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बजट से पहले जानिए कितनी तरह के होते हैं टैक्स, कौन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष

जानिए बजट में टैक्सों के बारे में और उनके लिए बजट में किस तरह के टर्म इस्तेमाल किए जाते हैं.

जानिए बजट में टैक्सों के बारे में और उनके लिए बजट में किस तरह के टर्म इस्तेमाल किए जाते हैं.

Know About Taxes : 01 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitaraman) बजट पेश करने वाली हैं. ...अधिक पढ़ें

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 01 फरवरी को देश का आम बजट पेश करेंगी.  05 राज्यों में जहां विधानसभा चुनाव हैं तो कोरोना का असर अब भी अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर है. ऐसे में आम आदमी और नौकरीपेशा लोगों की निगाहें बजट में पेश होने वाले टैक्स पर लगी हैं. वैसे तो हर बार ही बजट में आम आदमी की निगाहें टैक्स शब्द पर सबसे ज्यादा रहती हैं लेकिन हरेक टैक्स के मायने काफी अलग-अलग होते हैं. जानिए, टैक्स के लिए अलग टर्म का इस्तेमाल क्यों होता है और क्या होता है उनका मतलब.

    कई तरह के होते हैं कर
    टैक्स का साधारण मतलब है वो कर, जो हर आम आदमी के लिए अनिवार्य है ताकि सरकारी योजनाएं चलती रह सकें. मोटे अर्थों में टैक्स दो श्रेणियों में बांटा जाता है. डायरेक्ट टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स. डायरेक्ट टैक्स वो है, जो सीधे लिया जाता है. इनकम टैक्स, शेयर या दूसरी प्रॉपर्टी की आय पर लगने वाले टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स, विरासत में मिली संपत्ति पर टैक्स इसी श्रेणी में आते हैं.

    ये है अप्रत्यक्ष कर
    इसके अलावा टैक्स की दूसरी श्रेणी है इनडायरेक्ट टैक्स. ये सीधे-सीधे तो आम आदमी से नहीं लिया जाता लेकिन किसी न किसी तरह से ये आम आदमी को ही देना होता है. मिसाल के तौर पर एक्साइज टैक्स, जीएसटी, कस्टम टैक्स. ये टैक्स सीधे तो नहीं जाता है लेकिन किसी तरह की सर्विस या खरीदी पर ये टैक्स देना होता है.

    budget 2021

    टैक्स का साधारण मतलब है वो कर, जो हर आम आदमी के लिए अनिवार्य है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

    समझें इनकम टैक्स को 
    टैक्स की बात करते हुए जो शब्द लगातार कहा-सुना जाता है, वो है इनकम टैक्स. बहुत भारी-भरकम सुनाई देने वाले इस टैक्स के मायने आसान हैं. लोगों की इनकम यानी आमदनी पर जो टैक्स जाता है, वो यही है. जैसे तनख्वाह, इनवेस्टमेंट पर लगने वाला टैक्स. इसमें अलग आय के आधार पर अलग टैक्स जाता है.

    एक टैक्स कॉर्पोरेट टैक्स कहलाता है
    इसका आम लोगों से ताल्लुक नहीं, बल्कि यह कंपनियों पर लगने वाला टैक्स है. बड़ी-बड़ी कॉर्पोरेट फर्म ये टैक्स सीधे सरकार को देती हैं. ये हमेशी ही बड़ी राशि होती है. इसके अलावा कंपनियों को एक और टैक्स देना होता है, जिसे न्यूनतम वैकल्पिक टैक्स कहते हैं. ये कंपनी अपने लाभ पर प्रतिशत में देती है.

    ये शब्द भी कहे जाते हैं 
    सेस और सरचार्ज भी टैक्स की बातों के दौरान आने वाले शब्द हैं. सेस (Cess) यानी उपकर किसी खास मकसद के लिए पैसे जमा करने के लिए लगाया जाता है. उदाहरण के लिए स्वच्छ भारत सेस या स्वच्छ पर्यावरण सेस. इनकी दर 0.5% है. वहीं सरचार्ज यानी अधिबार इनकम टैक्स पर लगने वाला टैक्स है. इसकी दर टैक्स लाएबिलिटी के आधार पर तय होती है.

    budget 2021

    सेस और सरचार्ज भी टैक्स की बातों के दौरान आने वाले शब्द हैं

    उत्पाद और सीमा शुल्क भी टैक्स की श्रेणियां हैं
    उत्पाद शुल्क यानी एक्साइज ड्यूटी को कुछ समय से जीएसटी के तहत लिया जा रहा है. इसे ऐसे समझ सकते हैं कि हम बाजार जाकर छोटे से लेकर बड़ा जो भी उत्पाद खरीदते हैं, हमें सरकार को उसपर टैक्स देना होता है. ये उत्पाद शुल्क है, जो अपने ही देश में बने प्रोडक्ट पर लगता है. दूसरी ओर सीमा यानी कस्टम शुल्क वो है, जो देश से बाहर से आई चीजों पर लगाया जाता है.

    जब लगाएं शेयर में पैसे
    इन तमाम श्रेणियों के अलावा टैक्स की एक और श्रेणी है, जिसे सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स या प्रतिभूति लेनदेन कर कहते हैं. ये टैक्स हमें तब देना होता है, जब हम अपने पैसे किसी तरह के शेयर मार्केट में लगाते हैं, जैसे शेयर खरीदने या बेचने का काम करते हैं. म्युचुअल फंड में निवेश करना भी इसी श्रेणी में आता है, जिसपर हमें निश्चित कर सरकार को देना होता है.

    Tags: Budget, Direct tax, Finance minister Nirmala Sitharaman, Income tax

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