भारतीय साहस की चोटी रहे रेजांग ला को जानें, जहां चीन ने किया ब्लफ

भारतीय साहस की चोटी रहे रेजांग ला को जानें, जहां चीन ने किया ब्लफ
लद्दाख में भारतीय सैनिक. (फाइल फोटो)

भारत और चीन के बीच उच्च स्तरीय वार्ताओं (India-China Talks) में भारत ने साफ तौर पर कहा है कि चीन ने लद्दाख में सीमा पर तनाव (India-China Border Tension) के बीच रेजांग ला पास पर छल कपट की कोशिश की. जानिए कि इस पॉइंट की सामरिक अ​हमियत कितनी है और 1962 के चीन युद्ध (India-China War) के इतिहास में इस लोकेशन पर कितनी बड़ी लड़ाई लड़ी गई थी.

  • News18India
  • Last Updated: September 7, 2020, 10:19 AM IST
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अगस्त के आखिरी दिनों के चीन ने लद्दाख में चुशूल (Chushul in Ladakh) के पास वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के भारतीय हिस्से में जिस तरह धोखे से घुसपैठ की नाकाम कोशिश की, उसे लेकर दोनों देशों के बीच तनाव (Tension Between India and China) बना हुआ है और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत (Diplomacy) जारी है. ताज़ा खबरों के मुताबिक चुशूल सेक्टर में जिस पॉइंट पर दोनों सेनाएं 29 व 30 अगस्त की रात उलझी थीं, वह रेज़ांग ला टापू (Rezang-La-Ridge Line) के पास का इलाका था. यह इलाका पिछले युद्ध में भारत का गौरव रह चुका है.

पिछले तीन महीनों से भी ज़्यादा समय से लद्दाख में भारत चीन सीमा पर तनाव के हालात बने हुए हैं. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की वेस्टर्न कमांड इस इलाके में आक्रामक बनी हुई है जबकि भारतीय सेना ने भी यहां अपनी स्थिति मज़बूत की है. इन हालात के मद्देनज़र रेज़ांग ला के बारे में जानिए, जहां चीन के ब्लफ के बाद स्थिति नाज़ुक बनी हुई है.

रेज़ांग ला की लोकेशन
वा​स्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थित रेज़ांग ला एक पहाड़ी दर्रा है, जो भारतीय हिस्से के लद्दाख में स्थित है, लेकिन चीन साज़िशन इस पर अपना दावा पेश करता रहा है. रुटॉग काउंटी में स्पंगुर झील के बेसिन में स्थित इस हिस्से पर भारत का दावा मज़बूत रहा है. स्पंगुर गैप से यह दक्षिण की तरफ 11 मील पर यह दर्रा है. समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 18 हज़ार फीट है और यहां रेज़ांग लुंगपा धारा का स्रोत भी है.
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गुरुग्राम के कार्टरपुरी में रेज़ांग ला युद्ध की ​याद में एक चौक स्थित है.




रेज़ांग ला की रणनीतिक अ​हमियत
मई के महीने से ही भारत और चीन की सेनाएं लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील के आसपास के इलाके में उलझ रही थीं. इस तनाव का हालिया पाइंट रेज़ांग ला बन गया है, जो चीन के लिए घुसपैठ के लिहाज़ से इसलिए अहम है क्योंकि यहां से चीन को लेह के लिए रास्ता मिलता है. वहीं, भारत को रेज़ांग ला से झील के उत्तरी किनारे तक साफ व्यू मिलता है इसलिए यह भारत का अहम मोर्चा है.

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चूंकि यह काफी ऊंचाई वाली लोकेशन है इसलिए यहां भारत को फायदा है. इसी कारण चीनी सेना की नज़र इस इलाके पर पोस्ट बना लेने की रही है. इस दर्रे से भारत स्पंगुर गैप, झील के साथ ही चीन के मोल्डो गैरिसन इलाके पर निगरानी रख पाता है. अब ये भी अहम है कि अगर युद्ध होता है तो चीन के भारत में घुस पाने के जो 13 संभावित रास्ते चिह्नित किए जा चुके हैं, उनमें से एक रेकिन ला है, जो रेज़ांग ला के पास ही है.

अगर युद्ध हुआ तो..!
युद्ध की स्थिति में गलवान घाटी से लेकर पैंगोंग त्सो तक, दरपूक श्योक दौलत बेग ओल्डी यानी DSDBO रोड काफी अहम साबित होगी, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक रेज़ांग ला और रेकिन ला पर जो भारत की बढ़त वाली स्थिति है, वह चुशूल और स्पंगुर इलाके में चीनी मंसूबों को नाकाम करने में बड़ा प्लस पॉइंट होगी. इसके बावजूद भारत को सुरक्षा के लिहाज़ से यहां काफी सतर्क रहने की ज़रूरत है.

भारत के कब्ज़े में मानी जाने वाली ब्लैक टॉप और हेलमेट टॉप पहाड़ियां चुशूल के व्यू में बाधा बनती हैं. इसका मतलब यह है कि चीनी सेना मोल्डो गैरिसन से भारत की तरफ बढ़ती है तो उसे इस रूट की ऊंचाई से मदद मिल सकती है.

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लद्दाख स्थित रेज़ांग ला स्मारक. (चित्र विकिमीडिया कॉमन्स से साभार)


रेज़ांग ला का यादगार युद्ध
1962 में हुए भारत चीन युद्ध के समय इसी रेज़ांग ला पर भारत ने अपने युद्ध इतिहास की सबसे साहसिक लड़ाई लड़ी थी. मेजर शैतान सिंह ने इस दर्रे पर 18 नवंबर 1962 को इतिहास रचा था. कुमाऊं रेजिमेंट की सी कंपनी यहां तीन प्लाटून पोज़ीशनों पर तैनात थी. भारतीय सेना का शस्त्रागार चूंकि एक पहाड़ी दूर था इसलिए इस कंपनी को गोला बारूद की कमी के साथ लड़ाई लड़ना पड़ी थी.

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उस समय यह अंदेशा था कि नदी के सूखे हिस्से से चीनी सेना आकर हमला करेगी. यही हुआ और भारतीय सेना ने मशीन गन से ज़बरदस्त फायरिंग कर चीनी सेना को खदेड़ा. लेकिन चीनी सेना फिर बड़ी तादाद में यहां पहुंचकर हमला करने लगी. तब मेजर शैतान सिंह ने कई ज़ख्मों के बावजूद एक पोस्ट से दूसरी और दूसरी से तीसरी पर जाकर सैनिकों में लड़ने का जज़्बा जगाया और खुद भी बेहतरीन लड़ाई लड़ी.

सी कंपनी के 120 जवानों में से 114 शहीद हुए, जो 6 बचे थे, उनमें से 5 घायल हालत में चीनी सेना द्वारा बंधक बना लिये गए थे. रेवाड़ी में रेज़ांग ला युद्ध की याद में बने स्मारक पर लिखा है कि 1300 चीनी सैनिकों को इन वीरों ने मार गिराया था. इस युद्ध में साहस के लिए शैतान सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाज़ा गया था.
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