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वो वैज्ञानिक जो कुछ दिनों में हो जाएगा 'आधा इंसान आधा रोबोट'

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: October 17, 2019, 6:04 PM IST
वो वैज्ञानिक जो कुछ दिनों में हो जाएगा 'आधा इंसान आधा रोबोट'
पीटर का रोबोटिक अवतार

13.8 अरब सालों के इतिहास में पहली बार कोई इंसान सबसे ज़्यादा एडवांस्ड रोबोट (Advanced Robot) बनने जा रहा है. ये सब कैसे और क्यों हो रहा है? कहानी चौंकाएगी.

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  • Last Updated: October 17, 2019, 6:04 PM IST
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'पीटर 1.0 के तौर पर यह मेरी लास्ट पोस्ट है... मैं मर नहीं रहा, पूरी तरह बदल रहा हूं. ओह! विज्ञान (Science) से मुझे कितना प्यार है.' ब्रिटेन के वैज्ञानिक (Robotics Expert) पीटर स्कॉट मॉर्गन (Peter Scott Morgan) दुनिया और मानव इतिहास के पहले पूरे सायबोर्ग (Cyborg) बनने जा रहे हैं. यानी वह मनुष्य से पूरी तरह रोबोट (Robot) बनने की तरफ हैं. यह बात चौंकाने वाली ज़रूर लगती है लेकिन यह सच होने जा रहा है. एक जानलेवा बीमारी से जूझने वाले पीटर की मानें तो उन्होंने विज्ञान की मदद से अपनी ज़िंदगी बढ़ाने के लिए पूरे रोबोट में तब्दील होने का फैसला किया, जिसे वह पीटर 2.0 कह रहे हैं.

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) की दुनिया में यह घटना वाकई एक इतिहास के तौर पर दर्ज की जाने वाली है. एक वैज्ञानिक तकनीकी तौर पर मरने के बाद एक रोबोट के तौर पर ज़िंदा रहेगा यानी कहा जा सकता है कि वह आधा इंसान और आधा रोबोट होगा. यह सब कैसे मुमकिन हो रहा है? सायबोर्ग क्या है और पीटर मोटर न्यूरॉन (Motor Neuron) नामक जिस जानलेवा बीमारी के शिकार रहे, वह क्या है? विज्ञान और तकनीक के साथ जुड़ी मानवीय जज़्बे की एक चौंकाती कहानी.

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क्यों पीटर बनने जा रहे हैं सायबोर्ग?
61 वर्षीय पीटर के हवाले से दुनिया भर में खबरें हैं कि वह दो साल पहले मोटर न्यूरॉन यानी एमएनडी या एएलस नाम की बीमारी के शिकार हो गए थे. इसके बाद उनके बचने की कोई सूरत नहीं थी. उन्होंने मौत स्वीकार करने के बजाय इसे चुनौती के तौर पर कबूल करना चाहा और खुद को एक पूरे रोबोट में बदलने का फैसला किया. विज्ञान और अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से उन्होंने अपने इस फैसले को साकार करने की राह पकड़ी.

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इंटेल और अन्य कंपनियों की उस टीम के साथ व्हील चेयर पर पीटर, जिन्होंने स्टीफन हॉकिंग्स के लिए भी काम किया था.

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कितने बदल चुके हैं पीटर?
पीटर को पूरे रोबोट में बदलने के लिए डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने कई तरह की सर्जरी की हैं. उनके शरीर के फूड पाइप को सीधे पेट से, कैथेटर को ब्लैडर से जोड़ने के साथ ही एक वेस्ट बैग भी जोड़ा गया है ताकि मल मूत्र साफ हो सके. चेहरे को रोबोटिक बनाने वाली सर्जरी की जा चुकी है, जिसमें कई आर्टिफिशियल मांसपेशियां हैं. खबरों के मुताबिक 10 अक्टूबर को की गई आखिरी सर्जरी में उनके दिमाग को आर्टिफिशियल इं​टेलिजेंस (AI) से जोड़कर उनकी आवाज़ भी बदल दी गई.

