दुनिया की आबादी जितना हर साल बढ़ता है सिंगल यूज़ प्लास्टिक कचरा?

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Updated: September 9, 2019, 3:48 PM IST
दुनिया की आबादी जितना हर साल बढ़ता है सिंगल यूज़ प्लास्टिक कचरा?
सिंगल यूज़ प्लास्टिक कचरे पर बैन की तैयारी में है भारत!

पीएम मोदी (Narendra Modi) ने दुनिया से अपील की कि एक बार इस्तेमाल के बाद कचरा हो जाने वाली प्लास्टिक (Single Use Plastic) से पीछा छुड़ाया जाए. क्या आप जानते हैं कि इस तरह की प्लास्टिक के उत्पादन और कचरे (Plastic Waste) के आंकड़े क्या हैं.

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हम सिंगल यूज़ प्लास्टिक (One Time Use Plastic) यानी एक बार इस्तेमाल के बाद फेंक दी जाने वाली डिस्पोज़बेल प्लास्टिक (Disposable Plastic) के आदी हो चुके हैं. हमारी इस बुरी आदत का सबसे ज़्यादा नुकसान प्रकृति को हो रहा है यानी हमारा ही जीवन संकट में है. सिंगल यूज़ प्लास्टिक (Single Use Plastic) के बारे में अगर आप आंकड़े जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे. इसी के चलते 'क्लाइमेट मीट' कार्यक्रम में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 'ग्लोबल वॉटर एजेंडा' (Global Water Agenda) की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए वन टाइम यूज़ प्लास्टिक का बहिष्कार करने की बात कही.

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मोदी ने कहा कि भारत आने वाले सालों में सिंगल यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद (Plastic Ban) कर देने के हक़ में है और दुनिया को भी अब यही कदम उठाना चाहिए. दुनि09या में प्लास्टिक का जितना उत्पादन (Plastic Production) होता है, उसमें से आधा सिर्फ एक बार इस्तेमाल कर फेंक दी जाने वाली प्लास्टिक का है. इस तरह की डिस्पोज़ेबल प्लास्टिक पर भारत प्रतिबंध (Ban in India) की कैसी पहल करने जा रहा है? दुनिया के कौन से देश इस तरह की पहल कर चुके हैं और ये भी जानिए कि इस प्लास्टिक से जुड़े आंकड़े कितने हैरान करने वाले हैं.

खतरनाक आंकड़े क्या कहते हैं?

पूरी दुनिया में हर मिनट पेयजल से भरी 10 लाख प्लास्टिक बोतलें (Water Bottles) खरीदी जाती हैं. इन बोतलों का ज़्यादातर और कोई इस्तेमाल नहीं होता. सिंगल यूज़ वाले प्लास्टिक बैग्स के बारे में आंकड़ा ये है कि हर साल दुनिया भर में 5 ट्रिलियन ऐसे बैग्स (Plastic Bags) इस्तेमाल किए जाते हैं. इस तरह का प्लास्टिक कचरा जाता कहां है? या तो हमारी धरती पर ज़मीन खा रहा है या फिर पानी में जाकर जलीय जीवन (Aqua Life) और प्रकृति की जल आधारित संरचना को तबाह कर रहा है.

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कैसे बन गया जीवन का हिस्सा?
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पानी की बोतलें, डिस्पेन्सरर्स, बिस्किट ट्रे जैसी वन यूज़ प्लास्टिक की चीज़ें पॉलीएथिलीन टेरेफ्थैलेट नामक केमिकल से बनती हैं. शैम्पू की बोतलें या पाउच, दूध की थैलियां, फ्रीज़र बैग्स और आइस्क्रीम के कंटेनर हाई डेंसिटी पॉलीएथिलीन से बनते हैं. इसके अलावा फूड पैकेजिंग, बोतलों के ढक्कन, कटलरी, प्लेट, कप, चीज़ों को सुरक्षित रखने वाली पैकेजिंग जैसे सामान घातक कैमिकल्स से बनते हैं, जो हमारे इस्तेमाल के लिए तो खतरनाक हैं ही, जब फेंके जाते हैं तो पूरे पर्यावरण के लिए घातक साबित होते हैं.

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पानी की बोतलें, डिस्पेन्सरर्स, बिस्किट ट्रे जैसी वन यूज़ प्लास्टिक की चीज़ें पॉलीएथिलीन टेरेफ्थैलेट नामक केमिकल से बनती हैं.


