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जानें कैसा है वो बांध जो चीन की मदद से गिलगित-बाल्टिस्‍तान में बनाना चाहता है पाकिस्तान

जानें कैसा है वो बांध जो चीन की मदद से गिलगित-बाल्टिस्‍तान में बनाना चाहता है पाकिस्तान

लोगों ने नदियों को बचाने के लिए #SaveRiversSaveAJK कैंपेन शुरू कर दिया है.

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चीन पाकिस्‍तान की मदद से पाक अधिकृत कश्‍मीर में लगातार अपना दबदबा बढ़ा रहा है. अब दोनों देशों के बीच गिलगित-बाल्टिस्‍तान में सिंधु नदी पर बांध बनाने की परियेाजना को लेकर 5.8 अरब डॉलर का सौदा हुआ है. भारत पीओके और गिलगित-बाल्टिस्‍तान में ऐसी किसी भी परियोजना पर आपत्ति जताता रहा है.

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    चीन पाक अधिकृत कश्‍मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्‍तान (Gilgit-Baltistan) में लगातार अपना दबदबा बढ़ाने की कवायद में जुटा रहता है. इसी क्रम में अब उसने पाकिस्‍तान (Pakistan) के साथ अरबों डॉलर लागत वाले डायमर-भाषा डैम को बनाने का करार कर लिया है. पाकिस्‍तान पिछले 40 साल से इस डैम को बनाने की योजना को सिरे चढाना चाहता था, जो अब पूरी होती दिख रही है. लेकिन समस्‍या ये है कि डैम उस गिलगित-बाल्टिस्‍तान में बनाने का करार हुआ है, जिस पर भारत अपना दावा करता रहा है. भारत ने सिंधु नदी पर बांध बनाने को लेकर हुए समझौत पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पाकिस्तान (Pakistan) के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में ऐसी परियोजनाएं शुरू करना ठीक नहीं है. बता दें कि इस बांध का बजट 1406 अरब पाकिस्तानी रुपये है. चीन (China) और पाकिस्‍तान के बीच हुए समझौते के मुताबिक, इस परियोजना को 2028 तक पूरा किया जाना है. जानते हैं कि बांध में क्‍या-क्‍या होगा?

    चीन और पाकिस्‍तान की सेनाओं का ज्‍वाइंट वेंचर बनाएगा बांध
    गिलगित-बाल्टिस्तान में डायमर-भाशा बांध (Diamer-Bhasha Dam) बनाने के लिए चीन और पाकिस्‍तान के बीच 5.8 अरब डॉलर का सौदा हुआ है. बांध परियोजना के लिए पाकिस्‍तानी सेना की सहायक कंपनी फ्रंटियर वर्क ऑर्गनाइजेशन और चीन की पावर चाइना के नेतृत्व में एक ज्‍वाइंट वेंचर के साथ करार हुआ है. सीधे तौर पर ये दोनों देश की सेनाओं का ज्‍वाइंट वेंचर है. पाकिस्‍तान के समाचारपत्र द डॉन के मुताबिक, इस बांध पर कुछ हफ्तों में काम शुरू कर दिया जाएगा. पाकिस्‍तान सिंधु नदी पर बांध बनाने के लिए दशकों से संघर्ष कर रहा था, लेकिन भारत के विरोध के चलते किसी भी अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍थान या देश से इसके लिए आर्थिक मदद हासिल नहीं कर पा रहा था. इस समय भी वर्ल्‍ड वैंक (World Bank) और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने भारत के विरोध को देखते हुए परियोजना से दूरी बनाकर रखी हुई है.

    272 मीटर ऊंचे डैम में पानी की निकासी के लिए 14 गेट होंगे. साथ ही जलाशय में जमने वाली सिल्‍ट को बहाने के लिए अलग से व्‍यवस्‍था होगी.


