जब कांग्रेस के सारे मंत्रियों ने दिया था इस्तीफा, पहली बार उछला था 'कांग्रेस मुक्त भारत' नारा

राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद मिलिंद देवड़ा और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के इस्तीफे देने का सिलसिला जारी है. ऐसे में प​ढ़ें वो कहानी, जब कांग्रेस की सभी प्रांतीय सरकारों ने इस्तीफा दे दिया था.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: July 7, 2019, 8:47 PM IST
जब कांग्रेस के सारे मंत्रियों ने दिया था इस्तीफा, पहली बार उछला था 'कांग्रेस मुक्त भारत' नारा
कांग्रेस में दिग्गज नेता दे रहे हैं इस्तीफे.
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: July 7, 2019, 8:47 PM IST
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के कई दिग्गज नेता इस्तीफे दे रहे हैं. कहा जा रहा है कि कांग्रेस के इतिहास में कभी ऐसा दौर नहीं आया, ये पहली बार हो रहा है. इसी बीच, इतिहास की परतों से एक अनसुनी कहानी जानें. भारत सरकार एक्ट 1935 के तहत 1936-37 की सर्दियों में गुलाम भारत में क्षेत्रीय चुनाव हुए थे, तब कांग्रेस ने बाज़ी मारी थी. लेकिन कांग्रेस की ये सरकारें देश में ज़्यादा लंबे वक्त तक नहीं चल सकी थीं क्योंकि 1939 यानी दो साल में ही ऐसी नौबत आ गई कि कांग्रेस के सभी मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था. जानिए क्या है पूरी कहानी?

देश में स्वराज की मांग उठी थी, तब अंग्रेज़ों ने आंशिक रूप से भारत के लोगों को अपनी सरकार चुनने की एक व्यवस्था बनाई थी. इसे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की शुरूआत के तौर पर भी देखा जा सकता है. मद्रास, मध्य प्रांत, बिहार, उड़ीसा, संयुक्त प्रांत, बॉम्बे प्रेसिडेंसी, असम, एनडब्ल्यूएफपी, बंगाल, पंजाब और सिंध, कुल 11 क्षेत्रों में हुए चुनाव के नतीजे 1937 के फरवरी महीने में घोषित किए गए थे.

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इन चुनावों में विजेता घोषित की गई क्योंकि 11 में से 8 क्षेत्रों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की. बंगाल, पंजाब और सिंध में कांग्रेस हारी थी, जबकि अखिल भारतीय मुस्लिम लीग किसी प्रांत में न जीत पाने के कारण कहीं भी सरकार नहीं बना सकी. फिर दो सालों में क्या हुआ था कि कांग्रेस के सभी मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा? इस सवाल के जवाब से पहले ये जानें कि ये चुनाव कैसे हुए और क्या हालात बने.

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महात्मा गांधी के साथ पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू व प्रथम गृह मंत्री सरदार पटेल.


3 करोड़ लोगों ने दिया था वोट
भारतीय सरकार एक्ट 1935 के तहत करीब 3 करोड़ लोगों को वोटिंग का अधिकार मिला था, जिसमें कुछ महिलाएं भी शामिल थीं. ये संख्या उस वक्त भारत में वयस्कों की कुल आबादी की छठा हिस्सा थी. इस एक्ट के तहत वोटिंग का अधिकार दिए जाने का आधार संपत्ति को बनाया गया था. यानी, जिनके पास ज़मीन थी या पूंजी थी वही वोट दे सके थे. इसके चलते केवल अमीर और ग्रामीण क्षेत्रों के भी अमीर किसान ही वोट दे सके थे.
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फिर शुरू हुआ था दूसरा विश्वयुद्ध
1939 में दूसरे विश्वयुद्ध की शुरूआत के हालात बन गए थे. भारत में वायसराय लिनलिथगो ने 3 सिंतबर 1939 को घोषणा की कि जर्मनी के साथ युद्ध में भारत कूदेगा. कांग्रेस ने इस घोषणा का ज़बरदस्त विरोध किया. कांग्रेस के नेताओं का एक गुस्सा ये था कि भारत के लोगों से सलाह मशविरा किए बगैर उन्हें युद्ध में झोंका गया और दूसरा गुस्सा ये था कि अंग्रेज़ी सरकार भारत में चुनाव करवाकर प्रांतीय सरकारें भी बना रही है और एक तरह से इन्हें महत्वहीन समझ रही है.

इस लड़ाई में बने दो ध्रुव यानी कांग्रेस बनाम लीग
अंग्रेज़ों ने कांग्रेस का गुस्सा शांत करने के लिए ये भरोसा दिलाया कि विश्वयुद्ध खत्म होते ही भारत को आज़ाद कर दिया जाएगा. इस पर मुस्लिम लीग ने ब्रिटिशों को सहयोग देने की बात की लेकिन साथ ही, मुस्लिमों के लिए सुरक्षा और अधिकार भी मांगे. उधर, कांग्रेस सरकार ने अंग्रेज़ों से कोई भी संतोषजनक उत्तर न मिलने पर सीधी मुठभेड़ का मन बनाया. कांग्रेस की नाराज़गी पर लि​नलिथगो ने कहा कि वो केवल एक परामर्श समिति बना सकते हैं, जो सिर्फ परामर्श दे सकेगी. कुल मिलाकर, अंग्रेज़ों ने कांग्रेस को किसी भी किस्म के अधिकार देने की मांग को खारिज कर दिया.

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जिन्ना ने पहली बार 'कांग्रेस मुक्त भारत' जैसी शब्दावली का प्रयोग किया था.


कांग्रेस के रवैये से नाराज़ थे गांधी
प्रांतों में सरकार बनने के बाद कांग्रेस के नेताओं के मिज़ाज बदलने को लेकर महात्मा गांधी ने ऐतराज़ जताया था. ऐतिहासिक दस्तावेज़ और इतिहासकारों की किताबों के हवाले से पता चलता है कि कांग्रेस के नेता अंग्रेज़ों के पिट्ठू की तरह खुद को साम्राज्यवादी ताकत का हिस्सा समझने का दृष्टिकोण रखने लगे थे. ऐसे में महात्मा गांधी ने बॉम्बे प्रेसिडेंसी के मुख्यमंत्री को कड़ा पत्र भी लिखा था. इन हालात में, महात्मा गांधी ने कांग्रेस को अंग्रेज़ों के खिलाफ होने का संदेश दिया था.

और कांग्रेस ने दिया सामूहिक इस्तीफा
विश्वयुद्ध में जबरन धकेले जाने को कारण बताते हुए कांग्रेस ने सामूहिक इस्तीफा देने का मन बनाया और वायसराय के खिलाफ जाकर कांग्रेस के सभी प्रांतों के मंत्रियों ने 22 अक्टूबर 1939 को इस्तीफा दे डाला. कांग्रेस के इस कदम से लिनलिथगो और मुस्लिम लीग के नेता जिन्ना को खुशी ही हुई. 2 दिसंबर 1939 को जिन्ना ने कांग्रेस के इस कदम को भारत को कांग्रेस से छुटकारा मिलना माना और अपील जारी करते हुए कहा कि भारतीय मुस्लिम 22 दिसंबर का दिन 'मुक्ति दिवस' के रूप में मनाएं.

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First published: July 7, 2019, 7:41 PM IST
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