क्यों कई लोगों के लिए 80 के दशक में मर चुके थे नेल्सन मंडेला?

दक्षिण अफ्रीका के महात्मा गांधी कहे गए नेल्सन मंडेला के बारे में आप कितना जानते हैं? दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति और दुनिया के महान नेता रहे मंडेला की 101वीं जयंती पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें जानें.

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Updated: July 18, 2019, 9:06 AM IST
क्यों कई लोगों के लिए 80 के दशक में मर चुके थे नेल्सन मंडेला?
एक दीवार पर बना नेल्सन मंडेला का चित्र.
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Updated: July 18, 2019, 9:06 AM IST
"मैं आज़ाद होने की भूख के साथ नहीं, मैं तो आज़ाद ही जन्मा था. हर मुमकिन तरह से मैं आजाद था. आजादी थी मेरी मां की कुटिया के सामने वाली पगडंडियों पर दौड़ लगाने की. मैं आज़ाद था अपने गांव से गुज़रने वाले साफ सुथरे झरनों में तैरने के लिए, लेकिन बचपन की आजादी महज़ छलावा थी. बतौर नौजवान मैं समझने लगा कि मेरी आज़ादी छीन ली गई है. तब मुझमें आज़ादी की भूख जगने लगी."
- नेल्सन मंडेला

27 साल जेल में रहकर दक्षिण अफ्रीका में आज़ादी और लोकतंत्र बहाल करने के लिए संघर्ष करने वाले नेल्सन मंडेला दुनिया के यादगार नेताओं में शुमार रहे हैं. उन्हें कभी दक्षिणी अफ्रीका का फादर ऑफ नेशन कहा गया तो कभी दक्षिण अफ्रीका का गांधी. जी हां, मार्टिन लूथर किंग की तरह मंडेला भी गांधीवादी विचार के समर्थक और अनुयायी रहे. साथ ही, कार्ल मार्क्स जैसे विचारकों का प्रभाव भी उनकी विचारधारा पर रहा.

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नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को दक्षिण अफ्रीका के टेंबू के राजपरिवार से जुड़े घराने में हुआ था. लेकिन, नौजवानी की उम्र से ही उन्होंने तमाम यातनाएं और पीड़ाएं सहीं और देश के लिए कठिन संघर्ष किया. इसके बावजूद मंडेला खुशमिज़ाज बने रहे. नेल्सन मंडेला की जयंती पर उनकी ज़िंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें.

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जिसके व्यक्तित्व के सब कायल थे
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रंगभेद, अत्याचार और लोकतंत्र की लड़ाई के लिए मंडेला 2 दशक से ज़्यादा लंबे समय तक जेल में रहे. बावजूद इसके जिन लोगों ने उन्हें जेल में बंद रखा, उनके प्रति भी उनके मन में कोई कड़वाहट नहीं थी. वे हमेशा खुशमिजाज़ रहे और उनके व्यक्तित्व ने पूरी दुनिया को रिझाया. राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने HIV और एड्स के खिलाफ जंग लड़ी और अफ्रीका के लिए फुटबॉल विश्व कप (2010) की मेज़बानी हासिल करने में खास भूमिका अदा की.

जब शिक्षक ने बदला उनका नाम
मंडेला मदीबा कबीले से ताल्लुक रखते थे और अफ्रीका में उन्हें उनके कबीले के नाम यानी 'मदीबा' कहकर ही बुलाया जाता था. कबीले ने उनका नाम रोलिहलाहला दालिभंगा रखा था लेकिन उनके स्कूल के एक शिक्षक ने उनका नाम नेल्सन रखा. उनके पिता थेंबू राजपरिवार में सलाहकार थे और जब उनकी मृत्यु हुई तो नेल्सन मंडेला नौ साल के थे.

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एड्स से हुई थी बेटे की मौत
रूढ़िवादी और पिछड़े दक्षिण अफ्रीकी समाज के बावजूद उन्होंने साल 2005 में सार्वजनिक रूप से कहा कि उनके बेटे मौत एड्स की बीमारी से हुई है. उन्होंने दक्षिणी अफ़्रीकी लोगों से अपील की कि वो एड्स बीमारी के बारे में खुलकर बात करें. उसे हिकारत की नज़र से देखने की बजाए, एक आम बीमारी की तरह देखें.