    हर साल किया जा सकेगा 18.1 अरब यूनिट बिजली का उत्‍पादन
    परियोजना के तहत प्रस्‍तावित बांध की ऊंचाई 272 मीटर होगी. पाकिस्‍तान डिफेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी स्‍टोरेज क्षमता 81 लाख एकड़ फीट होगी. इसे रोलर कॉम्‍पैक्‍ट कंक्रीट (RCC) तकनीक से बनाया जाएगा. माना जा रहा है कि इस तकनीक से बनाया जाने वाला यह दुनिया का सबसे ऊंचा डैम होगा. इसमें पानी की निकासी के लिए 14 गेट होंगे. साथ ही जलाशय (Reservoir) में जमने वाली सिल्‍ट को बहाने के लिए डैम में अलग से व्‍यवस्‍था होगी. डैम के डायवर्जन सिस्‍टम में दो टनल और एक नहर होगी. इन तीनों की लंबाई एक-एक किमी होगी. बांध के निर्माण के दौरान बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए यहां 21 मेगावाट का पावर प्‍लांट बनाया जाएगा. परियोजना पर काम करने वाले ज्‍वाइंट वेंचर में चीन की हिस्‍सेदारी 70 फीसदी होगी. इस परियोजना की बिजली उत्‍पादन क्षमता 4,500 मेगावाट होगी. यहां से हर साल 18.1 अरब यूनिट बिजली का उत्‍पादन हो सकेगा.

    बांध परियोजना के लिए पिछले साल हो चुका है भूमि-अधिग्रहण
    डायमर-भाषा परियोजना के लिए जनवरी, 2019 में ही करीब 32,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है. इसमें 31,977 एकड़ क्षेत्र गिलगित-बाल्टिस्‍तान में, जबकि 162 एकड़ हिस्‍सा खैबर पश्‍तूनख्‍वा में है. अधिग्रहीत भूमि परियेाजना के लिए जरूरी कुल भूमि की 86 फीसदी है. इस परियोजना के लिए पाकिस्‍तान ने वर्ल्‍ड बैंक से भी मदद मांगी थी. तब वर्ल्‍ड बैंक ने भारत से नो-ऑब्‍जेक्‍शन सर्टिफिकेट हासिल करने को कहा था. पाकिस्‍तान ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया थाा. वहीं, एडीबी ने 2016 में ही परियोजना की जगह को लेकर विवाद के कारण आर्थिक मदद देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद जुलाई 2018 में पाकिस्‍तान के सुप्रीम कोर्ट ने डैम के लिए चंदा जुटाने को एक फंड बना दिया था. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डैम के लिए चंदा देने की अपील की गई थी. बताया जाता है कि इस बांध की परिकल्पना 1980 में की गई थी. हालांकि, इसके निर्माण की मंजूरी 2006 में पूर्व सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने दी थी.

    इस बांध की परिकल्पना 1980 में की गई थी, लेकिन इसके निर्माण की मंजूरी 2006 में पूर्व सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने दी थी.


    भारत पीओके में ऐसी परियोजनाओं पर जताता रहा है आपत्ति
    पाकिस्‍तान और चीन 60 अरब डॉलर के आर्थिक गलियारे का भी निर्माण कर रहे हैं. भारत पीओके से होकर जाने वाले इस गलियारे को लेकर चीन के सामने आपत्ति जता चुका है. भारत के विदेश मंत्रालय ने बृहस्‍पतिवार को कहा कि हमारा रुख जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों को लेकर स्‍पष्‍ट है. ये सभी क्षेत्र भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं. हम पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों में ऐसी सभी परियोजनाओं पर पाकिस्तान और चीन दोनों के सामने अपना विरोध व साझा चिंताएं व्यक्त करते रहे हैंः भारत ने कहा कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में ऐसी परियोजनाएं शुरू करना ठीक नहीं है. वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियांग ने कहा कि कश्मीर मुद्दे पर चीन का रुख साफ है. चीन-पाकिस्तान आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए आर्थिक सहयोग कर रहे हैं. चीन पाक अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान की मदद से दबदबा बढ़ाने में लगा है.

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    Tags: China and pakistan, CPEC, India china, India pakistan, Pakistan occupied kashmir, River

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