क्या होता है टेबलटॉप रनवे? यहां जोखिम भरी क्यों होती है विमान की लैंडिंग?

विमान लैंडिंग के लिए इलस्ट्रेशन Pixabay से साभार.

विमान लैंडिंग के लिए इलस्ट्रेशन Pixabay से साभार.

केरल में कोझिकोड एयरपोर्ट पर शुक्रवार को विमान हादसे (Kozhikode Plane Crash) का शिकार होकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ. इस हादसे में करीब डेढ़ दर्जन लोगों की मौतों की खबरें हैं. जानना चाहिए कि हादसे ​के लिए एयरपोर्ट (Kozhikode Airport) के रनवे का खतरनाक होना कितना ज़िम्मेदार था. किस तरह लापरवाहियां महंगी पड़ीं और अब क्या सबक लिये जाने चाहिए.

  • News18India
  • Last Updated: August 9, 2020, 5:40 PM IST
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कोझिकोड में हवाई जहाज़ों (Airplane) की लैंडिंग के लिए रनवे बना है, उसका टेबलटॉप होना खतरनाक माना जा रहा है. बीते 7 अगस्त को एयर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express) का एक विमाने जबसे यहां हादसे का शिकार (Plane Crash) हुआ, तबसे यह रनवे चर्चा में है. ​कोझिकोड के अलावा भारत में मैंगलूरु (Mengaluru) और मणिपुर के लेंगपुई में सिर्फ दो रनवे और टेबलटॉप किस्म के हैं. माना जाता है कि ऐसे रनवे पर सही मौसम में भी विमान की लैंडिंग (Landing) काफी मुश्किल काम होता है. क्या होते हैं टेबलटॉप रनवे और ये भी जानें कि क्यों ये जोखिम भरे होते हैं.

क्या होता है टेबलटॉप रनवे?
सीधे शब्दों में समझें तो किसी पहाड़ी इलाके में समतल की गई जगह पर बने रनवे को टेबलटॉप रनवे कहते हैं. कोझिकोड एयरपोर्ट पर जो रनवे है, वो पहाड़ी इलाके में है और पहाड़ों के बीच संकरी सी जगह में है. ऐसे में होता ये है कि अगर कोई विमान तेज़ गति में लैंड करे, तो हादसे की आशंका रहती है क्योंकि भले ही 240 मीटर का रनवे सेफ्टी एरिया है, लेकिन कभी कभी तकनीकी खराबी या पायलट की गलती के चलते कम पड़ जाता है और विमान सीधा खड्ड या पहाड़ी संरचना से टकराकर हादसे का शिकार हो जाता है, जैसा कोझिकोड में हुआ.

ऐसी खतरनाक जगह क्यों बना एयरपोर्ट?
कोझिकोड का एयरपोर्ट पड़ोसी ज़िले मलप्पुरम से सटे पहाड़ी इलाके में इसलिए बना क्योंकि राज्य सरकार को और कहीं जगह नहीं ​दिखी. चूंकि इस एयरपोर्ट से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें भी होकर गुज़रती हैं इसलिए बाद में इस एयरपोर्ट के रनवे को अपग्रेड किया गया था.



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केरल विमान हादसे में 18 लोगों की जानें गईं और 149 घायलों में से 22 की हालत गंभीर है.


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रनवे पर सॉफ्ट बेड न होने पर सवाल
इसके बावजूद टेबलटॉप रनवे के लिए अनिवार्य ग्राउंड अरेस्टर बेड यहां नहीं है. यह यांत्रिकी मटेरियल से बना एक सॉफ्ट बिस्तर जैसा रनवे के आखिर में बिछा होता है, जो विमान की गति को कम करने में मदद करता है. इस बेड के अभाव के बावजूद इसे डीजीसीए यानी सिविल एविएशन के महानिदेशक से अप्रूवल कैसे मिला? इस तरह के सवाल हालिया हादसे के बाद खड़े हुए हैं.

टेबलटॉप रनवे पर मौसम का असर
अव्वल तो ऐसे रनवे पर गलती किए जाने की गुंजाइश ही बहुत कम है. ऐसे में मौसम खराब हो या हवाएं तेज़ हों, जो कि पहाड़ी इलाके की वजह से अक्सर होता है, तो ऐसे में विमान की विज़िबिलिटी पर असर पड़ता है. हालिया हादसे को लेकर कहा जा रहा है कि यहां भारी बारिश के चलते पायलट ने पहले लैंडिंग प्रयास को छोड़ा और दूसरी बार कोशिश की लेकिन फिसलन से विमान के पहिए पायलट के काबू में नहीं रहे.

टेबलटॉप रनवे की और मुश्किलें
चूंकि ऐसे रनवे की लंबाई अपेक्षाकृत कम होती है इसलिए ज़रूरी होता है कि विमान फौरन अपनी गति को नियंत्रित करे. इसके अलावा, पायलट को लैंडिंग के वक्त टेबलटॉप रनवे पर पैदा होने वाले ऑप्टिकल इल्यूज़न इफेक्ट यानी दृष्टि भ्रम को लेकर भी सचेत रहना होता है. होता यह है कि पायलट को दिख सकता है कि रनवे चला जा रहा है, लेकिन एक तय लंबाई के बाद रनवे खत्म हो जाता है और खाई शुरू हो जाती है.

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कोझिकोड एयरपोर्ट पर इस तरह क्षतिग्रस्त हो गया विमान.


मैंगलूरु हादसे के बाद क्या थीं सिफारिशें?
टेबलटॉप रनवे पर हादसे के बाद भारतीय वायु सेना के पूर्व उप प्रमुख रहे एयर मार्शल बीएन गोखले की कोर्ट ने अक्टूबर 2010 की रिपोर्ट में कई तरह की सिफारिशें की थीं. इनमें प्रमुख रूप से जिन सिफारिशों का शुमार था, उनमें ग्राउंड अरेस्टिंग सिस्टम या बेड की ज़रूरत, बची हुई दूरी के बारे में पायलट को अलर्ट करने वाले विज़ुअल रिफरेंस सिस्टम की ज़रूरत, एटीसी टावर की लोकेशन, एरिया रडार, फायर फाइटरों और बचाव दलों की भूमिका के साथ ही एरोड्रम रिस्क असेसमेंट की ज़रूरत शामिल थी.

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अब किन कदमों की है ज़रूरत?
सबसे पहले इस नज़रिये से निजात पानी होगी कि हादसे के बाद ही यह चिल्लाया जाए कि रनवे को ICAO स्टैंडर्ड पर खरा उतरना चाहिए. एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट कैप्टन मोहन रंगनाथन ने ये भी कहा कि अगर सरकार वाकई गंभीर है तो उसे कोझिकोड को कोड 3सी एयरपोर्ट के रूपमें घोषित करना चाहिए, जहां केवल छोटे आकार के एयरक्राफ्ट ही आवाजाही कर सकें.

साथ ही, रंगनाथन के हवाले से द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक मानसून में रनवे 10 पर लैंडिंग बैन होना चाहिए, सभी मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए, पायलटों के लिए लैंडिंग दुर्घटना संबंधी ट्रेनिंग अनिवार्य होना चाहिए और व्यावसायिक हितों के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन को पारदर्शिता बरतना चाहिए.
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