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जाते-जाते इन 7 तरीकों से आपकी दुनिया बदल जाएगा कोरोना वायरस

News18India
Updated: May 4, 2020, 6:15 PM IST
जाते-जाते इन 7 तरीकों से आपकी दुनिया बदल जाएगा कोरोना वायरस
न्यूज़18 क्रिएटिव

सेहत से लेकर जीवन के तमाम पहलुओं पर आपकी सोच बदल जाएगी! जी हां, कोरोना वायरस महामारी के बाद पैदा हुए डर, सतर्कता और सेहत को प्राथमिकता पर रखने की चिंता के चलते दुनिया में कई बदलाव दिखने वाले हैं. जानें कि कुछ ही वक्त में भारत में, खास तौर से आम आदमी का जीवन कैसे और कितना बदलने वाला है.

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कोरोना वायरस (Corona Virus) महामारी के बाद... सेहत (Health) और ज़िंदगी को लेकर अब तक रही समझ में जो बदलाव आएगा, उससे दुनिया नई लगेगी. भारत (India) में भी स्थितियां बहुत बदली हुई दिखने वाली हैं. सबसे बड़ा बदलाव शायद यही होगा कि अब तक कभी चुनाव (Election) में मुद्दा नहीं रही स्वास्थ्य सुरक्षा (Health Care) अब मुख्य चर्चा में होगी. आइए, 7 बिंदुओं में जानिए कि कोविड 19 (Covid 19) के बाद आम आदमी के लिए दुनिया कितनी बदल जाएगी.

1. स्वास्थ्य सेक्टर पूरा बदल जाएगा
उम्मीद की जा रही है कि भारत रक्षा (Defense) पर जितना खर्च करता है, अब स्वास्थ्य पर भी करने लगेगा. ऐसा बहुत कुछ होगा, जो आमूलचूल बदलाव लगेगा क्यों​कि अब सबसे बड़ा दुश्मन महामारी (Pandemic) को समझने की समझ बनेगी. लोक स्वास्थ्य (Public Health) को प्राथमिकता दी जाएगी, सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को विकसित किया जाएगा क्योंकि प्राइवेट सेक्टर इस महामारी के दौर में नाकाफी साबित हुआ है.

वहीं देश में, डॉक्टरों और नर्सों की संख्या बढ़ाने और उन्हें प्रशिक्षण देने पर भी ज़ोर होगा. मेडिकल सेवा में करियर के बेहतर विकल्प सामने आएंगे. दवाओं और ज़रूरी मेडिकल उपकरणों का उत्पादन देश में करने जैसे कई बदलावों की उम्मीद की जा रही है क्योंकि अब संकट के समय में दूसरे देशों पर निर्भर रहने की आदत छोड़ना होगी. वहीं, यह भी संभव है कि डॉक्टर और मरीज़ के बीच वर्चुअल संपर्क बढ़ें यानी ओपीडी मोबाइल फोन या इंटरनेट पर शिफ्ट हो सकती है.



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2. फैशन पर पड़ेगी मार
कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान लोगों की जीवन शैली में भारी बदलाव दिखा है. खास तौर से मध्यम वर्ग कपड़ों की ज़रूरत के बारे में जागरूक दिखा है. इंस्टाग्राम पर संकेत दिखे हैं कि लोग लग्ज़री कपड़ों के बजाय पाजामा जैसे ज़रूरत के कुछ ही सेट कपड़ों में कई दिन गुज़ारने के आदी हो रहे हैं. यह लंबे समय का बदलाव संभव है.

चूंकि​ विदेश यात्राओं, पर्यटन, पार्टी और आउटिंग जैसे बहुत से बदलाव समाज देखेगा इसलिए महंगा फैशन भी प्रभावित होगा. साथ ही, दुनिया का कारोबार भी प्रभावित होगा इसलिए बहुत सी चीज़ों की सप्लाई भी नहीं हो सकेगी. बेरोज़गारी या आर्थिक हालत भी पहले से कमतर होगी इसलिए यह शौक भी खत्म होगा और ज़रूरतों के लिए खर्च की आदत पड़ेगी. वैसे भी महामारियों या आर्थिक संकटों के बाद जनता में एक सदमा या कम से कम में जीने की चेतना का विकास देखा जाता है.

3. उड़ना कम भी होगा, महंगा भी
भारत में पिछले दो सालों में एविएशन उद्योग उछाल पर रहा. लेकिन, अब यह किसी बुरे सपने जैसा होगा. कोविड 19 के बाद की दुनिया में डर और सावधानी के चलते गैर ज़रूरी उड़ानों पर लगाम लगेगी. सिर्फ भारत नहीं बल्कि दुनिया में उड़ानें कम होंगी यानी पर्यटन उद्योग में भी गिरावट होगी.

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सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन के मुताबिक मई 2020 के अंत तक दुनिया की ज़्यादातर एयरलाइन्स दीवालिया हो जाएंगी. यूके की फ्लायबी, वर्जिन आस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीकन एयरवेज़, एयर मॉरिशस तो पहले ही दीवालिया हो चुकी हैं. दूसरी तरफ, अब उड़ानें सस्ती नहीं होंगी. हवाई अड्डों पर हेल्थ चेक, सोशल डिस्टेंसिंग के हिसाब से उड़ानों में कम यात्री और हर उड़ान के बाद साफ सफाई के लिए खर्च बढ़ने जैसे कई कारणों से उड़ानें बेहद महंगी हो जाएंगी.

