क्या नागालैंड का अलग झंडा, अलग संविधान होगा?

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Updated: August 27, 2019, 4:51 PM IST
क्या नागालैंड का अलग झंडा, अलग संविधान होगा?
नागालैंड के अलग झंडे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं.

जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) राज्य के पुनर्गठन के बाद अब नागालैंड राज्य का मुद्दा (Nagaland Issue) चर्चा में है. हाल में मोदी सरकार (Modi Government) ने नागाओं के साथ एक एग्रीमेंट भी किया है. जानें कौन सा पेच कहां फंसा हुआ है.

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जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल 370 (Article 370) हटाए जाने के फैसले का मतलब था कि विशेष राज्य का दर्जा खत्म हुआ. यानी राज्य का अपना अलग से कोई झंडा या संविधान (Separate Flag and Constitution) जैसी कोई व्यवस्था नहीं होगी. पुनर्गठन के बाद इसी महीने राज्य में पहली बार तिरंगा फहराया गया. इसी महीने एक और घटनाक्रम हुआ जिसमें नागालैंड (Nagaland) की राष्ट्रवादी समाजवादी परिषद पार्टी (NSCN-IM) के साथ भारत सरकार ने ऐतिहासिक शांति समझौते (Nagaland Peace Process) पर एक अहम कदम आगे बढ़ाया. इस समझौते को लेकर कई तरह की खबरें गर्म हैं और इसी सिलसिले में जानिए कि नागालैंड में आगे क्या होने की संभावनाएं हैं. क्या नागालैंड अलग झंडे, अलग संविधान और अलग पासपोर्ट जैसी व्यवस्था हासिल कर सकता है?

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अगस्त के पहले महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi), कैबिनेट मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh), सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल (Ajit Doval) जैसे नेता उस मंच पर दिखे, ​जहां NSCN-IM के प्रमुख इसाक चिशी और थुइंगलेंग मुइवा सहित कई नेता मौजूद थे. असल में, नागालैंड के अतिवादियों के साथ 1997 से शांति बहाली की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसे लेकर अब एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट (Framework Agreement) तक पहुंचा जा सका है. इस शांति वार्ता में मध्यस्थ पूर्व इंटेलिजेंस अफसर आरएन रवि की मानें तो अगले तीन महीनों में पक्का समझौता कर लिया जाएगा.

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शांति वार्ता में मध्यस्थ पूर्व इंटेलिजेंस अफसर आरएन रवि की मानें तो अगले तीन महीनों में पक्का समझौता कर लिया जाएगा.


ये फ्रेमवर्क एग्रीमेंट क्या है?
नागालैंड को आर्टिकल 371 के तहत विशेष राज्य का दर्जा हासिल है लेकिन दशकों से पूर्ण स्वायत्तता की मांग को लेकर यहां राजनीतिक तनाव रहा है. NSCN-IM के साथ ही, कई और अतिवादी समूह इस तरह की मांगों का हिस्सा रहे हैं लेकिन इस समय के राजनीतिक माहौल में वो तकरीबन पीछे छूट गए हैं इसलिए यही समूह मुख्य माना जा रहा है. नागालैंड की अलग संस्कृति की दलील पर उसने एक समय में 'भारत के साथ लेकिन भारत में नहीं' की नीति चाही थी. लेकिन अब रवि के मुताबिक यह स्थिति नहीं है.
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फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के बारे में भारत सरकार और NSCN-IM, दोनों ही पक्षों की तरफ से कोई पुख्ता जानकारी अब तक नहीं दी गई है. दोनों पक्षों के हवाले से इतना ही कहा जा रहा है कि भारत सरकार ने नागाओं की अनूठी संस्कृति, इतिहास और स्थिति के साथ ही उनके लोकतांत्रिक एवं संप्रभुता के अधिकार को बेहतर ढंग से समझा है.

ताज़ा चिट्ठी ने लगाया पेंच
शांति वार्ता में मध्यस्थ वार्ताकार के रूप में नियुक्त रवि ने जब एक कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री ने शांति प्रक्रिया के लिए तीन महीने की डेडलाइन तय की है, तो उसके बाद NSCN-IM ने प्रतिक्रिया दी. समूह ने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखकर साफ कहा है कि नागा सियासी मुद्दे पर कोई भी हल तब तक सम्मानजनक नहीं होगा जब तक नागा झंडे और संविधान जैसे मूल मुद्दों को अनदेखा किया जाएगा और इन पर केंद्र और समूह के बीच सहमति नहीं बनेगी.

अब इस शांति बहाली प्रक्रिया को लेकर कई तरह की चर्चाएं गर्म हो गई हैं कि क्या केंद्र नागाओं की इस मांग को मानेगा. अगर हां, तो नागाओं को कितनी और कैसी विशेष व्यवस्थाएं दी जाएंगी और अगर नहीं तो क्या नागा ऐसे किसी समझौते पर राज़ी होने के मूड में हैं.

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उड़ीसापोस्ट की खबर के मुताबिक नागाओं ने अलग झंडे की मांग शुरू कर दी है.


ये रही हैं नागाओं की मुख्य मांगें
बरसों से नागालैंड की स्वायत्तता के लिए संघर्ष कर रहे समूहों ने समय-समय पर अपनी मांगें रखी हैं. इनके मुताबिक ये मांगें खास तौर से हमेशा ज़ोर पकड़ती रही हैं.

- नागालैंड के लिए अलग संविधान
- अलग झंडा
- अलग नागा पासपोर्ट
- संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि
- संयुक्त विदेश और रक्षा मामले
- नागा मुद्रा के इस्तेमाल का अधिकार

अफवाहों से आप भी बचें
भारत सरकार और नागा प्रतिनिधियों के बीच शांति प्रक्रिया और समझौते को लेकर फिलहाल बातचीत जारी है. केंद्र की ओर से फिलहाल नहीं बताया गया है कि किस तरह का समझौता हो चुका है या होने वाला है. ऐसे में, उत्तर पूर्व भारत के कुछ अखबारों और शेष भारत के मीडिया के एक हिस्से में इस तरह की चर्चाएं खबरों के तौर पर छापी जा रही हैं कि नागालैंड के अलग झंडे, अलग संविधान और अलग पासपोर्ट पर केंद्र ने सहमति दे दी है. फैक्टहंट के मुताबिक इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और अभी इस मामले में कोई पुष्ट या औपचारिक सूचना या बयान नहीं आया है.

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First published: August 27, 2019, 4:11 PM IST
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