बारिश से आख़िर क्यों बार-बार मुंबई के सामने खड़ी होती है आफ़त?

पिछले 14 सालों में ये तीसरा मौका है, जब भारी बारिश के चलते कभी न रुकने वाली मुंबई में जानो-माल के नुकसान के साथ ही हर तरह का यातायात बाधित हो रहा है. जानें वो वजहें, जिनके चलते मुंबई में बारिश इतनी तबाही मचाती है.

News18Hindi
Updated: August 4, 2019, 8:05 PM IST
बारिश से आख़िर क्यों बार-बार मुंबई के सामने खड़ी होती है आफ़त?
अगले 24 घंटों में मुंबई में फिर हो सकती है भारी बारिश.
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Updated: August 4, 2019, 8:05 PM IST
पिछले दशक में 26 जुलाई 2005 का दिन मुंबई में एक त्रासदी के तौर पर याद किया जाता है, जब एक हज़ार से ज़्यादा लोग भारी बारिश के बाद बाढ़ के हालात के चलते मारे गए थे. 2017 के अगस्त महीने में फिर मुंबई में भारी बारिश के बाद बाढ़ के हालात बने और तब भी कई जानें गईं. इस साल फिर मुंबई में भारी बरसात से जानो-माल का नुकसान हो रहा है. जुलाई में मुंबई में बारिश से जानो-माल के नुकसान के बाद अब अगस्त में फिर बारिश का कहर जारी है. आखिर क्यों बार-बार मुंबई में बारिश जान की आफत बन रही है? आइए, कारणों की पड़ताल करें.

पढ़ें : मुंबई में भारी बारिश का कहर जारी, रेल और विमान सेवाएं प्रभावित

ताज़ा खबर के मुताबिक मुंबई में रविवार को लगातार दूसरे दिन भारी बारिश जारी रही और मौसम विज्ञान विभाग ने दिन में भी लोगों को बारिश से कोई राहत न मिलने का पूर्वानुमान लगाया है. इसी बीच, मुंबई और निकटवर्ती ज़िलों में विमान सेवाएं और रेल यातायात के प्रभावित होने की भी खबरें हैं. दूसरी ओर, राहत कार्य जारी हैं, लेकिन सवाल वहीं खड़ा है कि मुंबई में अब तक इस तरह की आपदा से बचने के इंतज़ाम क्यों नहीं हो सके. जवाब इसलिए टेढ़ा है क्योंकि इस आफत के पीछे एक नहीं कुछ ज़्यादा और ज़्यादा पेचीदा वजहें हैं.

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सबसे बड़ी वजह है पुराना ड्रेनेज सिस्टम
मुंबई में जो ड्रेनेज सिस्टम यानी व्यर्थ पानी निकासी का जो इंतज़ाम है, वो 20वीं सदी की शुरूआत में बना था और तबसे इसमें कोई बड़ा सुधार काम नहीं हुआ है. समय समय पर इसकी सफाई और दुरुस्तीकरण ही प्रशासन के लिए चुनौती बना रहा है. 2005 में जब मुंबई में बाढ़ के हालात बने थे, तब भी यही सिस्टम विलेन साबित हुआ था. जानकारी के मुताबिक इस सिस्टम की क्षमता करीब 25 मिलीमीटर पानी प्रति घंटे निकालने की है, जबकि भारी बारिश के समय ज़रूरत 993 मिलीमीटर प्रतिघंटे तक की हो जाती है. इसका अंजाम ये होता है कि जगह जगह पानी भर जाता है.

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बढ़ता प्रदूषण मुंबई के पुराने ड्रेनेज को लाचार कर देता है.

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ऐसा नहीं कि इस दिशा में प्रयास नहीं हुए. विशेषज्ञ संस्थाओं ने इस बारे में स्टडी करके एक प्रस्ताव तैयार किया था, जिसके क्रियान्वयन में करीब 12 साल का समय लगना था और खर्च 6 अरब रुपये के लगभग होना था, लेकिन तब बीएमसी ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था कि यह बहुत महंगा था.

