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दूसरों को फांसी पर लटकाने वाले जल्लादों की कितनी होती है तनख्वाह, कैसे होती हैं नियुक्तियां

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: December 5, 2019, 9:00 PM IST
दूसरों को फांसी पर लटकाने वाले जल्लादों की कितनी होती है तनख्वाह, कैसे होती हैं नियुक्तियां
भारत में फांसी पर लटकाने वाले जल्लाद बिरले ही हैं.

निर्भया के गुनहगारों को दिसंबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में फांसी मिलने जा रही है. ये फांसी मेरठ का पवन जल्लाद देगा. लेकिन क्या आपको मालूम है कि जल्लादों को कितना पैसा मिलता है. वो अपनी जिंदगी चलाने के लिए कैसे पैसा कमाते हैं. एक जल्लाद ने फांसी की रस्सी से किस तरह मोटी कमाई की

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  • Last Updated: December 5, 2019, 9:00 PM IST
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निर्भया के गुनहगारों को दिसंबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में फांसी देने की खबरों के बीच पवन जल्लाद के नाम की भी चर्चा होने लगी है, जो चारों दोषियों को फांसी दे सकता है. जल्लाद का पेशा पूरी दुनिया में एक अलग तरह का पेशा है. कुछ देशों में ये फुल टाइम जॉब है तो ज्यादातर देशों में पार्ट टाइम जॉब. ये कौतुहल स्वाभाविक है कि जल्लादों को कितनी सैलरी मिलती है.

सबसे ज्यादा फांसी या मृत्युदंड दुनिया के पांच देशों में दिया जाता है, जिसमें चीन, ईरान, सऊदी अरब, इराक और वियतनाम शामिल हैं. चीन में आमतौर पर जिसे मृत्युदंड की सजा दी जाती है, उसे लाइन में खड़ा करके गोली मार दी जाती है लेकिन ईरान, इराक, सऊदी अरब और वियतनाम में मृत्युदंड फांसी के जरिए या फिर सिर कलम करके दिया जाता है.

भारत में इस समय दो राज्यों में हीं अधिकृत जल्लाद हैं. ये दो राज्य उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल हैं. पश्चिम बंगाल में 2000 के दशक तक एक फेमस जल्लाद हुआ करता था. उसे नाटा मल्लिक के नाम से जाना जाता है. रिकॉर्डों के अनुसार उसने 25 से ज्यादा लोगों को फांसी पर लटकाया था.

कोलकाता निवासी नाटा मल्लिक ने आखिरी बार 2004 में धनंजय चटर्जी को फांसी दी थी. धनंजय एक अपार्टमेंट में सुरक्षा गार्ड था, जहां उसने एक नाबालिग लड़की के साथ रेप करने के बाद उसका मर्डर कर दिया था.



नाटा मल्लिक को बंगाल सरकार देती थी इतना वेतन
मल्लिक को पश्चिम बंगाल सरकार हर महीने दस हजार रुपये वेतन के तौर पर देती थी. हर फांसी पर भी उसे 5000 से 10000 रुपये मिलते थे. धनंजय को फांसी देने के बाद मल्लिक फांसी के फंदे को घर ले आया. जेल मैन्युअल के अनुसार ये रस्सी छह मीटर लंबी होती है. उसने इसे छोटा-छोटा काटकर इससे खासी कमाई की.मल्लिक फांसी की रस्सी से लॉकेट बेचने लगा
दरअसल बंगाल ना जाने कैसे ये अंधविश्वास फैल गया कि फांसी की रस्सी का लॉकेट पहनने से किस्मत पलट जाती है. अगर आपके पास नौकरी नहीं है तो रोजगार मिल जाता है. अगर कर्ज में दबे हैं तो इससे छुटकारा मिल जाएगा. बेहतर दिन शुरू हो जाएंगे. जब ये आप कोलकाता में फैलने लगी तो नाटा मल्लिक के घर के आगे लॉकेट की रस्सी लेने वालों की भीड़ लगने लगी.

कोलकाता के कई संगठनों ने इसका विरोध किया. जिसमें एंटी डेथ पेनल्टी एसोसिएशन ने इसे अंधविश्वास तो कहा ही. साथ ही ये भी कहा कि जल्लाद को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है. कोलकाता के मंदिरों में भी इसका बहुत विरोध हुआ.

वो फांसी देने के बाद रस्सी साथ ले आता था
इसके बाद भी नाटा मल्लिक ने जमकर ऐसी रस्सियां बेचीं. एक लॉकेट की रस्सी उसने करीब 2000 रुपये तक बेची. उसके पास पुरानी फांसी दी गईं रस्सियां भी थीं. इसकी लॉकेट वो 500 रुपये में बेचता था. मल्लिक ने अपने घर के बाहर एक तौलिए को फांसी की गांठ की शक्ल में टांग रखा था.

