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प्रत्यर्पण कानून रद्द, ​हांगकांग के नौजवानों से क्यों हार गया चीन?

पांच महीनों तक हांगकांग में विशाल विरोध प्रदर्शन हुए.

पांच महीनों तक हांगकांग में विशाल विरोध प्रदर्शन हुए.

चीन (China) की इस घोषणा के बावजूद आसार हैं कि हांगकांग (Hong Kong) में ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन जारी रह सकते हैं. जानिए कि अब हांगकांग आंदोलन (Hong Kong Movement) किस मोड़ पर खड़ा है.

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    हांगकांग के सामने झुकते हुए चीन ने प्रत्यर्पण संबंधी विवादित कानून (Extradition Law) को वापस ले लिया है. करीब पांच महीनों से हांगकांग की युवा और छात्रों की आबादी ने चीन के खिलाफ आंदोलन (Hong Kong Protests) छेड़ रखा था, जिसमें लाखों लोग कई बार सड़कों पर उतरे थे. इस आंदोलन को कुचलने की तमाम कोशिशों के बाद अब चीन ने विवादित कानून (Controversial Law) को रद्द कर देने की घोषणा की है. यह ऐतिहासिक है क्योंकि संभवत: पहली बार चीन ने किसी बड़े आंदोलन को लेकर कदम वापस लिया है. जानिए कि लोकतंत्र समर्थकों (Pro Democracy) के लिए इसे कितनी बड़ी जीत माना जाना चाहिए? चीन के इस कदम के बाद क्या हालात होने के आसार हैं और क्या अब विरोध प्रदर्शन थम जाएंगे.

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    क्या था प्रत्यर्पण कानून? जिसका हुआ विरोध
    हांगकांग में जिस कानून के विरोध के लिए महीनों तक लाखों की तादाद में प्रदर्शनकारी बार बार सड़कों पर उतरे, उस प्रस्तावित कानून के मुताबिक चीन को अधिकार ​होता कि वह हांगकांग के किसी भी पलायक नागरिक यानी किसी और देश के नागरिक का प्रत्यर्पण कर सके. इस कानून को मानव अधिकारों (Human Rights) और लोकतंत्र के लिए खतरा माना जा रहा था क्योंकि ताइवान (Taiwan) समेत यूएन (United Nations), अमेरिका (USA) और कई नामचीन संस्थाएं इस कानून के बारे में चीन को पहले ही चेता चुकी थीं.

    ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शनों के बाद नीति निर्माताओं ने कहा था कि कानून लागू नहीं किया गया और दूसरे ड्राफ्ट की तैयारी थी. दूसरे ड्राफ्ट के बाद इस पर बहस करवाने और लोगों के हित में कानून बनने के बाद ही इसे लागू किए जाने की बात भी चीन ने की थी. लेकिन, विशेषज्ञों का मानना रहा कि इस कानून के बाद नागरिकों की सुरक्षा और उनकी सुनवाई की गारंटी नहीं होगी और चीन अपनी मनमानी करते हुए प्रत्यर्पण करने का अधिकार हथिया लेगा. इन आशंकाओं से उपजे डर के चलते हांगकांग में भारी विरोध प्रदर्शन होते रहे.

    तो क्या अब थम जाएगा हंगामा?
    चीन ने प्रत्यर्पण कानून को रद्द करने औपचारिक घोषणा कर दी है लेकिन पिछले पांच महीनों में चीन के इस कानून के चलते शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में समय के साथ और भी मांगें जुड़ चुकी हैं. इस कानून को वापस लिये जाने की मांग तो पूरी हुई है लेकिन अभी चार मांगें बाकी हैं. आंदोलनों के दौरान पुलिस की बर्बरता की स्वतंत्र जांच, गिरफ्तार आंदोलनकारियों की बगैर शर्त रिहाई, आंदोलन को दंगे का लेबल न देने और शहर के नेता के सीधे चुनाव की मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं.

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    हांगकांग की अधिकारी और नेता कैरी लैम को भी बर्खास्त करने जा रहा है चीन.


    इन मांगों के बावजूद आंदोलन की सबसे बड़ी लड़ाई में हांगकांग के युवा आंदोलनकारियों को जीत मिली है. इसके बावजूद आंदोलन पूरे जोशो खरोश के साथ जारी रह सकता है. इसकी वजह ये है कि हांगकांग के युवा आंदोलनकारियों ने साफ कह दिया है कि 'पांच मांगें हैं और किसी पर भी कोई समझौता नहीं' होगा.

    ये चीन की हार या हांगकांग की जीत?
    अपनी दमनकारी नीतियों के लिए जाने जाते रहे चीन के लिए ये कानून वापस लिया जाना निश्चित तौर पर हांगकांग के युवाओं की बड़ी जीत है. दूसरी बात खबरें ये कह रही हैं कि हांगकांग की नेता कैरी लैम को चीन हटाकर अंतरिम कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी.

    अस्ल में लैम वही अधिकारी हैं जिन्होंने हांगकांग के लिए तय 'एक देश दो सिस्टम' वाली नीति को दरकिनार कर प्रत्यर्पण संबंधी कानून का मसौदा तैयार किया था, जिसके खिलाफ आंदोलन भड़का. कुछ खबरें ये भी कह रही हैं कि चीन और हांगकांग में लैम के कदम को कई जानकार और सत्ताधारी 'गलत' करार दे रहे हैं. अब भी इसे जीत या हार के नज़रिए से देखना जल्दबाज़ी हो सकती है क्योंकि न तो अभी आंदोलन खत्म हुआ है और न ही चीन ने सभी मांगें मानकर किसी शांति वार्ता की घोषणा की है.

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