उत्तरी मुंबई में ​बेतरतीब विकास
मुंबई में जल्दी जल्दी बाढ़ जैसे हालात बनने का दूसरा सबसे बड़ा कारण है उत्तरी मुंबई यानी बांद्रा और कुर्ला के आसपास के बड़े इलाकों में बेतरतीब विकास किया जाना. बताया जाता है कि यहां बड़े बड़े भवन बगैर उचित ड्रेनेज सिस्टम के बना दिए गए. बगैर सोची समझी प्लानिंग के हुए इस विकास के कारण यहां कई जगह पानी निकासी इंतज़ाम चोक हो जाते हैं. ये भी एक तथ्य है कि 1990 के दशक में ही भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को सूचित कर दिया गया था कि बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स को मंज़ूरी दिए जाने से भविष्य में त्रासदियां संभव हैं.

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क्लाइमेट चेंज
मुंबई में आफत की बारिश के पीछे क्लाइमेट चेंज के कारण मानसून के बदले तेवरों को भी कारण माना जा रहा है. 2017 में भी इस ​तरह की रिपोर्ट आई थी और ताज़ा हालात को लेकर भी मुंबई नगरपालिका के प्रमुख प्रवीण परदेशी ने भी यही थ्योरी दी है. एक स्टडी के हवाले से कहा जा चुका है कि क्लाइमेट चेंज के कारण अरब सागर से नमी भरी हवाओं का चलन बदला है, जिनके कारण मध्य भारत में भारी बारिश होने लगी है.

मैंग्रूव इकोसिस्टम की तबाही
न्यूज़18 ने कुछ ही रोज़ पहले इस वनस्पति से बनने वाले सुरक्षा कवच के बारे में आपको बताया था. मुंबई में भी बाढ़ जैसे हालात बनने के पीछे यह प्रमुख कारण माना जा रहा है कि यहां मैंग्रूव इकोसिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया गया है.

पढ़ें : ये हैं मैंग्रूव, जानें ये फानी जैसे तूफानों से हमें कैसे बचाते हैं

मीठी नदी और माहिम की खाड़ी के इलाकों में मैंग्रूव के जंगल हुआ करते थे लेकिन बिल्डरों ने विकास की दौड़ में इनका विनाश किया. एक आकलन कहता है कि ज़मीन और समुद्र के बीच एक रक्षा कवच बनाने वाले मैंग्रूव के जंगलों का 40फीसदी हिस्सा 1995 से 2005 के बीच तहस नहस हुआ. कुछ बिल्डरों ने बर्बाद किया और कुछ पर अतिक्रमण करके झुग्गी बस्तियां बन गईं.

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आफत की बारिश के पीछे क्लाइमेट चेंज के कारण मानसून के बदले तेवरों को भी कारण माना जा रहा है.


प्रदूषण और बढ़ती आबादी
भारत की व्यापारिक राजधानी के नाम से मशहूर मुंबई में लगातार बढ़ती आबादी से पूरे सिस्टम पर दबाव बढ़ा है, इसमें दोराय नहीं है. कई तरह के सुधार कार्यों के न हो पाने की वजह भी यही दबाव रहा है. दूसरी ओर, प्रदूषण को लेकर जनसामान्य में जागरूकता नहीं है. सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरों की भरमार है, जिसमें नाले, नालियां और गलियां प्लास्टिक कचरे से पटी पड़ी हैं. भारी बारिश के समय यही कचरा ड्रेनेज सिस्टम को जाम करता है और पानी भर जाने की समस्या में इज़ाफा करता है.

इन तमाम कारणों के हवाले से ये आशंका भी जताई जाने लगी है कि अब मुंबई में अगर युद्धस्तर पर ड्रेनेज को लेकर काम नहीं हुआ तो, हर साल बारिश के मौसम में मुसीबत खड़ी होगी और मुंबई के सामने समस्या और विकराल होती जाएगी. जागरूक बनें, नागरिक के तौर पर जो ज़िम्मेदारी आपकी है, उसे ज़रूर निभाएं.

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First published: August 4, 2019, 2:30 PM IST
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