कैसे काम करेगा आधा इंसान आधा रोबोट?
मनुष्य और एआई के सामंजस्य की बेहतरीन मिसाल बनने जा रहे पीटर एक सायबोर्ग आर्टिस्ट के तौर पर कैसे काम करेंगे? डीएक्ससी टेक्नोलॉजी की रपट की मानें तो एआई वो डेटा इस्तेमाल करेगा जो पीटर का डिजिटल फुटप्रिंट यानी लेख, वीडियो, इमेज और सोशल मीडिया आदि तैयार करेगा. कुल मिलाकर होगा ये कि एआई की मदद से पीटर का रोबोटिक हिस्सा विचार, अनुभव और तस्वीरों को पहचानेगा. पीटर एक थीम देंगे तो एआई उसका स्वरूप बताएगा.



कैसे हुआ ये कायापलट?
पीटर ने खुद इसे कायापलट कहा और ये भी कहा कि वह इंसान से जब रोबोट बन जाएं तब उन्हें पीटर 2.0 के नाम से पुकारा जाए. पीटर के इस कायापलट के लिए दुनिया की बेहतरीन टेक्नोलॉजी कंपनियों ने अलग-अलग काम किए. जैसे डीएक्ससी ने पीटर के शरीर में लीड सिस्टम इंटिग्रेटर, सायबोर्ग आर्टिस्ट और एक होस्ट लगाया. इंटेल ने वर्बल स्पॉन्टिनिटी सॉफ्टवेयर, माइक्रोसॉफ्ट ने होलोलेंस, एफजोर्ड ने यूज़र इंटरफेस डिज़ाइन और ह्यूमन सेंट्रिक एप्रोच जैसे काम किए. किसी कंपनी ने डिजिटल अवतार तैयार किया तो किसी ने वॉइस सिंथेसाइज़र और ऐसे बना आधा इंसान आधा रोबोट.

आंखें हैं खास, कई कंप्यूटरों के लिए
असल में जो बीमारी पीटर को हुई थी, वह धीरे-धीरे उनके पूरे शरीर को खत्म कर देती, लेकिन आंखें नहीं. इस बात को समझते हुए वैज्ञानिकों ने आंखों को रोबोटिक काबिलियत के लिए इस्तेमाल करने का फैसला किया. चेहरे में जो आई कंट्रोलिंग सिस्टम लगाया गया है, उसकी मदद से अब पीटर 2.0 कई कंप्यूटरों को आंखों के इशारे से एक साथ चला सकेंगे.

क्या है ये जानलेवा बीमारी?
ये भी जानें कि मोटर न्यूरॉन बीमारी क्या होती है. ये एक अपकर्षक बीमारी है यानी धीरे-धीरे पूरे शरीर की मांसपेशियों को निष्क्रिय करते हुए पीड़ित को एक तरह से पूरा लकवाग्रस्त कर देती है यानी उसके शरीर में कोई हरकत नहीं ​रह जाती, सिवाय आंखों के. 2017 में पीटर को जब इस बीमारी का शिकार पाया तो बजाय इस तरह मरने के रोबो साइंटिस्ट पीटर ने अपना कायापलट करने का फैसला किया और दुनिया की बेहतरीन संस्थाओं और विशेषज्ञों के साथ मिलकर पूरा सायबोर्ग बना देने की ठानी.

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एंटिना इंप्लांट कर सायबोर्ग बने थे नील हार्बिसन.


क्या होता है सायबोर्ग?
बायोनिक, बायोरोबोट और एंड्रॉयड अलग बात है, सायबोर्ग अलग. किसी हिस्से को जब आर्टिफिशियल उपकरण या तकनीक के ज़रिए जोड़कर क्षमता बढ़ा दी जाती है, तो ऐसे शरीर को सायबोर्ग कहा जाता है. अब तक ये स्तनधारी ही होते हैं लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि और प्रजातियों में भी यह संभव हो सकता है. बहरहाल, अब तक के इतिहास में कोई मनुष्य पूरा सायबोर्ग नहीं बना है यानी किसी के शरीर का एक या कुछ अंग ही एआई तकनीक के साथ जोड़े गए हैं. पीटर इतिहास के पहले पूरे सायबोर्ग बनने जा रहे हैं.

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First published: October 17, 2019, 5:11 PM IST
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