दुनिया में जलसंकट: कहीं फैल रहा है रेगिस्तान तो कहीं पानी के लिए जंग की नौबत

#MISSIONPAANI : सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व एशिया से लेकर चीन तक जलसंकट के हालात पर नज़र डालती रिपोर्ट. पढ़ें पानी से जुड़ी समस्याओं की चपेट में कैसे पूरी दुनिया आती जा रही है.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: July 10, 2019, 9:04 PM IST
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: July 10, 2019, 9:04 PM IST
'जल है तो कल है', 'बूंद बूंद है कीमती'.. जैसे स्लोगन और संदेश बरसों से प्रसारित किए जाने के बावजूद आज हम उस मोड़ पर खड़े हैं, जिसके आगे पानी का दूर दूर तक नामो-निशान नज़र नहीं आ रहा. दिख रहा है तो निराशा का एक बंजर, खतरों का एक पथरीला रास्ता... भारत, खास तौर से चेन्नई जैसे कुछ शहर पानी की बूंद बूंद को तरस रहे हैं और गर्मी के लंबे खिंचने के बाद मानसून का देश के बड़े हिस्से पर मेहरबान न होना एक और निराशा पैदा कर रहा है. लेकिन, जलसंकट क्या सिर्फ भारत की ही मुसीबत है या दुनिया के और भी देश इसकी चपेट में हैं? आइए, इस सवाल का जवाब तलाशें और पड़ताल करें कि कहां कैसे हालात हैं.

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मिशन पानी के अंतर्गत चेन्नई, मराठवाड़ा, विदर्भ, राजस्थान, मध्य भारत और उत्तर भारत के जलसंकट कई कहानियां न्यूज़ 18 लगातार आप तक पहुंचा रहा है. अब आपको ये समझने की ज़रूरत है कि तस्वीर और भी ज़्यादा भयानक है क्योंकि जलसंकट सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों को अपनी चपेट में ले चुका है या ले रहा है. एक तरफ ग्लोबल वॉर्मिंग और क्लाइमेट चेंज के कारण हर जगह तापमान बेतहाशा बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ, ज़मीन के भीतर का पानी लगातार सूख रहा है.

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बात सिर्फ भारत या दक्षिण एशिया की नहीं रही, बल्कि दुनिया के कई देशों के जलसंकट के किस्से सुनकर आप हैरान रह सकते हैं. ठंडा देश रहा फ्रांस इस साल 45 डिग्री तापमान तक झुलस चुका है. वहीं अफ्रीका के कई देशों में पीने के पानी के लिए हाहाकार की नौबत आ रही है. कहीं फैलता जाता रेगिस्तान सबूत दे रहा है कि भूमिगत जलस्टर यानी अंडरग्राउंड वॉटर लेवल किस तेज़ी से घट रहा है तो कहीं बढ़ती गर्मी इशारा दे रही है कि आने वाला समय कितना मुश्किल होगा.

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चेन्नई की पुझल झील पूरी सूख चुकी है.

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मोरक्को और अफ्रीका में जलसंकट
उत्तरी अफ्रीका के कई देशों की तरह मोरक्को बार बार सूखे और पानी के अभाव की समस्या से जूझ रहा है. वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट कहती है कि मोरक्को के दूसरे सबसे बड़े रिज़र्वायर अल मसीरा का 60 फीसदी हिस्सा पिछले तीन सालों में सिकुड़ चुका है. आंकड़े कह रहे हैं कि 2050 तक मोरक्को में पानी की मांग में 60 से 100 फीसदी तक इज़ाफा हो जाएगा और पानी की उपलब्धता घट जाएगी. मोरक्को की 33 फीसदी आबादी कृषि संबंधी रोज़गार पर निर्भर है, तो स्थिति ये है कि यहां रोज़गार से लेकर जीने तक का संकट सामने खड़ा है.

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दुनिया में बेसलाइन जलसंकट का नक्शा.


इराक और मध्य पूर्व के हालात
1990 के दशक के अंत से इराक का मोसुल बांध 60 फीसदी तक सिकुड़ चुका है. इराक और मध्य पूर्व में लगातार रही युद्ध की स्थिति के कारण यहां विकास और संरक्षण को लेकर ज़्यादा काम नहीं हो सके हैं, जिसके भयानक अंजाम अब सामने दिख रहे हैं. इराक के लाखों लोग सिर्फ टिगरिस और यूफरेट्स नदियों पर निर्भर करते हैं और इन दोनों नदियों पर तुर्की में सबसे ज़्यादा बांध बने हुए हैं.

डब्ल्यूआरआई की रिपोर्ट के मुताबिक इराक में पानी के लिए प्रतियोगिता और जंग के हालात पैदा हो रहे हैं और क्लाइमेट चेंज के कारण और बदतर होने की तरफ हैं. यही स्थिति अफगानिस्तान तक बन रही है और दुबई जैसे महानगर तो जलस्रोतविहीन हो ही चुके हैं. ये भी माना जा रहा है कि मध्य और दक्षिण इराक में रेगिस्तान के फैलते जाने का कारण जलसंकट ही है.

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मध्य और दक्षिण इराक में जलसंकट के कारण रेगिस्तान फैलता जा रहा है.


स्पेन में जलसंकट के हालात
पिछले पांच सालों में स्पेन का बुएंडिया बांध 60 फीसदी तक सूख चुका है. इससे बन रहे सूखे के हालात के चलते प्रांतीय झगड़े बढ़ रहे हैं. नदियों के सूखने, फसलों के तबाह होने और जंगल की आग जैसी घटनाओं को लेकर स्पेन और पुर्तगाल के बीच अंदरूनी जंग चल रही है. पानी की कमी के कारण स्पेन के बड़े हाइड्रॉलिक पावर प्लांट के उत्पादन में 58 फीसदी तक कमी आ चुकी है. यहां आने वाले समय में भयानक सूखे लगातार पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

पाकिस्तान में जलसंकट
90 फीसदी आबादी सिंधु नदी के बेसिन पर निर्भर करती है, जिससे पाकिस्तान के लिए सिंचाई, जल आपूर्ति की व्यवस्था होती है. दूसरा आंकड़ा ये है कि पाकिस्तान में 1000 दिनों की पानी स्टोरेज की मानक क्षमता की जगह सिर्फ 30 दिनों के लिए पानी स्टोरेज की व्यवस्था है. और तीसरी बात ये है कि पाकिस्तान की आबादी इस सदी के अंत तक दस गुनी बढ़ जाएगी, जिसके लिए पानी की उपलब्धता का कोई इंतज़ाम पाकिस्तान के पास नहीं है. वर्तमान में भी पाकिस्तान के कई इलाके जलसंकट की चपेट में हैं.

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एक स्टडी के मुताबिक पाकिस्तान की आबादी इस सदी के अंत तक दस गुनी होने का अनुमान है.


चीन में पानी की कहानी
जल संसाधनों की बात करें तो चीन में ओवरऑल सब ठीक दिखता है. प्रति व्यक्ति के हिसाब से 2000 क्यूबिक मीटर से ज़्यादा पानी की उपलब्धता कहती है कि यहां जलसंकट नहीं है क्योंकि अगर यह आंकड़ा 1700 क्यूबिक मीटर होता तो जलसंकट समझा जाता. लेकिन समस्या ये है कि दक्षिण चीन में देश का 80 फीसदी पानी है. इस वजह से उत्तरी चीन के 8 प्रांत बुरे जलसंकट से ग्रस्त हो चुके हैं, चार में जलसंकट सामने खड़ा है और दो प्रांत रेगिस्तान हैं. यानी कुल आबादी का ज़्यादा हिस्सा जलसंकट के खतरे का सामना कर रहा है.

अब यूरोप की बात करें
यूरोप में पानी की कहानी क्षेत्र अनुसार है. मध्य और उत्तरी यूरोप में क्लाइमेट चेंज के चलते मौसम बदल रहे हैं. उदाहरण के तौर पर इस साल फ्रांस में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया, जो पहले कभी नहीं हुआ था. मौसमों के अध्ययन के मुताबिक कहा जा रहा है कि बेल्जियम, फ्रांस और यूके जैसे देशों में बाढ़ तक की नौबत जल्दी आ सकती है. दूसरी तरफ, यूरोप के कई देशों साइप्रस, ग्रीस, स्पेन, इटली और तुर्की में अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो भारी जलसंकट और सूखे की समस्या दूर नहीं है.

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पेयजल से जुड़े उपलब्धता व अस्वच्छता के कारणों से हर रोज़ 800 बच्चों की मौत हो रही है.


कुल मिलाकर, कहानी ये है कि दुनिया भर में रिज़र्वायर सिकुड़ रहे हैं. कुछ तेज़ी से तो कुछ धीरे धीरे. जहां तालाबों, झीलों और कुओं का चलन रहा है, वहां ये जलस्रोत भी संकटग्रस्त हैं और भूमिगत जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है. डब्ल्यूआरआई के मुताबिक ये सही वक्त है कि एक अंतर्राष्ट्रीय सिस्टम बने जो रिज़र्वायरों की लगातार मॉनीटरिंग करे. अभी आंकड़े ये हैं कि दुनिया में 85 करोड़ से ज़्यादा आबादी पीने के पानी के संकट से जूझ रही है. पेयजल से जुड़े उपलब्धता व अस्वच्छता के कारणों से हर रोज़ 800 बच्चों की मौत हो रही है और 2.3 अरब लोग मूलभूत स्वच्छता के अभाव में जी रहे हैं.

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