संसद में कैसे होती है मार्शल की नियुक्ति, क्या होता है इनका काम?

यूनिफॉर्म बदले जाने को लेकर मार्शल चर्चा में आए थे.
यूनिफॉर्म बदले जाने को लेकर मार्शल चर्चा में आए थे.

मीरा कुमार (Meira Kumar) के सभापति रहते हुए मार्शल उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उनकी यूनिफॉर्म (Uniform of Marshal) बदलकर सेना से मिलती जुलती कर दी गई थी, लेकिन इन्हें फिर पारंपरिक पगड़ी वाली वेशभूषा मिल चुकी. हाल में सांसदों के हंगामे (Monsoon Session of Parliament) के चलते अपने रोल को लेकर मार्शल फिर चर्चा में हैं.

  • News18India
  • Last Updated: September 22, 2020, 2:40 PM IST
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जब संसद का सत्र (Parliament Session) चल रहा होता है तो एक मार्शल का दिन सुबह 9 बजे से शुरू होता है ​और सामान्य तौर पर शाम 5 बजे खत्म. हर वक्त स्पीकर (Speaker or Chairman) के इर्द गिर्द रहते हुए मार्शल संसद में औपचारिक नोट्स भी देते हैं और खास मौकों पर गेस्ट ऑफ ऑनर (Guest of Honour) का एस्कॉर्ट करने का काम भी इनका होता है. सत्ता के इतने करीब रहते हुए अक्सर विनम्र रहने वाले ये मार्शल लाइमलाइट से दूर रहते हैं. संसद के स्टेज पर होते हुए भी ये अपना काम बखूबी करते हैं, फिर भी इन्हें कम ही लोग जानते हैं.

जी हां, अपनी पहचान को बहुत गोपनीय रखना और ज़्यादा सार्वजनिक जीवन से परहेज़ करना इनकी ड्यूटी का हिस्सा होता है. अगर आप किसी मार्शल से मिलेंगे और आप संसद के सदस्य या कर्मचारी नहीं हैं तो वह मार्शल अपना नाम व उम्र जैसे डिटेल्स तक भी आपको नहीं बताएगा. बेशक, यह एक सम्मानजनक और बेहद ज़िम्मेदारी का काम है. मार्शल के रोल के बारे में आपको बताते हैं और फिर ये भी कि कोई कैसे इस पद तक पहुंचता है.

अहम है संसद में मार्शल का रोल
संसद में मार्शल का तकरीबन पूरा समय स्पीकर या स्पीकर की चेयर के इर्द गिर्द बीतता है. स्पीकर को सहयोग और परामर्श देना होता है. किसी मीटिंग या कार्यक्रम के समय स्पीकर की भेंट करवाने या बातचीत करवाने में मार्शल की भूमिका होती है. मार्शल के कामों को कुछ बिंदुओं में सरलता से समझिए.
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मार्शल तब विवादों में घिरे थे, जब वो यूनिफॉर्म में शामिल कैप के बगैर दिखे थे. (File Photo)




* संसद भवन के मुख्य द्वार से लेकर चेंबर तक सभापति के साथ रहना. चेंबर के अलावा सभापति जहां भी जाना चाहे, उसके साथ रहना. संसद भवन में आगमन से प्रस्थान तक सभापति के साथ हर वक्त रहना मार्शल का प्रमुख काम है.
* 'माननीय सभासदों, माननीय सभापति..' यह सुनिश्चित करते हुए कि सदन का कोरम पूरा हो गया है, मार्शल सभापति के सदन में आगमन की घोषणा और सदन की कार्यवाही सुनिश्चित करने का काम करता है.

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* सभापति की सुरक्षा मार्शल की ज़िम्मेदारी होती है, इसलिए किसी स्थिति में मार्शल अपनी मर्ज़ी से एक्शन लेकर सभापति की रक्षा कर सकता है.
* ​प्रश्नकाल के दौरान मार्शल स्पीकर या चेयरमैन को यह सूचना देते हैं कि प्रश्नों की सूची में जिनका नाम है, उनमें से कौन से सदस्य हाज़िर और गैर ​हाज़िर हैं.
* जो सदस्य प्रतिप्रश्न करना चाहते हैं, उनके बारे में भी मार्शल स्पीकर को इशारा देते हैं.
* सदन में मतभेद की स्थिति में, निर्देश पर मार्शल कोरम बेल या लॉबी को खाली करवाते हैं. वोटिंग कार्यवाही पूरी होने के बाद मार्शल चेयर की अनुमति से लॉबी के गेट खुलवाते हैं.

मार्शल के कामों के बारे में और रोचक फैक्ट्स
545 नामों को याद रखना ही अपने आप में मुश्किल है. लेकिन मार्शल संसद का सत्र शुरू होने के पहले अपने दिमाग में संसद के तमाम सदस्यों के नाम और पहचान को कैद करते हैं ताकि ज़रूरत पड़ने पर वो तुरंत चेयर को किसी भी सदस्य के बारे में चाही गई जानकारी दे सकें. इसके लिए मार्शल रात दिन तमाम डिटेल्स को रटकर अपनी याददाश्त का हिस्सा बनाते हैं.

संसद में 'बैकरूम बॉएज़' कहे जाने वाले मार्शलों को किसी अभद्रता या अशिष्टता या आक्रामकता की स्थिति में सांसदों को संभालना और उन्हें बाहर भी निकलवाना पड़ता है. सांसदों को बाहर निकलवाते हुए भी मार्शलों को अभद्र बर्ताव नहीं बल्कि सम्मान के साथ अपना काम करना पड़ता है. अब जानिए कि कोई व्यक्ति मार्शल के पद तक पहुंचता कैसे हैं.

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कैसे होती है मार्शल की नियुक्ति?
मार्शल के पद पर नियुक्ति पाने के लिए सुरक्षा विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर ग्रेड पर कम से कम तीन सालों का अनुभव लाज़िमी है. या​ फिर असिस्टेंट डायरेक्टर और सिक्योरिटी अफसर के रूप में कुल मिलाकर 5 साल का अनुभव. अगर ऐसा कैंडिडेट न मिले तो इस पद पर नियुक्ति के लिए किसी ऐसे उम्मीदवार को चुना जाता है, जिसे ग्रुप ‘A’ पोस्ट पर 9 साल का कम से कम अनुभव हो.

मिनिमम 5 साल के अनुभव वाले सीनियर सिक्योरिटी असिस्टेंट ग्रेड कर्मियों या ग्रेड 1 के सिक्योरिटी असिस्टेंट और सीनियर असिस्टेंट ग्रेड पर कुल मिलाकर 10 साल के अनुभव वाले कर्मियों को भी वरीयता के आधार पर चुना जा सकता है. सिक्योरिटी विभाग में नियुक्त कर्मचारी पदोन्नत होकर भी इस पद तक पहुंच सकता है.

तो अगली बार जब आप संसद की कार्यवाही टीवी पर देखें, तो स्पीकर या चेयरमैन के पास खड़े दो लंबे और तगड़े व्यक्तियों को देखिएगा. जो चेयर के बाएं होगा, वह मार्शल है और दाएं डिप्टी मार्शल. उत्पाती सांसदों को संभालना भर ही नहीं बल्कि मार्शल का काम सदन की कार्यवाही को ठीक तरह से चलाना होता है. इसके लिए जब मार्शल पद पर नियुक्ति होती है, तब उम्मीदवारों में संसद के नियमों और कार्यवाहियों की गहरी समझ को बारीकी से परखा जाता है.
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