कौन था वो सिख फाइटर पायलट, UK में बन रहा है जिसका स्टैचू

पहले विश्वयुद्ध के हीरो रहे थे हरदीत सिंह मलिक.

पहले विश्वयुद्ध के हीरो रहे थे हरदीत सिंह मलिक.

ब्रिटिश हुकूमत से आज़ाद भारत (Independent India) तक खेल, सेना और सिविल सर्विस (Civil Services) में यादगार रहे हरदीत सिंह मलिक (Hardit Singh Malik) को जानते हैं आप? मिल्खा सिंह (Milkha Singh) से सालों पहले 'फ्लाइंग सिख' (Flying Sikh) खिताब मलिक को ही मिला था.

  • Share this:
दो विश्व युद्धों (World Wars) में जिन भारतीय जांबाज़ों ने ब्रिटेन के लिए अपनी जान की परवाह तक नहीं की थी, आखिरकार ब्रिटेन में उन्हें नवाज़े जाने का सिलसिला बना. इंग्लैंड के पोर्ट शहर साउथैंपटन (Southamton) में एक नये स्मारक का डिज़ाइन फाइनल कर दिया गया है, जो 20वीं सदी के उस सिख की याद में बनाया जाएगा जो न केवल बेहतरीन फाइटर पायलट (Fighter Pilot) था, बल्कि गोल्फ और क्रिकेट की दुनिया (Cricket Player) में भी खासा दखल रखता था. यही नहीं, इसी सिख को ओरिजनल 'फ्लाइंग सिख' के तौर पर भी याद किया जाता है.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने वाले पहले विश्व युद्ध के समय यूके के रॉयल फ्लाइंग कॉर्प्स के सदस्य बनने वाले हरदीत सिंह मलिक का नाम यादगार होने जा रहा है. वह न केवल पहले भारतीय बल्कि पहले सिख फाइटर पायलट थे, जिनकी पगड़ी के मद्देनज़र एक खास तरह का हेलमेट बनाया गया था.

Youtube Video




ये भी पढ़ें : जब महिलाओं के पास वोट का हक तो क्या, अपना नाम तक नहीं था!
क्यों बनाया जा रहा है स्मारक?
मलिक की याद में मेमोरियल बनाए जाने के अभियान में जुटी संस्था वन कम्युनिटी हैंपशायर एंड डॉरसेट की मानें तो मलिक पहले विश्व युद्ध के दौरान हीरो की तरह सामने आए थे. संस्था का कहना है कि मलिक के स्टैच्यू के बहाने उन सभी कम चर्चित सिखों को सम्मान मिलेगा, जिन्होंने ब्रिटेन के लिए पहले और दूसरे विश्व युद्ध में योगदान दिया.

यही नहीं, संस्था का कहना है कि यह स्मारक पूरे सिख समुदाय के योगदान के प्रतीक के तौर पर भी अहमियत रखता है. अब आपको बताते हैं कि मलिक कौन थे और क्यों उन्हें याद किया जाता है.

sikh pilot, who is flying sikh, unsung heroes, indian war hero, सिख पायलट, फ्लाइंग सिख कौन है, अनसंग हीरो, भारत के वीर
मलिक की याद में जारी किया था डाक टिकट


मलिक ने कितने रोल निभाए?
1917 से 1919 के बीच फाइटर पायलट के तौर पर मलिक की शोहरत सबसे ज़्यादा रही और उन्हें जब भी याद किया जाता है तो इसी भूमिका का ज़िक्र बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन इसके अलावा भी मलिक ने कई और अहम उप​लब्धियां अपने नाम की थीं.

ये भी पढ़ें : भवानीपुर और शोभनदेब, कैसे इन दो नामों से जुड़ी ममता की साख?

एक खिलाड़ी थे मलिक
14 साल की उम्र में 1908 में इंग्लैंड पहुंचे मलिक ने 1915 में ऑक्सफोर्ड से ग्रैजुएशन पूरा किया, तो साथ ही गोल्फ के खेल में ऑक्सफोर्ड ब्लू की हैसियत भी पाई. इसके साथ ही, 1914 से 1930 के बीच मलिक क्रिकेट खिलाड़ी रहे. ससेक्स की टीम से मलिक ने 1914 और फिर 1921 में खेला था जबकि बाद में भारत में 1923 से 1930 के बीच लाहौर टूर्नामेंट में सिखों और हिंदुओं की तरफ से भी वो खेले.

एक पायलट थे मलिक
पहले वर्ल्ड वॉर में ​चार भारतीयों ने बतौर पायलट भूमिका निभाई थी, जिनमें से केवल दो जीवित बचे थे. बचने वालों में ईसी सेन के अलावा मलिक थे, जिन्होंने इतिहास रचा था. विश्वयुद्ध खत्म होने तक हवाई लड़ाइयों में कुल छह जीत का सेहरा मलिक के सिर बंधा था, जिससे उन्हें फ्लाइंग सिख का खिताब भी हासिल हुआ.

ये भी पढ़ें : कोविड-19 वैक्सीन के अरबों के बाज़ार में किस कंपनी की क्या है दावेदारी?

एक सिविल सर्वेंट थे मलिक
1921 में ​ब्रिटिश राज में मलिक ने सिविल सर्विसेज़ की परीक्षा पास की और भारत की आज़ादी तक वो ब्रिटिश प्रशासन में सेवाएं देते रहे. आज़ादी मिलने के बाद मलिक को कनाडा के हाई कमिश्नर के तौर पर नियुक्त किया गया और बाद में वो फ्रांस के राजदूत भी रहे. उन्हें फ्रांस ने लीजन ऑफ ऑनर से सम्मानित किया था.

ये भी पढ़ें : क्या सच में सबसे बड़ी नौसेना बन गया है चीन? क्या हैं चीन के मंसूबे?

और लेखक भी थे मलिक
अस्ल में मलिक की ज़िंदगी इतने अनुभवों और मोड़ों का संग्रह थी,​ जिसे दर्ज करना ज़रूरी था. 91 साल की उम्र में 1985 में आखिरी सांस लेने से पहले के कुछ सालों में मलिक आत्मकथा लिख रहे थे, जो 2011 में ए लिटिल वर्क, ए लिटिल प्ले के नाम से प्रकाशित हुई. इंडियन एयरफोर्स में उन्हें मानद रैंक मिली थी और इस तरह वो आखिरी सांस तक सक्रिय जीवन जीते रहे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज