देश भर में कोविड से क्यों गई सैकड़ों डॉक्टरों की जान? रिसर्च में हुआ खुलासा

कोरोना के खिलाफ हेल्थकेयर संबंधी प्रतीकात्मक तस्वीर.
कोरोना के खिलाफ हेल्थकेयर संबंधी प्रतीकात्मक तस्वीर.

एक रिसर्च (Research Paper) में यह बात सामने आई कि हेल्थकेयर सेक्टर (Healthcare) में कोरोना संक्रमण और मौतों की दर आम लोगों की Covid-19 मृत्यु दर (Death Rate) से कई गुना ज़्यादा और कई देशों के मुकाबले भारत में भी यह दर चिंताजनक क्यों रही.

  • News18India
  • Last Updated: October 4, 2020, 11:52 AM IST
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अमेरिका (US) के बाद दुनिया में सबसे ज़्यादा कोरोना पॉज़िटिव (Corona Positive) केसों के मामले में भारत के सबसे आगे होने की खबरों से पहले ये भी खबरें रही थीं कि संसद (Parliament) में सरकार यह आंकड़ा नहीं दे सकी कि कोविड 19 महामारी से कितने डॉक्टरों (Doctors' Death due to Covid-19) और मेडिकल स्टाफ की मौत हुई. हेल्थकेयर के मामले में लगातार चर्चा में बने हुए भारत के लिए अब ताज़ा खबर यह है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की बड़ी संख्या में मौतों के कारण तलाशने वाली एक स्टडी (Study) हुई है, जिसमें बताया गया है कि कैसे बदइंतज़ामी जानलेवा साबित हुई.

TISB बेंगलूरु की आनंदिता कपूर और मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल और लंदन यूनिवर्सिटी में सेवाएं देने वाले डॉक्टर कृष्ण मोहन कपूर का एक रिसर्च पेपर 'भारत में Covid-19 से डॉक्टरों की मौतों' पर केंद्रित प्रकाशित हुआ है, जिसमें कई कारणों की चर्चा की गई है. इस रिसर्च के हवाले से जानिए कि क्या स्थितियां रहीं.

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कोविड से डॉक्टरों की मौतों के मामले में जनरल प्रैक्टिशनरों की संख्या सबसे ज़्यादा देखी गई. इसी स्टडी के अनुसार अगर 225 जनरल प्रैक्टिनशरों, 26 बाल रोग विशेषज्ञों, 22 सामान्य सर्जनों, 16 प्रसवकर्मियों व गाइनेक और 14 एनीस्थीसियोलॉजिस्ट की मौतें होना पाया गया. ये डॉक्टरों के क्षेत्र के हिसाब से सबसे ज़्यादा मौतों का आंकड़ा है.
डॉक्टरों की मौतों के आंकड़े
हालांकि संसद में सरकार इस बारे में डेटा मुहैया नहीं करवा सकी, लेकिन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इस डेटा का रिकॉर्ड रखा. आईएमए की तरह ही कपूर की रिसर्च में भी माना गया कि 10 सितंबर तक देश भर में 2174 डॉक्टर संक्रमित हुए और इनमें से 382 कम से कम मारे गए. मृत्यु दर 16.7 फीसदी रही. देश में आम आबादी में कोविड संबंधी मृत्यु दर सिर्फ 1.7 फीसदी रही, जो डॉक्टरों की तुलना में काफी कम है.

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न्यूज़18 क्रिएटिव.


कोविड 19 से सबसे ज़्यादा डॉक्टर तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में मारे गए. मारे गए डॉक्टरों की औसत उम्र 60 साल दर्ज की गई. आईएमए के डेटा पर आधारित रिसर्च पेपर में कहा गया कि जनरल प्रैक्टिनशर और 60 साल से ज़्यादा उम्र के डॉक्टरों के सामने कोविड संबंधी मृत्यु का जोखिम ज़्यादा देखा गया. डॉक्टरों की मौतों के पीछे कई कारण रिसर्च पेपर में बताए गए.

डॉक्टरों के लिए जानलेवा क्यों हुआ कोविड?
भारत में कोविड से डॉक्टरों के मारे जाने के आंकड़े को चिंताजनक बताते हुए रिसर्च पेपर में कहा गया कि देश में कई कारणों से डॉक्टरों की जान कोरोना से गई. इन कारणों पर एक नज़र डालें.

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* पर्याप्त पीपीई किटों का न होना
* पीपीई किटों को सही ढंग से पहनने और उतारने की तकनीक पता न होना
* मरीज़ों का कोविड 19 संक्रमण के एक्सपोज़र संबंधी जानकारी छुपाना
* डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों का लगातार घंटों तक काम करना
* मरीज़ों और डॉक्टरों के बीच अनुपात बेहद कम और कमज़ोर होना
* संक्रमितों के इलाज के दौरान डॉक्टरों का मरीज़ों के सीधे और करीबी संपर्क में आना
* मरीज़ों के शरीर से निकलने वाले द्रवों या स्राव के संपर्क में आना

इनके अलावा, एयरवे पर सक्शन, ​कार्डियोपल्मोनरी पुनर्जीवन और अन्य कमज़ोर हेल्थकेयर इंतज़ामों के चलते डॉक्टरों में कोरोना संक्रमण और मौतों का खतरा देखा गया.

रिसर्च ने क्या दीं हिदायतें?
रिसर्चरों के मुताबिक फ्रंटलाइन हेल्थकेयर कर्मचारियों और डॉक्टरों को सभी सावधानियां और नियम अपनाने चाहिए और ठीक तरह से फिट मास्क ज़रूर पहनने चाहिए. रिसर्च में हिदायत दी गई कि देश भर में पीपीई को लेकर एक जैसी नीति होना चाहिए और ठीक प्रशिक्षण भी. ये भी कहा गया कि टेलिमेडिसिन यानी मरीज़ों को वीडियो या ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये दवाएं मुहैया कराने के विकल्प से बेहतर नतीजे मिले.
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