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ओलंपिक में पदक तैयारी के लिए ये थी मीरा चानू की डाइट, जानिए क्या खाते हैं खिलाड़ी

ओलंपिक वेटलिफ्टर सिल्वर मेडल विजेता मीराबाई चानू ने जीत के बाद कहा कि वो पिज्जा खाना चाहती हैं,  क्योंकि वह महीनों से ओलंपिक के लिए सख्त डाइट पर थी. (Kiren Rijiju/Twitter)

ओलंपिक वेटलिफ्टर सिल्वर मेडल विजेता मीराबाई चानू ने जीत के बाद कहा कि वो पिज्जा खाना चाहती हैं, क्योंकि वह महीनों से ओलंपिक के लिए सख्त डाइट पर थी. (Kiren Rijiju/Twitter)

इन दिनों तोक्यो में ओलंपिक (Tojyo olympic 2021) चल रहा है. ओलंपिक की तैयारी के लिए खिलाड़ियों की खुराक अलग होती है. अक्सर खिलाड़ियों को मनपसंद खाना छोड़ना होता है. भारत के लिए पदक जीतने वाली मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) ने भी दो साल तक अपनी डाइट नियंत्रित रखी. जानते हैं ओलंपिक खिलाड़ियों के खान-पान के बारे में

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आप सभी ने पढ़ा या देखा होगा कि किस तरह भारत के लिए भारोत्तोलन में सिल्वर मेडल जीतने के बाद मीराबाई चानू ने सबसे पहले पिज्जा खाया. विशेष तौर पर उसने ये खाने की डिमांड की थी, क्योंकि पिछले दो साल से उसने कड़े खुराक कंट्रोल के कारण इसको हाथ तक नहीं लगाया था. यहां तक कि उसने दो साल बाद इसी के चलते घर का खाना खाया.

दरअसल बाक्सिंग से लेकर भारोत्तोलन, तैराकी, हॉकी और फुटबाल में खिलाड़ियों की खुराक तैयारी के लिए एकदम अलग तरह की होती है. फिर ये अलग अलग वेट कैटेगरी के हिसाब से निर्भर करती है. आइए जानते हैं कि सिल्वर मेडल विजेता मीरा बाई चानू और दूसरे खिलाड़ियों की डाइट आमतौर पर ओलंपिक की तैयारी के लिए क्या थी. ये भी जानेंगे कि जब प्राचीन ओलंपिक होते थे तो खिलाड़ी क्या खाते थे.

तब कछुए का सूप पीते थे चीन के एथलीट
एक जमाना था जब चीन के स्टार एथलेटिक कोच हुआ करते थे मा जुनरेन. वो चीन के मध्यम और लंबी दूरी के चैंपियन धावक तैयार करने के लिए जाने जाते थे. उनके ये एथलीट जिस प्रतियोगिता में उतरते थे, उसमें धूम मचा देते थे. पूरी दुनिया इन एथलीटों की सफलता से हैरान थी.

उन दिनों मीडिया में खबरें छपती थीं कि अगर मा अपने एथलीटों को कड़ी ट्रेनिंग देते हैं तो सीक्रेट रेपिसी वाली चीजें भी खिलाते हैं, जिससे उनकी क्षमता अपार हो जाती थी. मीडिया में ये खबरे में भी आईं कि मा की सीक्रेट रेसिपी में कछुए का खून होती है, जो वो अपने एथलीटों को पिलाया करते थे. सच्चाई कितनी थी, ये तो नहीं मालूम लेकिन ये सच है कि वो अपने एथलीटों को कुछ ऐसा खिलाते पिलाते जरूर थे, जिससे उनकी क्षमता में गजब का इजाफा होता था.

चीन के ओलंपिक खिलाड़ियों की खुराक सबसे अजीबोगरीब होती है. हालांकि ओलंपिक में आने से पहले वो अपनी खुराक में इसलिए बदलाव लाने लगते हैं कि ड्रग टेस्ट में वो सुरक्षित रहें.

