी हैं. भारी बारिश के समय यही कचरा ड्रेनेज सिस्टम को जाम करता है और पानी भर जाने की समस्या में इज़ाफा करता है.

इन तमाम कारणों के हवाले से ये आशंका भी जताई जाने लगी है कि अब मुंबई में अगर युद्धस्तर पर ड्रेनेज को लेकर काम नहीं हुआ तो, हर साल बारिश के मौसम में मुसीबत खड़ी होगी और मुंबई के सामने समस्या और विकराल होती जाएगी. जागरूक बनें, नागरिक के तौर पर जो ज़िम्मेदारी आपकी है, उसे ज़रूर निभाएं.

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First published: September 8, 2019, 5:46 PM IST
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