नाटा मल्लिक पश्चिम बंगाल का जाना-माना जल्लाद था. वो फांसी देने के बाद फंदे की रस्सी अपने साथ ले आता था, फिर ये अंधविश्वास फैल गया था कि इस रस्सी का अगर लॉकेट बनाया जाए तो किस्मत बदल देता है


वर्ष 2008 में उसकी मृत्यु हो गई. उसके बाद उसका बेटा मेहताब ये काम कर रहा है. आमतौर फांसी देने वाले जल्लाद का पेशा पुश्तैनी होता है. नाटा मल्लिक से पहले उसके पिता और बाबा भी यही काम करते थे. भारत में नाटा मल्लिक को सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाला जल्लाद कहा जाता है.

पवन जल्लाद को मिलता है इतना वेतन
मेरठ के पवन जल्लाद ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि वो मेरठ जेल से जुड़ा है. उसका पेशा पार्टटाइम है. उससे यूपी सरकार से 3000 रुपये की पगार मिलती है. उसका पिता कल्लू जल्लाद जब कहीं फांसी देने जाता था तो उसे आने जाने का पैसे के साथ हर फांसी पर एक खास रकम के अलावा अन्य खर्चों की रकम मिलती थी.

1965 में हर फांसी पर मिलते थे 25 रुपये
लखनऊ में रहने वाले एक जल्लाद अहमदउल्ला ने 60 के दशक में जल्लाद का काम शुरू किया था. अब वो इसे छोड़ चुके हैं. क्योंकि उन्होंने इसे बर्बर पेशा माना. वो किसी को बताना भी नहीं चाहते कि उन्होंने कभी ये काम किया था. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें 1965 में एक फांसी के 25 रुपये मिला करते थे, जो उस जमाने में पांच डॉलर के बराबर होते थे.

लखनऊ के एक जल्लाद अहमदउल्ला जो इस काम को छोड़ चुके हैं. उनका कहना है कि वर्ष 1965 में एक फांसी के 25 रुपये दिये जाते थे


कसाब को फांसी देने वाले को मिले 5000 रुपये
मुंबई हमले में पकड़े पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब को जब पुणे जेल में फांसी पर लटकाया गया तो कहा गया कि उसे जिस शख्स ने फांसी दी है, उसका नाम बाबू जल्लाद है. हालांकि इस शख्स की पहचान कभी उजागर नहीं हुई. बाद में महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने एक इंटरव्यू में कहा कि इस फांसी के लिए जल्लाद को पांच हजार रुपये दिये गए थे.

ये बताया गया कि फांसी देने वाला ये जल्लाद महाराष्ट्र पुलिस का ही कोई जवान है. उसी ने याकूब मेनन को भी फांसी पर लटकाया था.

सऊदी अरब में मिलते हैं करीब 30 हजार 
सऊदी अरब में जल्लादों की सैलरी हर माह 399 डॉलर बताई गई है यानी करीब 30 हजार रुपये. हां, उन्हें हर मृत्यु दंड पर 199 डॉलर (करीब 15 हजार) की रकम दी जाती है.

श्रीलंका के अखबार डेली न्यूज में इस साल के शुरू में एक लंबा चौड़ा इश्तहार निकला, जिसमें ये कहा गया कि श्रीलंका को दो जल्लादों की जरूरत है.


श्रीलंका में जल्लाद के लिए छपा इश्तेहार 
कुछ समय पहले श्रीलंका ने जल्लाद की नियुक्ति के लिए एक विज्ञापन छपवाया. श्रीलंका में मृत्यु दंड की सजा 43 सालों बाद फिर से शुरू हो रही है. 2014 में वहां बचे आखिरी फांसी की सजा देने वाले ने इस्तीफा दे दिया था.

अब श्रीलंका दो फुलटाइम जल्लाद रखना चाहता है. श्रीलंका के डेली न्यूज अखबार में इस बारे में इश्तहार प्रकाशित हुआ. इसमें ये कहा गया कि वो हर महीने जल्लाद को 36,310 रुपए सेलरी के तौर पर देंगे, जो यहां की सरकारी नौकरी के लिहाज से एक अच्छी सैलरी मानी जाती है.

इश्तहार में ये अनिवार्य था कि जल्लाद श्रीलंका का मूल निवासी हो, 18 से 45 साल के बीच का पुरुष हो. साथ ही वो मानसिक तौर पर मजबूत और बेहतर चरित्र वाला हो. दरअसल श्रीलंका में ड्रग्स तस्करों पर नकेल कसी जा रही है और इसकी सजा फांसी तय की गई है. इसमें करीब 436 लोग फांसी की सजा का इंतजार कर रहे हैं.

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First published: December 5, 2019, 9:00 PM IST
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