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भारत की पुरानी मिसाइल अब है आवाज से तीन गुना तेज, चीन के कई शहर ज़द में

ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज ओरिजनल वर्जन से बेहतर हो चुकी है.
ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज ओरिजनल वर्जन से बेहतर हो चुकी है.

भारत और चीन के ताज़ा सीमा तनाव (Border Tension) के बीच ब्रह्मोस के लैटेस्ट वर्जन का सफल परीक्षण (Brahmos Test Fired) हुआ. पहले ही लद्दाख (Ladakh) व अरुणाचल में तैनात की जा चुकी यह मिसाइल कैसे नई स्वदेशी तकनीकों से लैस है और इसकी खूबियां क्या हैं?

  • News18India
  • Last Updated: October 1, 2020, 12:09 PM IST
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भारत ने बीते बुधवार को जिस ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल (Brahmos supersonic cruise missile) का सफल परीक्षण किया, वो ऑपरेशन के मामले में दुनिया की सबसे तेज़ एंटी शिप (Anti Ship Missile) क्रूज़ मिसाइल है. अब इसे नए स्वदेशी बूस्टर (Swadeshi Booster), एयरफ्रेम सेक्टर और अन्य उपकरणों से तैयार कर दिया गया है, जो काफी खास हैं. सबसे खास बात तो यह है कि इस मिसाइल की स्पीड (Speed of Missile) आवाज़ की स्पीड से करीब तीन गुना तेज़ हो गई है और इसकी रेंज इतनी हो गई है कि चीन के कई शहर इस मिसाइल की मार के दायरे में आ सकते हैं.

तकरीबन 400 किलोमीटर की रेंज वाली सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल के नए वर्जन का परीक्षण चर्चा में है. परीक्षण से पहले यह मिसाइल इसलिए चर्चा में रही थी क्योंकि भारत और चीन के बीच बने हुए तनाव के हालात के चलते, पिछले दिनों ही ब्रह्मोस मिसाइल को लद्दाख सेक्टर में चीनी सीमा के पास तैनात किया गया था. आइए आपको बताते हैं कि यह मिसाइल कितनी खास है.

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पिछले वर्जन से डेढ़ गुना बेहतर
ब्रह्मोस के जिस नए वर्जन को लॉंच किया गया है, उसकी रेंज करीब 400 किलोमीटर तक हो गई है, जबकि इसके ओरिजनल वर्जन की रेंज 290 किलोमीटर के करीब थी. इसके साथ ही, नए वर्जन की स्पीड माक 2.8 तक हो चुकी है यानी ध्वनि की रफ्तार से तीन गुना तेज़. अब इस मिसाइल की स्थिति यह है कि इसे सबमरीन, जहाज़, एयरक्राफ्ट और ज़मीनी जंगी बेड़ों से भी दागा जा सकता है.

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बुधवार को ब्रह्मोस के नए वर्जन का सफल परीक्षण बालासोर में किया गया.


​पिछले साल, भारत ने इस मिसाइल के एरियल वर्जन का सफल परीक्षण किया था, जिसे सुखोई यानी Su-30 MKI से लॉंच किया था. इस मिसाइल के हवाई वर्जन की खासियत यह है कि इसे दिन या रात किसी भी समय और किसी भी मौसम में दागा जा सकता है. यही नहीं, निशाना भी समुद्री या ज़मीनी हो सकता है. भारतीय वायु सेना ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल को 40 से ज़्यादा सुखोई फाइटर विमानों के साथ शामिल कर रही है जिससे उसकी जंगी क्षमता बेहतर से बेहतरीन हो सके.

ब्रह्मोस के आम और खास फीचर
सामान्य रूप से ब्रह्मोस मिसाइलें पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में 3 गुना तेज़ स्पीड वाली हैं और इनकी फ्लाइट रेंज ढाई से तीन गुना ज़्यादा है. ब्रह्मोस में काइनैटिक एनर्जी 9 गुना ज़्यादा है और इसकी खोजी रेंज 3 से 4 गुना बेहतर है. इनके अलावा, इस मिसाइल के कुछ खास फीचर इस तरह हैं.

यह मिसाइल कई प्लेटफॉर्मों के मामले में यूनिर्वसल है और यह इतनी अचूक है कि इसे दागने के मामले में 'फायर एंड फॉरगेट' ​यानी 'दागो और भूल जाओ' वाले सिद्धांत पर अमल करती है. अपने निशाने तक यह बहुत कम समय में पहुंचने की क्षमता रखती है और अपनी बेतहाशा काइनैटिक एनर्जी के कारण इसकी मारक और घातक ताकत एकदम सटीक है.

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आत्मनिर्भर भारत पैकेज में अहम
हाल में लॉंच किए गए ब्रह्मोस के नए वर्जन को स्वदेशी तकनीकों के कारण आत्मनिर्भर भारत के पैकेज में अहम माना जा रहा है. रक्षा मंत्री समेत प्रधानमंत्री ने भी इस बारे में अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं. रूस और भारत इस मिसाइल को मिलकर विकसित करते रहे हैं लेकिन अब इसमें कुछ 'मेड इन इंडिया' तकनीकों और सब सिस्टम के कारण इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

गौरतलब है कि भारत चीन सीमा तनाव के चलते हाल में बॉर्डर पर तैनात कर दी गई ब्रह्मोस मिसाइल का उपयोग भारत के द्वीप क्षेत्रों में एयरबेस का इस्तेमाल करके हिंद महासागर में चोक पॉइंट बनाने के लिए किया जा सकता है. खबरों में कहा गया कि भारतीय वायुसेना के कार निकोबार एयर बेस पर इन मिसाइलों के उपयोग की संभावना बनती है, क्योंकि यह बेस इंडोनेशियाई मलक्का स्ट्रेट से सुंडा स्टाटन तक आने वाले, चीनी आर्मी के किसी भी युद्धपोत के खतरे से सुरक्षा देता है.
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