Everyday Science : दिमाग में आखिर कहां से आती है क्रिएटिविटी?

कॉंसेप्ट इमेज Pixabay से साभार
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लेफ्ट ब्रेन vs राइट ब्रेन (Left Brain or Right Brain) थ्योरी कितनी सही है? विशेषज्ञ कह रहे हैं कि यह एकतरफा बात नहीं है बल्कि क्रिएटिविटी (Science of Creativity) एक कॉम्प्लेक्स स्टडी है. आइए इस कठिन थ्योरी और इससे जुड़े सवालों के जवाब आसानी से समझें.

  • News18India
  • Last Updated: October 28, 2020, 3:27 PM IST
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दिमाग को बायोलॉजिकली दो गोलार्धों (Hemispheres) में समझा जाता है यानी आधा दाईं तरफ का और आधा बाईं तरफ का. प्रचलित तौर पर माना जाता रहा कि क्रिएटिविटी का ताल्लुक दिमाग के दाएं गोलार्ध से रहा. इनोवेटिव लोगों को 'राइट ब्रेन थिंकर' (Right Brain Thinkers) कहा जाता रहा और जो लोग तर्क या विश्लेषण बुद्धि (Logical Mind) रखते हैं, उन्हें 'लेफ्ट ब्रेन थिंकर' (Left Brain Thinkers). लेकिन विशेषज्ञों (Experts) के एक वर्ग ने हमेशा माना है कि यह प्रक्रिया इतनी सरल नहीं है. इसी साल ब्रेन इमेजिंग (Brain Imaging) संबंधी एक नई स्टडी ने इस विषय में दिलचस्प प्रयोगों से एक नई रोशनी डाली है.

न्यूरोइमेज नाम के जर्नल में छपी इस स्टडी में एक्सपेरिमेंट से पता चले निष्कर्ष में कहा गया कि इंप्रोवाइज़ेशन में कम अनुभव रखने वाले संगीतकारों में क्रिएटिविटी शुरूआती तौर पर दाएं दिमाग से संचालित पाई गई, लेकिन जो संगीतकार इंप्रोवाइज़ेशन में महारत रखते हैं, उनके लेफ्ट दिमाग से क्रिएटिविटी का ताल्लुक दिखा. इसका सार समझा गया कि जो लोग अपने क्षेत्र में शुरूआती दौर में हैं, उनमें 'राइट ब्रेन क्रिएटिविटी' और जो अपने क्षेत्र में ज़्यादा अनुभवी, जानकार या कुशल हैं, वो 'लेफ्ट ब्रेन क्रिएटिव' हैं.

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अगर क्रिएटिविटी का मतलब किसी प्रोडक्ट की क्वालिटी जैसे कोई गीत, आविष्कार, कविता या पेंटिंग से समझा जाए तो लेफ्ट ब्रेन का खास रोल है और अगर क्रिएटिविटी को आप किसी व्यक्ति की वह योग्यता मानें जिसके ज़रिये वो किसी नॉवेल को समझता है या किसी अप्रत्याशित स्थिति से निपटता है यानी जहां एक नौ​सीखियापन दिखता है, वहां राइट ब्रेन मुख्य भूमिका में होता है.


जॉन कूनियस, शोधकर्ता और मनोविज्ञान के प्रोफेसर


इस शोध के बाद क्रिएटिविटी और इसके विज्ञान, खास तौर से न्यूरोसाइंस से जुड़े कुछ ज़रूरी और दिलचस्प सवालों के जवाब (विशेषज्ञों की राय में) जानिए.

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प्रतीकात्मक तस्वीर Pixabay से साभार.


1. क्रिएटिविटी होती क्या है? क्या कोई तय परिभाषा है?
ज़्यादातर विशेषज्ञ इस बात पर राज़ी हैं कि पहले तो क्रिएटिविटी का मतलब मौलिक, अनूठे या नए किस्म के आइडिया पैदा करने वाले दिमाग से है और दूसरे यह भी क्रिएटिविटी की परिभाषा ही है कि ये आइडिया या विचार किसी समस्या या सवाल के संतोषजनक हल होने चाहिए.

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2. क्या क्रिएटिविटी को नापा जा सकता है?
हां, क्रिएटिविटी के कुछ पहलुओं को नापा जा सकता है, लेकिन कुछ को नहीं. समस्या यह है कि अभी मनोविज्ञान विशेषज्ञों के पास इस पैमाइश के लिए पर्याप्त टूल्स नहीं हैं.

3. क्रिएटिव मोड और अनक्रिएटिव मोड में दिमाग में क्या अंतर होता है?
वैज्ञानिक तौर पर ब्रेन की रिसेप्टिव-प्रिडिक्टिव साइकिल के बारे में जाना गया है, लेकिन एक्सप्लोरेटिव-जनरेटिव साइकिल के बारे में बहुत कम. विशेषज्ञों की मानें तो अनक्रिएटिव मोड में ब्रेन के बड़े पैमाने वाले नेटवर्क एक तरह से बंधे हुए पैटर्न में दिखते हैं, लेकिन क्रिएटिव मोड में इनमें एक ऊर्जा, एक गतिशीलता दिखती है.

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4. किसमें होती है क्रिएटिविटी और किसमें नहीं?
कई तरह की स्टडीज़ में यह पाया गया कि क्रिएटिविटी का ताल्लुक आनुवांशिकी और अनुभव के साथ होता है. लेकिन, यह भी तय है कि सभी में क्रिएटिव होने की संभावना होती है और कुदरती तौर पर कोई इस मामले में किसी से बेहतर नहीं होता. कुछ स्टडीज़ में पाया गया कि क्रिएटिव माइंड में ग्रे ब्रेन मैटर और सेरोटॉनिन का स्तर ज़्यादा होता है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर.


5. क्या क्रिएटिविटी बढ़ाई जा सकती है? हां, तो कैसे?
खेलने, अभ्यास करने और अनुभव लेने से क्रिएटिव थिंकिंग बेहतर की जा सकती है. स्टडीज़ में देखा जा चुका है कि अगर आप किसी को रोज़ क्रिएटिव काम करते देखें तो भी आपकी क्रिएटिविटी बढ़ती है. क्रिएटिविटी का ताल्लुक बढ़ती उम्र में कल्पनाशीलता से है इसलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों की इमेजिनेशन को सही दिशा देना चाहिए, न कि रोकना चाहिए.

यह भी समझने की बात है कि ​क्रिएटिविटी रातों रात बढ़ने वाली कोई चीज़ नहीं है. अगर आपके पास इनोवेटिव आइडियाज़ हैं, तो कड़ी मेहनत और उससे जुड़ी आदतों को लगातार बनाए रखकर आप क्रिएटिव माइंड बन सकते हैं.
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