कश्मीर पर लिखे किस ​आर्टिकल पर पाकिस्तानी राजनयिक से भिड़ रही हैं शोभा डे?

पूर्व पाकिस्तानी उच्चायुक्त (Former Pak high Commissioner) ने कहा कि उन्होंने कश्मी​र (Kashmir) में जनमत के हक में विचार करने का आइडिया डे के साथ साझा किया था, जिस पर उन्होंने लेख लिखा. डे ने इस बयान को खतरनाक बताया.

News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 8:08 PM IST
कश्मीर पर लिखे किस ​आर्टिकल पर पाकिस्तानी राजनयिक से भिड़ रही हैं शोभा डे?
कॉलम लेखिका शोभा डे. फाइल फोटो.
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Updated: August 13, 2019, 8:08 PM IST
कॉलमिस्ट शोभा डे (Shobha De) ने पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित (Abdul Basit) के उस बयान को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि डे ने कश्मीर पर जो लेख लिखा था, असल में उसकी प्रेरणा उन्होंने दी थी. प्रतिक्रिया देते हुए शोभा डे ने बासित के बयान को खतरनाक और दुर्भावनापूर्ण करार देकर कहा है कि वह खासा अपमानित महसूस कर रही हैं. चूंकि शोभा डे ने यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया (Social Media) के ज़रिए दी इसलिए सोशल मीडिया पर यह मामला काफी चर्चित हो गया है. लेकिन, असल में अब्दुल बासित और शोभा डे के उस लेख के बारे में आप क्या जानते हैं? इस सवाल के साथ ही यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि उस लेख में ऐसा क्या लिखा गया था, जिस पर इतना हंगामा हो रहा है.

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शोभा डे ने खुद को देशभक्त भारतीय कहते हुए तीन साल पहले लिखे लेख (Article) पर बासित की टिप्पणी को खारिज किया. बासित 2014 से 2018 तक भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त (Pakistan high Commissioner) के तौर पर पदस्थ थे. आइए जानें डे और बासित के बीच चल रही जंग क्या और क्यों है.

ट्विटर पर चली जंग

सोशल मीडिया के चर्चित प्लेटफॉर्म ट्विटर पर बासित का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह कहते हुए दिखे कि हिज़्बुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी की जुलाई 2016 में मौत के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और उस वक्त कश्मीर में आर्थिक अवरोध के हालात भी थे लेकिन इन सब बातों पर कोई पत्रकार नहीं लिख रहा था. बासित ने कहा कि उस वक्त उन्होंने इस बारे में डे से मुलाकात कर उन्हें कश्मीर के 'जनमत' के बारे में अपने खयाल बताए थे, जिन्हें उन्होंने अपने एक लेख में दर्ज किया.

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बासित का ये बयान सामने आने के बाद डे ने ट्विटर के ज़रिए एक वीडियो में कहा, 'झूठ का पर्दाफाश किया जाना ज़रूरी है. खास तौर से तब, जबकि ये झूठ नफरत पैदा करने वाले एक व्यक्ति ने बोला हो और वो सिर्फ मेरे ही नहीं बल्कि भारत के श्रेय के साथ खिलवाड़ करने वाली कहानियां फैला रहा हो.'

ऐसा क्या था उस लेख में, जिस पर हंगामा है?
शोभा डे ने टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए एक लेख लिखा था, जो 17 जुलाई 2016 को पोर्टल पर प्रकाशित हुआ. इस लेख का शीर्षक था, 'बुरहान वानी मर गया लेकिन जब तक हम नहीं समझते कि कश्मीर क्या चाहता है, वह ज़िंदा रहेगा'. इस लेख के कुछ चुने हुए अंश यहां पढ़ें और समझें कि पूर्व पाक राजनयिक ने इस लेख को लेकर डे पर क्यों ऐसी टिप्पणी की.

'जन्नत की खातिर! वक्त है कि जागें और कहवा चखें! कश्मीर जल रहा है. यहां गुस्से और जुनून की आग लगी है. इसे गोलियों से नहीं बुझाया जा सकता. सारे नकाब उतारकर देखें कि हम कितनी बुरी तरह से यहां नाकाम हुए हैं. किसी सबूत की ज़रूरत है तो 22 साल के बुरहान वानी को देखें.'

'कोई कश्मीरियों से ये नहीं पूछना चाहता कि 'आप क्या चाहते हैं?' दोनों देश युद्ध में मगन हैं और अपने अपने पैंतरे आज़माने पर तुले हुए हैं, ये समझे ​बगैर कि इस हिंसा से सबसे ज़्यादा प्रभावित लोग आखिर चाहते क्या हैं.

'कश्मीर की समस्या को हमेशा के लिए हल करने की दिशा में जनमत संग्रह के कदम पर मौजूदा सरकार क्या कर पाएगी, ये देखना है. घाटी में जो दर्द गूंज रहा है, उसे अब खत्म करें और कश्मीरियों को शांति के माहौल में सम्मान और सद्भाव के साथ जीने के हालात बनाएं, जिसके वो हक़दार हैं.'

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First published: August 13, 2019, 6:43 PM IST
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