चीन के खिलाड़ियों का खान-पान अजीबोगरीब
आज भी चीन के एथलीटों के बारे में कहा जाता है कि वो तमाम ऐसी चीजें खाते हैं, जो दुनिया में कहीं और कोई खा ही नहीं सकता. यूं भी चीन की फूड हेबिट्स बहुत अजीबोगरीब हैं. दुनियाभर में चाइनीज के बारे में कहा जाता रहा है कि दुनिया में कोई में कीडे़ से लेकर जानवर, पंक्षी और सांप तक कुछ भी ऐसा नहीं है, जिसे वो खाते नहीं हैं. उनकी खानपान की आदतें सबसे विचित्र मानी जाती हैं.
चीन के खिलाड़ियों के बारे में आज भी कहा जाता है कि वो कुछ ऐसा खाते हैं, जिससे अपनी ताकत और क्षमता में जबरदस्त बढोतरी करते हैं. हालांकि 2012 के लंदन ओलंपिक से पहले चीनी दल वाले ड्रग्स की जांच से इतने घबराए हुए थे कि उन्होंने ओलंपिक से पहले शाकाहार का ही सेवन करना शुरू कर दिया था.

कितनी होनी चाहिए ओलंपियन की खुराक
एक ओलंपियन का आदर्श खुराक एक दिन की औसतन 6000 कैलोरी होनी चाहिए. हालांकि ये भी काफी ज्यादा है. ओलंपिक में भी खिलाड़ी अलग अलग खेलों के हिसाब अलग कैलोरी की डायट लेते हैं. जिम्नास्ट अगर सबसे कम खुराक लेने वाले खिलाड़ी होते हैं तो बॉक्सर, भारोत्तोलक, पहलवान, तैराक और धावक ठीक ठाक खुराक लेते हैं.

ओलंपिक के तैराकी चैंपियन माइकल फ्लेप्स की खुराक देखकर हर कोई हैरान रह जाता था. वो अपनी खुराक में भरपूर जंकफूड और साफ्ट ड्रिंक का भी इस्तेमाल करते थे.

सबसे ज्यादा खुराक तैराक माइकल फ्लेप्स की होती थी
ओलंपिक में अगर किसी खिलाड़ी के खुराक की सबसे ज्यादा चर्चा पिछले कुछ सालों में हुई है तो वो चैंपियन तैराक माइकल फ्लेप्स हैं. वो एक पूरे दिन में 12,000 कैलोरी से ज्यादा की खुराक लेते थे. ये माना जाता था कि जितना वो खाते हैं, उतना दिन में 05 सामान्य मनुष्य कैलोरी के तौर पर लेते हैं.

फ्लेप्स ने बीजिंग के वर्ष 2008 के ओलंपिक की तैराकी स्पर्धाओं में एक साथ 06 गोल्ड मेडल जीतकर सनसनी मचा दी थी. वैसे उन्होंने अपने ओलंपिक करियर में 11 गोल्ड मेडल जीते. 06फुट 04 इंच के फ्लेप्स अपनी खुराक के मामले में अपवाद थे. वह सुबह के नाश्ते में 03 फ्राई अंडों का सैंडविच, 05 अंडों का आमलेट, टमाटर, लेट्यूस, फ्रेंच टोस्ट, चाकलेट पेनकेक्स और दो कप कॉफी लेते हैं.

इसके बाद उनका लंच दो बड़े हैम, 500 ग्राम पास्ता, एनर्जी ड्रिंक्स, चीज सैंडविच के साथ होता है. रात के डिनर में वो एक बड़े साइज का पिज्जा, 500 ग्राम पास्ता, एनर्जी ड्रिंक्स लेते थे. उनकी ये खुराक निश्चित तौर पर लग सकती है कि ये किसी ओलंपिक चैंपियन खिलाड़ी की नहीं हो सकती. इसमें भरपूर मात्रा में जंक फूड भी है और कैलोरी भी लेकिन इतनी खुराक लेने के बाद फेल्प्स उसे रोज 05 घंटे की एक्सरसाइज और हफ्ते में कम से कम 50 किमी की तैराकी के साथ पूरा करते थे.

उसैन बोल्ट भरपूर प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट वाली खुराक लेते थे.

