जानें कितनी होती है स्पीकर की सैलरी और मिलती हैं क्या खास सुविधाएं

लोकसभा स्पीकर के वेतन, पेंशन, स्टेटस और सुविधाएं किस तरह की होती हैं? सांसद ओम बिड़ला के स्पीकर चुने जाने के बाद इस पद से जुड़ी कुछ दिलचस्प जिज्ञासाओं का जवाब यहां जानिए.

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Updated: June 20, 2019, 2:41 PM IST
जानें कितनी होती है स्पीकर की सैलरी और मिलती हैं क्या खास सुविधाएं
नवनियुक्त लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला. फाइल फोटो.
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Updated: June 20, 2019, 2:41 PM IST
राजस्थान के कोटा से सांसद ओम बिड़ला को लोकसभा का स्पीकर बनाए जाने की खबरों के बाद क्या आपके मन में ये सवाल उठ रहे हैं कि लोकसभा स्पीकर का स्टेटस क्या होता है? यानी उसकी सैलरी, सुविधाएं किस तरह की होती हैं? एक स्पीकर की हैसियत क्या बाकी सांसदों की तरह ही होती है या कुछ अलग? ऐसे सवालों का जवाब यहां जानिए.

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एक स्पीकर को कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक पूर्ण सुविधायुक्त आवास और दफ्तर मुहैया कराए जाने का प्रावधान है. इसके अलावा कुछ मामलों में स्पीकर को एक सांसद जैसी सुविधाएं या भत्ते ही मिलते हैं, तो कुछ मामलों में स्पीकर को कैबिनेट सदस्य के समकक्ष माना जाता है. ज़ाहिर तौर पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसी सुविधाएं उसे नहीं मिलतीं. कुल मिलाकर एक स्पीकर का स्टेटस कैबिनेट सदस्य जैसा होता है, लेकिन वो होता तो सांसद ही है.

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कितनी होती है स्पीकर की सैलरी और पेंशन?
चूंकि स्पीकर भी संसद का सदस्य होता है इसलिए उसे भी सैलरी अलाउंस एंड पेंशन ऑफ पार्लियामेंट एक्ट 1954 में दिसंबर 2010 में हुए संशोधन के तहत ही सांसदों की तरह सैलरी मिलती है. यानी लोकसभा स्पीकर को वर्तमान में 50 हज़ार रुपये प्रतिमाह बतौर सैलरी मिलते हैं और अपने निर्वाचन क्षेत्र में काम के लिए 40 हज़ार रुपये हर महीने भी. इसके अलावा, संसद के सत्र के दौरान या पूरे कार्यकाल में किसी समिति की बैठकों के समय भी स्पीकर को दो हज़ार रुपये प्रतिदिन भत्ता भी मिलता है.

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हर सांसद की तरह स्पीकर के लिए भी 20 हज़ार रुपये हर महीने की पेंशन का प्रावधान है. अगर कोई सांसद पांच साल से ज़्यादा समय तक सांसद रहता है तो पेंशन की रकम हर साल डेढ़ हज़ार रुपये के हिसाब से बढ़ती जाती है. लेकिन, स्पीकर के लिए डेढ़ हज़ार रुपये का अतिरिक्त भत्ता पेंशन की रकम में जुड़ता है. इसके अलावा, सांसदों के लिए दफ्तर, खर्च, रहन सहन और यात्रा से जुड़े जो भी भत्ते हैं, वो सभी स्पीकर को भी मिलते हैं.

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ओम बिड़ला को लोकसभा अध्यक्ष की आसंदी तक पहुंचाते प्रधानमंत्री.


स्पीकर को मिलती हैं ये खास सुविधाएं
* स्पीकर और उसके परिवार के लिए यात्रा भत्तों की सुविधाएं उसी तरह होती हैं, जैसे सदन की कैबिनेट की होती हैं. देश या देश के बाहर कहीं भी यात्रा करने के दौरान लॉजिंग, बोर्डिंग और आवागमन की मुफ्त सुविधाएं स्पीकर को दी जाती हैं.
* स्पीकर के लिए भारत सरकार द्वारा एक किराया मुक्त और पूर्ण सुविधायुक्त फर्निश्ड आवास दिए जाने का प्रावधान है. इस आवास में बिजली, पानी के साथ ही एक सीमा तक फोन कॉल्स फ्री होते हैं. साथ ही, मुफ्त आवासीय कर्मचारी, स्टाफ और दूसरे सहयोगी भी दिए जाते हैं.
* इनके अलावा स्पीकर और उसके परिवार के लिए मुफ्त ​चिकित्सा सेवा की सुविधा होती है.

लोकसभा स्पीकरों से जुड़ीं कुछ दिलचस्प बातें भी जानें
- देश के इतिहास में 2009 से शुरू हुई 15वीं लोकसभा में मीरा कुमार के स्पीकर चुने जाने के बाद पहली बार ऐसा हुआ था, जब किसी महिला को यह पद मिला.
- जीवी मालवणकर को फादर ऑफ लोकसभा कहा जाता है क्योंकि वो देश के पहले लोकसभा स्पीकर थे. 1952 से 1956 तक स्पीकर रहे मालवणकर को उनकी निष्पक्षता के लिए भी याद किया जाता है.
- सिर्फ बलराम जाखड़ ही ऐसे स्पीकर रहे, जिन्होंने लगातार दो बार स्पीकर के तौर पर कार्यकाल पूरा किया. नीलम संजीव रेड्डी भी दो बार स्पीकर रहे थे, लेकिन पूरे कार्यकाल के लिए नहीं और न ही लगातार.

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First published: June 20, 2019, 1:10 PM IST
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