इन बातों से बनाया मंडेला को महान नेता
1. ज़िंदगी भर मैंने रंगभेद के खिलाफ संघर्ष किया. मैं उस एहसास को लेकर रोमांचित रहा, जहां एक लोकतांत्रिक और आज़ाद समाज में लोग समान अधिकार के साथ खुशी से रहते हैं. इस एहसास के लिए मैं मरने तक के लिए तैयार हूं.
2. सबके लिए इंसाफ हो, सबके लिए शांति हो, सबको काम मिले, खाना हो, पानी हो, नमक हो. कभी भी ऐसा ना हो कि ये खूबसूरत धरती दूसरे के हाथों कुचली जाए, उसके साथ जानवर की तरह बर्ताव किया जाए. आज़ादी का एहसास बना रहे.
3. नस्लभेद इंसानियत पर धब्बा है. ये एहसास कि दूसरे हमसे कमज़ोर हैं, ये कि कुछ लोग खुद को दूसरों से ज्यादा सक्षम मानें, सामने वाले के साथ इंसान की तरह बर्ताव न करें, उन लोगों से इंसानियत छीन लेता है, जो खुद को भगवान मानते हैं.
4. हमने बेहतर ज़िंदगी की नींव रखी है. मैं नेताओं की उस पीढ़ी से हूं, जिनके लिए लोकतंत्र हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती था.
5. गरीबी खत्म करना समाजसेवा नहीं, बल्कि इंसाफ देने की तरह है. ये मूलभूत अधिकार की रक्षा है, दूसरों को सम्मान के साथ जिंदगी जीने का अधिकार देने की तरह है. जब तक गरीबी रहेगी, असली आज़ादी नहीं मिल पाएगी.

मानवता के लिए मंडेला की विरासत
मंडेला 1999 में सक्रिय राजनीति से हट गए लेकिन मानवता के लिए उनका संघर्ष जारी रहा. नेल्सन मंडेला फाउंडेशन के साथ काम करते हुए उन्होंने दुनिया को बड़ी विरासत तोहफे में दी. नेल्सन मंडेला चिल्ड्रेन्स फंड, मंडेला रोड्स फाउंडेशन, मंडेला इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशन एंड रूरल डेवेलपमेंट, 46664 कैंपेन के जरिये दूसरे देशों में भी मानवता से जुड़े हर संघर्ष को मडीबा का सहयोग, समर्थन और हौसला हासिल हुआ.

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ये भी जानें कि 'मंडेला इफेक्ट' क्यों चर्चित रहा
पश्चिमी दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इस भ्रम में रहा कि चैंपियन मुक्केबाज़ मुहम्मद अली की मौत साल 2008 में ही चुकी थी, और नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बनने से पहले ही स्वर्ग सिधार चुके थे. इस बात को लोग पैरलल यूनिवर्स की गढ़ी-गढ़ाई थ्योरी से भी जोड़ते रहे थे. तब पैरानॉर्मल कंसल्टेंट और घोस्ट हंटर फिओना ब्रूम ने दावा किया था कि ज़िंदगी में 'फेक मेमरीज़' का अहम हिस्सा होता है. वो चीज़ों को अपने हिसाब से तय करती है और फिर दिमाग में उन्हें बसा देती है.

इन 'फेक मेमरीज़' की दुनिया को ही ब्रूम ने पैरलल यूनिवर्स और फिर मंडेला इफेक्ट का नाम दिया. गौरतलब है कि 1980 के दशक में मंडेला की मौत की अफ़वाह उड़ी थी और दुनिया के कई लोग लंबे समय तक मानते रहे थे कि मंडेला की मौत हो चुकी थी, जबकि वास्तव में 2013 में मंडेला की मौत हुई. हालांकि एक लेखक ने कहा था कि जो महान जीवन जीते हैं, वो कभी नहीं मरते, अपने विचारों से वो लोग हमेशा ज़िंदा रहते हैं. और मंडेला के बारे में यकीनन ये कहा जा सकता है.

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First published: July 18, 2019, 9:05 AM IST
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