कौन हैं स्टीव हफ, जिन्होंने सुशांत सिंह की आत्मा से बातचीत का दावा किया

कौन हैं स्टीव हफ, जिन्होंने सुशांत सिंह की आत्मा से बातचीत का दावा किया
अभिनेता सुशांत की आत्मा से बातचीत करने का हफ का दावा चर्चा में है.

क्या आत्माओं से बातचीत की जा सकती है? आत्माओं की दुनिया से कैसे संपर्क किया जा सकता है? इस तरह के मामलों के विशेषज्ञ होने का दावा करने वाले स्टीव हफ (Steve Huff) ने कैसे बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की आत्मा से संपर्क किया? ये भी जानिए कि भारत में इस तरह के एक्सपर्ट कौन और कितने हैं.

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बॉलीवुड अभिनेता (Bollywood Actor) सुशांत सिंह राजपूत मौत के महीने भर बाद भी सुर्खियों में बने हुए हैं. हालिया चर्चा थी कि अमेरिकी पैरानॉर्मल एक्सपर्ट (Paranormal Expert) माने जाने वाले स्टीव हफ ने दावा किया कि उन्होंने सुशांत की आत्मा से बातचीत (Spirit Communication) की. सुशांत की आत्मा से बातचीत के दावे वाला एक वीडियो भी हफ ने यूट्यूब (Youtube Video) पर पोस्ट किया. इस वीडियो को 65 लाख से ज़्यादा व्यूज़ और मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिल चुकी हैं. हफ के बारे में जानना दिलचस्प है.

कितना सच है सुशांत की आत्मा से बात करने का दावा?
अव्वल तो इस सवाल का जवाब यही है कि यह विश्वास आधारित बात है. कुछ लोग इस तरह के कॉंसेप्ट में विश्वास करते हैं तो कुछ इसे सिरे से खारिज करते हैं. स्टीव हफ की अपनी एक फैन फॉलोइंग है और उन्होंने यह दावा किया कि उन्होंने सुशांत की आत्मा से बात करने का फैसला ही इसलिए किया क्योंकि उनसे कई लोगों ने इसके लिए अनुरोध किया था.

अब रही बात हफ के दावे के सच की, तो कुछ बिंदुओं पर ध्यान देना ज़रूरी है. पहली बात ये कि ​हफ ने जिस बातचीत का दावा किया, उसमें सुशांत की आत्मा अपनी मौत की कोई भी वजह नहीं बताती. सुशांत की मौत को लेकर जितने शक बने हुए हैं, उनमें से किसी से भी पर्दा उठाने में हफ की बातचीत नाकाम रही. इस बारे में हफ ने कहा कि उन्होंने सुशांत की आत्मा से सवाल किए थे, लेकिन आत्मा ने कुछ सवालों के जवाब नहीं दिए.
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खुद को पैरानॉर्मल बताने वाले स्टीव हफ. तस्वीर उनकी फेसबुक वॉल से.


क्यों नहीं मिले आत्मा से जवाब?
सुशांत की आत्मा ने हफ को जवाब क्यों नहीं दिए? इसके लिए सफाई देते हुए हफ अपनी थ्योरी बताते हैं कि आत्माएं शायद इस तरह की बातें नहीं करतीं या फिर उन्हें स्पेसिफिक डिटेल्स याद ही नहीं रहते. हफ ने ये भी कहा कि वो दस सालों के अपने अनुभव के आधार पर यह बात कह सकते हैं.

हफ की एक थ्योरी यह भी है कि आत्माएं हमारे भीतर जो ऊर्जा है, उसी का प्रतिरूप होती हैं लेकिन हमारी तरह भौतिक नहीं. इससे पहले भी अपने वीडियोज़ में हफ बताते रहे हैं कि क्यों आत्माएं साफ साफ कुछ नहीं कहतीं और क्यों उनसे बातचीत के माध्यम से रहस्यों से पर्दे नहीं उठ पाते. अब हफ के बारे में कुछ और जानते हैं.

कई हस्तियों की आत्मा से बात करने का दावा
अमेरिका के एरिज़ॉना में रहने वाले पैरानॉर्मल विशेषज्ञ हफ सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं. उनके यूट्यूब चैनल के 14 लाख से ज़्यादा सब्सक्राइबर हैं और उनकी एक वेबसाइट व ब्लॉग भी है. अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के ज़रिये वो दावा कर चुके हैं कि उन्होंने पिछले दस सालों से ज़्यादा के समय में हॉलीवुड अभिनेता रॉबिन विलियम्स, सिंगर डांसर माइकल जैक्सन और वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन जैसी कई हस्तियों की आत्मा से बातचीत की है और ऐसे कई वीडियो जारी किए हैं.

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सुशांत की आत्मा से बात करने के दावे को सोशल मीडिया पर हफ ने साझा किया था.


खुद को पैरानॉर्मल वैज्ञानिक और आविष्कारक कहते हैं हफ
अपनी वेबसाइट पर अपने और अपने काम के बारे में काफी कुछ जानकारी शेयर करने वाले हफ खुद को पैरानॉर्मल वैज्ञानिक बताकर अपने कई तरह के अनुभव साझा करते हैं. आत्माओं के बारे में अपनी समझ के साथ ही वह ये भी बताते हैं कि आत्माओं से संपर्क के लिए उन्होंने कुछ डिवाइस भी विकसित किए हैं.

खुद को इंस्ट्रूमेंटल ट्रांस कम्युनिकेशन रिसर्चर के रूप में पेश करने वाले हफ का दावा है कि उन्होंने THE PORTAL और THE WONDER BOX नाम के डिवाइस बनाए हैं, जिनके ज़रिये मृतकों से संपर्क किया जा सकता है. उनका यह भी दावा है कि 8 सालों के बाद दुनिया भर में उनके काम की कद्र होना शुरू हुई है. साथ ही, हफ खुद को फोटोग्राफर, ब्लॉगर और पैरानॉर्मल रिसर्चर भी बताते हैं.

क्या ये सब एंटरटेनमेंट मात्र है?
आत्माओं से बातचीत में उपयोगी जिस डिवाइस के ज़रिये आत्मओं की आवाज़ स्पष्ट ऑडियो में बदली जा सकती है, उसे हफ ने 'हफ स्पिरिट बॉक्स' नाम दिया है. एक रिपोर्ट की मानें तो यह डिवाइस तीन स्टार रेटिंग के साथ ऑनलाइन बेचा जा रहा है, जिसके डिस्क्रिप्शन में 'एंटरटेनमेंट पर्पज़ ओनली' लिखा है. इस बारे में हफ का कहना है कि अकेले इस डिवाइस के ज़रिये ही आत्माओं से संपर्क नहीं किया जा सकता इसलिए किसी विवाद से बचने के लिए ऐसा लिखा गया है.

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स्टीव हफ की यह तस्वीर फेसबुक से साभार.


सुशांत की आत्मा से बातचीत के और दावे
हफ इकलौते नहीं हैं, जिन्होंने सुशांत की आत्मा से बात करने का दावा किया हो. कुछ भारतीय पैरानॉर्मल विशेषज्ञों ने भी ऐसे दावे किए थे, लेकिन बात वहीं अटक गई कि ऐसे किसी दावे से कोई भी ऐसी नई या ठोस बात सामने नहीं आई, जिससे सुशांत की मौत से जुड़े किसी सवाल का जवाब मिल सके.

वैसे भी, सुशांत की मौत के बाद से सोशल मीडिया पर कई तरह के ज्योतिषों, टैरो कार्ड रीडरों, साइको काउंसलरों जैसे विशेषज्ञ सुशांत की मौत से जुड़े कई तरह के दावे करते दिख रहे हैं. लेकिन जानने की बात ये है कि भारत में चर्चित पैरानॉर्मल एक्सपर्ट कितने हैं और कौन हैं.