कैसे होते चले गए हम इसके आदी?
बीसवीं सदी से इक्कीसवीं सदी में आने की त्रासदी की कहानी इस प्लास्टिक वेस्ट से जोड़कर देखें. 1950 से 70 के दशक के बीच बहुत कम प्लास्टिक उत्पादन था, जिसका प्रबंधन करना आसान था. इसके बाद अगले दो दशकों में यानी 90 के दशक के अंत तक प्लास्टिक उत्पादन और प्लास्टिक कचरे में तीन गुना बढ़ोतरी हो गई. 2000 के दशक में पिछले 40 सालों में जितना प्लास्टिक कचरा था, केवल एक दशक में उससे ज़्यादा पैदा हुआ.

मनुष्यों के वज़न बराबर हर साल कचरा!
ताज़ा हालात का आंकड़ा ये है कि हम 300 मिलियन यानी 30 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा हर साल फेंक रहे हैं. इसे आप ऐसे भी समझेंगे तो हैरान होंगे कि ये भार पृथ्वी पर मनुष्यों की कुल आबादी के भार के बराबर है. यानी मनुष्यों की कुल आबादी के भार के बराबर हर साल प्लास्टिक कचरा पृथ्वी की छाती पर जमा हो रहा है. अनएन्वायरन्मेंट पोर्टल पर एक रिसर्च के हवाले से कहा गया है कि 1950 के दशक से अब तक करीब 8.3 अरब टन प्लास्टिक उत्पादन हुआ है और इसका 60 फीसदी कचरे के रूप में पृथ्वी पर फैला है.

​कहां सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर उठाए गए कदम?
दुनिया में कुल 15 शहर या राज्य या देश ऐसे हैं, जहां वन टाइम यूज़ प्लास्टिक को लेकर प्रतिबंधात्मक एक्शन लिये गए हैं. केन्या में 2017 में सबसे कड़ा प्रतिबंध लगाया गया और कहा गया कि प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल, खरीदी या बिक्री और उत्पादन करने पर 38 हज़ार डॉलर तक का जुर्माना या 4 साल तक की जेल होगी. यूके में 2018 में ग्लोबल गोल्ड स्टैंडर्ड हासिल करने के लिए 25 सालों के एक वृहद प्लान का ऐलान किया गया.

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वन टाइम यूज़ प्लास्टिक को लेकर केन्या में 2017 में सबसे कड़ा प्रतिबंध लगाया गया.


ताइवान, मॉंट्रियाल, वनुआटू, ज़िम्बाब्वे, मलिबू जैसे स्थानों पर भी प्लास्टिक वेस्ट संबंधी कारगर कदम उठाए गए हैं. पिछले साल सिएटल अमेरिका का पहला राज्य बना जहां प्लास्टिक स्ट्रॉज़ और प्लास्टिक के वन टाइम यूज़ किए जाने वाले बर्तनों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया. साथ ही, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रेलियाई राजधानी क्षेत्र, उत्तरी क्षेत्र और तस्मानिया के कई हिस्सों में सिंगल यूज़ प्लास्टिक को बैन किया जा चुका है.

मोरक्को में घातक आंकड़े के बाद लगा बैन
कनाडा में 2018 में लिये गए फैसले के मुताबिक प्लास्टिक माइक्रोबीड्स के उत्पादन को बेहद सीमित कर दिया गया है. मोरक्को में 2016 का आंकड़ा आया था कि एक साल में 3 अरब प्लास्टिक बैग्स का इस्तेमाल हुआ यानी आबादी के हिसाब से 900 बैग्स प्रति व्यक्ति. इस आंकड़े के बाद मोरक्को में प्लास्टिक बैग्स को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया. इसके अलावा, रवांडा, हैमबर्ग और फ्रांस ने भी प्लास्टिक बैन को लेकर कारगर कदम उठाए.

दिल्ली में हो चुकी है पहल
भारत की राजधानी नई दिल्ली 2017 में जब दुनिया का वह शहर घोषित हुई, जहां हवा की क्वालिटी सबसे खराब पाई गई थी, तब सिंगल यूज़ प्लास्टिक बैन किया गया था, जो पूरे एनसीआर में लागू हुआ. हाल में, 'मन की बात' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्लास्टिक के खिलाफ पूरे देश में एक सघन अभियान छेड़ने की इच्छा जताई है और कहा जा रहा है कि इस साल गांधी जयंती से ये मुहिम शुरू हो सकती है. वहीं, न्यूयॉर्क में भी प्लास्टिक बैग्स पर प्रतिबंध को लेकर एक बिल पर विचार जारी है.

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First published: September 9, 2019, 3:48 PM IST
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