उसैन बोल्ट क्या खाते थे
ओलंपिक के सबसे तेज फर्राटा धावक रहे जमैका के उसैन बोल्ट के खाने से आपको अंदाज हो जाएगा कि आमतौर पर धावक खाने में क्या लेते हैं. बोल्ट की खुराक भरपूर कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन वाले खाने की होती थी. वो ब्रेकफास्ट में कई अंडों का सैंडविच लेते थे. लंच में पास्ता और बीफ या मछली. डिनर में ब्रोकली, चिकन का मीट, जमैकन डंपलिंग.
इसके अलावा बोल्ट दिनभर फ्रूट्स और जूस लेते रहते थे. आमतौर पर दौडऩे वाले एथलीट अपने वजन को कम रखने वाले और मसल्स को मजबूत करने वाली डायट ज्यादा लेते हैं. वहीं जिम्नास्ट सबसे कम खुराक लेते हैं. उनका सुबह का नाश्ता चाय, ओटमील, केले से होता है तो लंच में हल्का फुल्का चिकन और बादाम वाली चाकलेट. डिनर में भी वो मछली, जिंजर ब्रेड और पास्ता की कम मात्रा लेते हैं. क्योंकि ज्यादा खाने से उनके बदन के लचीलेपन पर असर आ सकता है. इसीलिए ज्यादातर जिम्नास्ट आपको पतले दुबले और बला के फुर्तीले नजर आएंगे.

भारतीय खिलाड़ी दूध ज्यादा पीते हैं
आमतौर पर भारतीय एथलीट दूध ज्यादा पीते हैं. बॉक्सर्स की खुराक भारतीय दल में ज्यादा रहती है. आमतौर पर भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक के दिनों में जंकफूड से परहेज करते हैं. भारतीय बॉक्सर एक दिन में 5000 कैलोरी की खुराक लेते हैं. उनका सुबह का नाश्ता 04-05 अंडों. दूध-दलिया, दो ब्रेड-मक्खन और फ्रेश फ्रूट के साथ होता है. लंच और डिनर में वो सूप, चिकन, सब्जी, हैवी, चावल, रोटी, दही आदि लेना पसंद करते हैं. बाक्सर्स मल्टीविटामिन और जूस जरूर रोज लेते हैं.

भारतीय खिलाड़ी अपनी खुराक में दूध का इस्तेमाल काफी ज्यादा करते हैं.

बॉक्सर विजेंद्र क्या खाते थे
भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतने वाले बॉक्सर विजेंद्र सिंह की खुराक कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन वाली होती थी. वह सुबह 04-05 अंडे लेते थे. लंच में दो चपाती, कढ़ाई चिकन, मौसमी सब्जी, फ्रेश फ्रूट्स, दही और थोड़ा चावल लेते थे. डिनर में दो रोटी, एक कटोरी चावल और सब्जियां लेते थे. साथ ही दिन भर कैल्शियम और आयरन के सप्लीमेंट्स.

सुशील अपना खाना लेकर जाते थे
ओलंपिक कांस्य पदक विजेता सुशील कुमार शाकाहारी हैं. वो ब्रेकफास्ट में कार्नफ्लैक्स और दूध के साथ ब्रेड-मक्खन, फ्रेश जूस और मुट्ठी भर बादाम लेते थे. अपना 15 दिनों का खाना वो साथ लेकर जाते थे. ये रेडी टू ईट होता था. लंच और डिनर में वह दो चपाती, कुछ मौसमी सब्जियां, एक कटोरी दही लेते थे. साथ में प्रोटीन रिच सप्लीमेंट्स और मल्टीविटामिन.

मीराबाई चानू की खुराक के बारे में जानिए
मीराबाई ओलंपिक ट्रेनिंग के दौरान और ओलंपिक में अपने मुकाबले से पहले अपनी खुराक को लेकर बहुत सचेत थीं. उनको नियंत्रित और पौष्टिक खुराक तो लेनी ही थी. साथ ही ये भी देखना था कि उनका वजन नहीं बढ़े. मीराबाई 49 किलोवर्ग में हिस्सा लेती हैं.

मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक से लौटने के बाद अपने घर पर खाना खाया और एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की. (Twitter)

आमतौर पर उनका सुबह का नाश्ता एक उबला अंडा और दो ब्रेड स्लाइस के साथ 05 तरह के फ्रूट्स खाती थीं. इसके बाद वो लंच में मछली और मीट लेती थीं लेकिन ये बहुत मात्रा में ही होता था. उनकी मछली भी सालोमन, टूना होती थी. इसके साथ पोर्क बेली भी वह खाने में लेती थीं, जो विशेष तौर पर नार्वे से मंगाया जाता था. उनका रात का डिनर भी लंच जैसा ही होता था. दिन में वो जूस कई बार लेती थीं.
पूरे दो साल तक जंक फूड्स को उन्होंने हाथ तक नहीं लगाया, हालांकि वो ऐसे खाने की बहुत जबरदस्त  दीवानी रही हैं. घर का पारंपरिक खाना दाल, चावल, सब्जी भी उन्होंने नहीं खाया. एक तरह से देखिए तो समझ में आएगा कि ओलंपिक की तैयारी करने वाले खिलाड़ी वाकई कितना समझौता करते हैं.

प्राचीन ओलंपिक में खिलाड़ी क्या खाते हैं
क्या आपको अंदाज है कि प्राचीन ओलंपिक खिलाड़ी खानपान में क्या लेते थे. जो दस्तावेज मिलते हैं, उससे लगता है कि तब भी उनकी खुराक खिलाड़ियों के गुरु और चिकित्सकों द्वारा तय की जाती थी. तब ग्रीक और रोम में ऐसी खुराक खिलाड़ियों द्वारा ली जाती थी, जो अनाज, ओलिव आयल और वाइन से बनी होती थी. दूध को गर्म मौसम में लंबे समय तक रखना मुश्किल होता था लिहाजा उसकी चीज़ का इस्तेमाल होता था, जिससे खिलाड़ियों को प्रोटीन मिलती थी. इस तरह की खुराक उन्हें फाइबर और कार्बोहाइड्रेट की जरूरतों को पूरा करती थी.

ऐसा लगता है कि उन दिनों उनकी खुराक में प्रोटीन और विटामिन की कमी होती थी. क्योंकि इस बात के उल्लेख मिलते हैं कि खिलाड़ियों की आंखों में अक्सर दिक्कत हो जाती थी, तब आंखों में मलहम आदि लगाकर इलाज किया जाता था.

आमतौर पर शाकाहारी थे, मीट बाद में खुराक में शामिल हुआ
ऐसा लगता है कि शुरुआती दौर में खिलाड़ी नम चीज़ और गेहूं से बनी चपाती या नान के साथ मटर, बींस, प्याज, गाजर, चुकंदर और लहसुन आदि खाया करते थे. उस समय उनके खाने वाले फलों में सूखी अंजीर, अंगूर, सेब, नाशपाती और खजूर शामिल थे. शायद खिलाड़ियों के लिए जानवरों के मांस आधारित खुराक बाद में शामिल की गई. इसे लेकर दो रिपोर्ट मिलती हैं.
एक रिपोर्ट में कहा गया कि पैथागोरस नाम के ट्रेनर ने ट्रेनिंग के दौरान अपने खिलाड़ियों को मीट खुराक की सलाह दी. दूसरी रिपोर्ट पौसानियस की है. उसने लंबी दूरी के धावक द्रोमस के बारे में लिखा कि उसने ओलंपिया में दो जीत हासिल की. उसने पहली बार ट्रेनिंग में मीट की खुराक ली.
इससे पहले तक प्राचीन ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले एथलीट चीज़, ताजी सब्जियां और फल ही होते थे. उसके बाद प्राचीन दौर के यूनान के खिलाड़ी बैल, बकरी और हिरन के रेड मीट खाने लगे, जो प्रोटीन के लिहाज से समृद्ध होती थीं. इससे निश्चित तौर पर उनका प्रदर्शन भी बेहतर हो गया.

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