चांद के उस हिस्से पर कैसा मौसम है, जहां है चंद्रयान का लैंडर विक्रम

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Updated: September 12, 2019, 11:58 AM IST
चांद के उस हिस्से पर कैसा मौसम है, जहां है चंद्रयान का लैंडर विक्रम
लैंडर विक्रम से संपर्क करने के तमाम उपाय ढूंढ़ने में नासा की मदद ले रहा है इसरो.

विशेषज्ञ (Experts) मान रहे हैं कि क्रैश लैंडिंग (Crash Landing) का शिकार हुआ लैंडर विक्रम (Lander Vikram) सुरक्षित बचा हो, इसकी उम्मीद बहुत कम है. चांद की जिस सतह पर विक्रम क्रैश हुआ है, वहां परिस्थितियां कठिन हैं.

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चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) के लैंडर विक्रम के चंद्रमा की सतह (Lunar Surface) पर लैंडिंग के दौरान क्रैश हो जाने के बाद भारत का यह अंतरिक्ष मिशन (Space Mission) सफल नहीं हो सका. इस मामले में ताज़ा खबर ये है कि अब लैंडर से संपर्क बहाल हो पाने की उम्मीद धुंधलाती जा रही है. इसी बीच, आपको जानना चाहिए कि क्रैश हुआ लैंडर विक्रम चांद के जिस हिस्से में (Lunar Poll) पड़ा है, वहां किस तरह का मौसम या कितनी कठोर स्थितियां हैं. क्या वाकई चांद के उस हिस्से का तापमान (Lunar Temperature) माइनस 200 डिग्री सेल्सियस है?

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कितना रहता है चांद का तापमान?
चंद्रमा अपनी धुरी (Axis) पर करीब 27 दिनों में एक पूरा चक्कर लगाता है इसलिए चंद्रमा का एक दिन (Lunar Day) धरती के करीब साढ़े तेरह दिन और एक रात (Lunar Night) साढ़े तेरह रातों के बराबर होती है. जब सूरज की धूप (Sunlight) चंद्रमा की सतह पर पड़ती है तो वहां तापमान माइनस 127 सेल्सियस डिग्री तक रहता है और सूरज के डूबने के साथ ही ये तापमान माइनस 173 डिग्री तक पहुंच जाता है.

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तो क्या माइनस 200 डिग्री नहीं है तापमान?
असल में चांद की सतह के अलग-अलग हिस्सों में तापमान अलग-अलग होता है. पृथ्वी की तरह चांद के भी दो ध्रुव हैं और यहां अपेक्षाकृत रूप से तापमान बहुत कम होता है. नासा के एक चंद्रयान डिवाइनर के इंस्ट्रूमेंट ने पता लगाया था कि चांद के दक्षिण ध्रुव के क्रेटरों पर माइनस 238 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रहता है और उत्तरी ध्रुव के एक क्रेटर पर माइनस 247 डिग्री तक. गौरतलब है कि भारत का लैंडर विक्रम दक्षिणी ध्रुव के एक हिस्से में है.
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चांद पर क्यों नहीं होते मौसम?
परिक्रमा के दौरान चांद अपनी धुरी पर सिर्फ 1.54 डिग्री तक तिरछा होता है जबकि पृथ्वी 23.44 डिग्री तक. इस वजह से दो बातें होती हैं. एक यह कि चांद पर पृथ्वी की तरह मौसम नहीं बदलते और दूसरी बात ये कि चांद के ध्रुवों पर ऐसे कई इलाके हैं जहां कभी सूरज की रोशनी या किरणें पहुंच ही नहीं पातीं.

क्या अंधेरे कोनों में है पानी का रहस्य?
वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा के जो एकदम अंधेरे हिस्से वाले क्रेटर हैं, उनमें वॉटर आइस यानी बर्फ की शक्ल में पानी मौजूद हो सकता है. भारत के चंद्रयान 1 के साथ ही नासा के रडार ने भी ये खोजा था कि चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव के 40 छोटे क्रेटरों में भारी मात्रा में वॉटर आइस मौजूद है.



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First published: September 12, 2019, 9:31 AM IST
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