भारत में कम नहीं हैं पैरानॉर्मल एक्टिविटी एक्सपर्ट
देश में ऐसे एक्सपर्ट्स की कमी नहीं है, जो आत्माओं से संपर्क या बातचीत करने का दावा करते रहे हैं. भारत में ऐसे विशेषज्ञों की खासी तादाद के साथ ही इनकी अपनी संस्थाएं हैं और इसी साल एक पैरानॉर्मल हेल्पलाइन से जुड़ी चर्चाएं भी सामने आईं. हेल्पलाइन शुरू करने वाले पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर जय अलानी के मुताबिक हेल्पलाइन पर रोज़ाना दस से ज़्यादा कॉल्स आ रहे हैं जिनका समाधान वो कर रहे हैं.

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भारत में कई तरह की पैरानॉर्मल एक्टिविटी एक्सपर्ट सक्रिय हैं.


इस हेल्पलाइन के ज़रिये अलानी अंधविश्वासों, पूर्वाग्रहों, काले जादू और भूत प्रेतों से जुड़ी धारणाओं और समस्याओं का समाधान करने का दावा ​करते हैं. एक किताब, एक वेबसीरीज़ और एक पॉडकास्ट से चर्चित हो चुके अलानी के ऑडियो 'पैरानॉर्मल रिएलिटी' को सवा करोड़ से ज़्यादा बार सुना जा चुका है. अलानी के अलावा भी कई विशेषज्ञ भारत में चर्चित हैं.

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इंडियन पैरानॉर्मल टीम के अक्षय स्थालेकर सात सालों से पैरानॉर्मल इन्वे​स्टिगेशन के पेशे में हैं और उनकी टीम पुणे से लोनावला के बीच 'घोस्ट वॉक' का आयोजन करती है. एक दशक से ज़्यादा समय से इस पेशे में सक्रिय पश्चिम बंगाल बेस्ड अविजित सरकार कहते हैं कि वो अपनी प्रतिभा के ज़रिये काले जादू के खिलाफ लड़ रहे हैं. इसी तरह, बेंगलुरु बेस्ड डॉ. राहुल कुमार, स्वतंत्र इन्वेस्टिगेटर नीरव आनंद जैसे कई विशेषज्ञ भारत में मौजूद हैं, तो भारतीय पैरानॉर्मल सोसायटी के संस्थापक गौरव तिवारी भी अपनी मौत से पहले काफी चर्चित रहे थे.

जब सुपरनैचुरल की बात होती है, तो हम भारतीय सबसे ज़्यादा अवैज्ञानिक लोग हैं. हम आत्माओं की दुनिया को तर्क के साथ देखने से डरते हैं, जबकि विज्ञान भी साबित कर चुका है कि कुछ है जो विज्ञान से परे है. क्या हम एडिसन जैसे वैज्ञानिक का मज़ाक उड़ाएंगे,​ जिसने स्पिरिट मशीन बनाई थी, या हम दुनिया भर में इस बारे में हो रहे अध्ययनों को दरकिनार करेंगे?


पैरानॉर्मल अध्ययनों को लेकर भारत में भारी कमी के लिए अफसोस ज़ाहिर करने वाली साइकिक रिसर्चर और लॉयर दीप्ता रॉय चक्रवर्ती की किताब काफी चर्चित हुई थी. डरावनी हवेलियों, पुनर्जन्म, आत्माओं से बातचीत और इन विषयों पर लेखन की विशेषज्ञ के रूप में दीप्ता कहती हैं कि अगर भारत में इन विषयों पर सकारात्मक रूप से स्टडीज़ और रिसर्च हों तो नये विचारों और वैज्ञानिक खोजों की संभावनाएं बहुत हैं.
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