4. पहले जैसे नहीं रह जाएंगे दफ्तर
अगर आप कोविड 19 के बाद दफ्तर जाएंगे तो बहुत कुछ बदला हुआ होगा. बिल्डिंगों के डिज़ाइन से लेकर बैठक व्यवस्था और व्यवहार तक बहुत कुछ. आर्किटेक्ट्स के मुताबिक यह पहली बार नहीं है कि लोक स्वास्थ्य संकट के चलते आर्किटेक्चर और शहरी प्लानिंग में बदलाव दिख रहे हैं. 1954 में कॉलेरा महामारी के बाद लंदन का पूरा आर्किटेक्चर बदला गया था.

इधर, टीसीएस वर्क फ्रॉम होम को लंबे समय के विकल्प के तौर पर देख रहा है. रियल एस्टेट विशेषज्ञ मान रहे हैं कि दफ्तरों के लिए जगह की मांग बहुत घटने वाली है. दूसरी तरफ, आर्किटेक्ट्स मान रहे हैं कि अब दफ्तर छोटे और कैबिन बेस्ड डिज़ाइन वाले होंगे. जहां रहा भी जा सके, ऐसे बिज़नेस सेंटरों की भी उम्मीद दिख रही है. दफ्तरों में टीवी बढ़ेंगे ताकि कॉन्फ्रेंसिंग हो सके और कॉन्फ्रेंस टेबल डायनिंग टेबल की तरह भी इस्तेमाल होंगी. इस तरह के कई बदलाव संभावित हैं.

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5. ऑनलाइन सिलैबस बनाने होंगे
दुनिया भर में लॉकडाउन के चलते स्कूलों के बंद करने पर ज़ोर हर जगह दिखा. इसके चलते टीचरों और छात्रों के बीच ऑनलाइन संपर्क बढ़ा. इससे यह चर्चा शुरू हुई कि क्या यह विकल्प लंबे समय के लिए संभव है. शिक्षाविद मान रहे हैं कि पैसिव लर्निंग के दिन लद गए. अब ऑनलाइन कोर्स तैयार कर इसी तरह के शैक्षणिक ढांचे तैयार करने होंगे.

टेक्नोलॉजी के ज़रिए पढ़ाई को और बेहतर किए जाने को लेकर शिक्षाविद आश्वस्त हैं. बायोलॉजी जैसे सब्जेक्ट आप क्लासरूम की तुलना में वीडियो पर ग्राफिक वगैरह देखकर बेहतर समझ सकते हैं. स्कूलों के साथ ही कॉलेजों में भी इस तरह के व्यापक बदलावों के बारे में विचार किए जा रहे हैं.

6. रेस्तरां भी अब क्रिएटिव होंगे
बफे तो अब भूल ही जाइए. कोविड 19 के बाद की दुनिया में भले ही बाहर जाकर रेस्टॉरेंट में खाने का चलन पूरी तरह खत्म न हो लेकिन सीमित हो ही जाएगा. इसके लिए रेस्टॉरेंट्स को क्रिएटिव और सेहत के लिए फ्रेंडली होना होगा. इस उद्योग के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि डिजिटल मेन्यू, रेस्तरां के किचन की लाइव स्ट्रीमिंग और वेटरों के चेहरों पर मास्क जैसे कई बदलाव दिखाई देने वाले हैं.

शेफ अब ज़रूरी तौर पर दस्ताने पहनेंगे, थर्मल स्कैनर नए मेटल डिटेक्टरों की तरह इस्तेमाल होंगे, रेस्टॉरेंट्स में लोगों के लिए टेबलें दूरी पर लगाई जाएंगी. यानी इस तरह के कई कदम उठाए जाएंगे जो लोगों को सोशलाइज़ करने और उनके स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता पर भी रखते हों.

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7. अब समझ आएगी श्रम की कीमत
आखिरी बिंदु में यह समझना चाहिए कि जीवन में आने वाले बदलावों को लेकर पूंजीवादी नज़रिया क्या है. अब तक पूंजीवादी नज़रिया उद्यमिता की वकालत करता रहा है यानी वह व्यक्ति को हीरो बनाता रहा है. कभी यह नहीं बताया गया कि हर सफलता के पीछे कई लोगों की मेहनत और सहयोग होता है, कोई अकेला कुछ नहीं करता. कोरोना वायरस अब यह समझ पैदा करेगा कि हर काम की कीमत समझी जाए. ऐसे कई कामों की जो अब तक गरीब लोग या औरतें कर रही थीं, अब उन पर फोकस होगा.

अब मुनाफा ही नहीं, बल्कि बहुत कुछ होगा, जिसके आधार पर कोई ढांचा खड़ा होगा. चाहे किसी संस्था के स्तर पर हो या व्यक्तिगत स्तर पर. पुरुषों की मानसिकता बदलने की उम्मीद भी की जा सकती है, हालांकि कितनी बदलेगी और वो महिलाओं के काम की कीमत कितनी समझ पाएंगे, यह वक्त बताएगा. कुल मिलाकर, साथ रहने और एक दूसरे के काम का सम्मान करने की भावना विकसित होने की उम्मीद की जाना चाहिए.

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First published: May 4, 2020, 6:15 PM IST
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